ठेकेदार के शोषण से परेशान मजदूर साईकील से निकल पड़े कोलकाता


ठेकेदार के शोषण से परेशान मजदूर साईकील से निकल पड़े कोलकाता

रायगढ़-

पच्शिम बंगाल राज्य के कोलकाता शहर से रायगढ़ शहर रोजी मजदूरी कमाने के लिए कुछ महीने पहले आए मजदूर जब लाकडॉऊन और ठेकेदार के आर्थिक शोषण से परेशान हो गए तो सभी 6 मजदूर सायकल से ही कोलकाता वापस जाने के लिए ढिमरापुर चौक से निकल पड़े. मजदूर अभी करीब पांच किमी दूर विजयपुर पेट्रोल पंप तक पहुंच पाए थे, कि उन पर सिंधी कालोनी के दो भाई पेट्रोल भरवाने गए हुए थे.

 

अचानक मुकेश और पंकज पुरूषवानी की नजर पड़ गई. उन्होंने मजदूरों का हाल-चाल जाना फिर उन्होंने कहा कि वे लोग कई महीनों पहले यहां एक ठेकेदार के साथ रोजी मजदूरी कमाने कोलकाता से आये थे. ठेकेदार द्वारा रहने के लिए किराए का मकान ढिमरापुर में दिलवाया जहाँ से वे रायगढ़ शहर में पुट्टी पेंट काम करने जाते थे. बदले में ठेकेदार उन्हें कभी- कभार थोड़े पैसे देता रहा.


लाकडॉऊन के बाद जब उन्होंने ठेकेदार से पेमेंट मांगा तो वह कुछ दिनों तक घूमाने के बाद ना तो उनको पेमेंट दिया ना ही उनको राशन पानी दिया. इसके अलावा ठेकेदार के द्वारा उन्हें बोला गया कि तुम लोग अपने घर वापस जा सकते हो तो जाओ अब मेरे पास तुम्हे देने के लिए कुछ नहीं है. ठेकेदार के इस आचरण से व्यथित मजदूर मजबूरी वश घर वापस जाने के लिए निकल पड़े. जहां कोरोना महामारी के चलते केंद्र व छत्तीसगढ़ सरकार ने सम्पूर्ण लॉक डाउन का निर्णय लिया हुआ है. जिसके तहत ट्रेन, सभी वाहनों की अवाजावी पर रोक लगा दी है. सरकार कें निर्णय से परिचित सभी छह मजदूर आज सुबह 5 बजे ढिमरापुर स्थित किराए के मकान से अपनी-साइकिल के सहारे कोलकाता वापस जाने के लिए निकल गए.

 

श्रमिक जैसे ही शहर के बोईरदादर विजयपुर स्थित पेट्रोल पम्प तंक पहुंचे ही थे कि वहाँ पेट्रोल भराने गए सिंधी कॉलोनी के दो युवा मुकेश पुरूषवानी और पंकज पुरूषवानी की नजर पड़ गई. उन्होंने उन्हें रोक कर चाय नास्ता पानी पिलवाया. उनसे जानकारी लेकर सन्तोष पुरूषवानी को वहां बुला लिया. कुछ ही देर में मौके पर पहुंचकर मीडिया को नम आंखों से मजदूरों ने अपनी परेशानी बताई.

 

उन्होंने कहा कि वे सभी मजबूर होकर साईकील से ही कोलकाता जाने के लिए निकले है. वे लोग इस अभाव और परेशानी के समय मे अपने परिवार वालों से मिलना चाह रहे है. अतः बिना खाये पियें वे सभी लोग कोलकाता जा रहे है. उनकी जेबें पूरी तरह से खाली है.

 

अतः परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझते हुए श्रमिकों का हौसला बढ़ाया. फिर एडिशनल एसपी अभिषेक वर्मा को मोबाइल पर पूरी जानकारी दी. कुछ देरी बाद चक्रधर नगर थाना प्रभारी सहित पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी मौके पर पहुंच गई. पुलिस सभी 6 मजदूरों को अपने साथ ले गई. एडिशनल एस पी के निर्देश पर उनके लिये राशन पानी की भी व्यवस्था की गई है.

 

इधर पत्रकार सन्तोष पुरुषवानी ने रायगढ़ एसपी से निवेदन किया है कि जितने भी इस तरह के स्वार्थी ठेकेदारों के द्वारा अपना काम करवाने के लिये दूसरे प्रांतों से मजदूर/श्रमिक लाए जाते हैं और उनके द्वारा श्रमिकों के रहन-सहन और खाने पीने की  व्यवस्था नही की जाती है साथ ही उनकी खून पसीने की कमाई भी दबा दी जाती है. ऐसे ठग बाज ठेकेदारों के विरुद्ध अब कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए ताकि दूसरे ठेकेदारों को सबक मिल पाए.



 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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