जब सही जानकारी होगी पूरी, तभी कोरोना से होगा दूरी


जब सही जानकारी होगी पूरी, तभी कोरोना से होगा दूरी

• उम्र, जाति, पद, लिंग एवं  क्षेत्र से नहीं है कोरोना का संबंध 

• बिना सतर्कता बरते किसी में भी फ़ैल सकता है संक्रमण 

• शहर-गांव व अमीर- गरीब जैसे भ्रांतियों से रहें दूर

 

अप्रैल: ‘‘कोरोनावायरस तो विदेशी रोग है. यह आया भी विदेश से ही है. हमलोग तो ठहरे पूरे देसी आदमी. ये वायरस हमलोगों को संक्रमित नहीं करेगा. ये अमीर देश से आया रोग है और अमीरों को ही होगा. गाँव में तो शुद्ध हवा चलती है जिसमें कोई वायरस जिंदा नहीं रह पाएगा’’. यदि आप भी ऐसे ही वार्तालाप में शरीक होकर कोरोनावायरस को अमीरों का रोग समझ रहे हैं, तो सावधान हो जाएं. सोशल मीडिया एवं कुछ अनाधिकृत स्रोतों के माध्यम से यह अफवाह फैलाई जा रही है कि कोरोनावायरस सिर्फ अमीरों में होने वाला रोग है. इन अफवाहों का असर अब छोटे-छोटे शहरों के साथ गाँवों में दिखने लगा है. लोग सही जानकारी के अभाव में कोरोना जैसी गंभीर रोग को अमीरी एवं गरीबी से जोड़कर देखने लगे हैं.

 

कोरानावायरस संक्रमण को लेकर इस तरह से कई भ्रांतियां सोशल मीडिया, व्हाट्सएैप सहित अनाधिकृत माध्यमों से फैल कर समुदाय में जा रही है. इन भ्रांतियों को सही मान लेने से जाने-अनजाने हम स्वयं के साथ अपने परिवार वालों के लिए इस बीमारी को आमंत्रित कर रहे हैं. इन अफवाहों का यह असर दिख रहा है कि लोग अब यह समझने की भूल कर रहे हैं कि यह गांव में रहने वालों का रोग नहीं है.  लोग इसे शहरी रोग समझ रहे हैं. जबकि ये सभी बातें पूरी तरह निराधार है. 

 

कोरोनावायरस संक्रमण को लेकर सही जानकारी जरुरी: 

विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाली संस्था सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने ऐसी बिना किसी प्रमाणिकता वाली बातों को खतरनाक बताया है और कहा है सोशल डिस्टेंसिंग व रोकथाम के नियम कायदों का पालन नहीं किया गया तो इसके खतरनाक परिणाम सामने आ सकते हैं. किसी भी अधिकृत स्रोत ने इस बात की भी पुष्टि नहीं की है कि कोरोनावायरस संक्रमण का संबंध अमीर-गरीब या किसी विशेष क्षेत्र से है. सभी अधिकृत स्रोतों ने यह जानकारी अवश्य दी है कि कोरोनावायरस का संक्रमण किसी भी संक्रमित के नजदीकी संपर्क में आने से ही फैलता है. चाहे वह किसी भी उम्र, लिंग, जाति, समुदाय व क्षेत्र विशेष का हो. 

 

 

कोरोनावायरस संक्रमण से जुड़ी भ्रांतियों से बचें: 

संक्रमण के इस काल में जब इस रोग को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैल रही हैं, सही जानकारी ही इसका बचाव है. ऐसी अफवाहों के फैलने से ना सिर्फ एक ही व्यक्ति बल्कि एक बड़ी आबादी खतरे में आ सकती है. ऐसे अफवाहों को रोकने की पुरजोर कोशिश समाज के हर स्तर पर होनी चाहिए. विशेष तौर पर ग्रामीणों को सही सूचनाओं को पाने में सजगता बरतनी चाहिए. इसके लिए राज्य स्तर पर टोल फ्री नम्बर 104 जारी किया गया है, जिसपर कॉल कर कोरोना के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी ली जा सकती है. 

 

उम्र, जाति, समुदाय व लिंग से नहीं है संक्रमण का संबंध:

बिहार में भी 6 अप्रैल तक कोरोनावायरस संक्रमण के 32 मामले देखने को मिले हैं. इनमें पटना, मुंगेर, गोपालगंज, सीवान, गया, सारण, लखीसराय, भागलपुर एवं  नालंदा में कोरोना संक्रमण के मामले सामने आये हैं. इन सभी मामलों के विश्लेषण से यह साफ हो जाता है कि कोरोनावायरस से संक्रमित ये लोग 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के हैं. साथ ही सभी एक सामान्य आयवर्ग वाले परिवार से संबंध रखते हैं. सभी मामले को गौर से देखने पर यह स्पष्ट होता है कि कोरोना संक्रमण अमीर से लेकर गरीब वर्ग के सभी लोगों को हो सकता है. इसलिए सभी लोगों को समान रूप से सतर्क होने की जरूरत है. यद्यपि, सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बुजुर्गों को आम लोगों की तुलना में कोरोनावायरस संक्रमण से अधिक खतरा हो सकता है. लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि बाकी आयु वर्ग के लोग इस संक्रमण से सुरक्षित हैं. 

 

प्रमाणिक सूचनाओं वाले माध्यमों को ही चुनें:  

प्रमाणिकता वाली सूचना देने वाले अधिकृत माध्यमों को चुने जाने के लिए भी केंद्र व राज्य सरकार की ओर से अपील की गयी है. इनमें विश्व स्वास्थ्य संगठन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन आदि शामिल हैं. सही सूचनाएं पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से कोरोनावायरस संक्रमण को लेकर जानकारी देने व जागरूकता लाने का काम किया गया है

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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