क्या है वेलेंटाइन डे के पीछे का राज!


क्या है वेलेंटाइन डे के पीछे का राज!

 

 

 14 फरवरी, प्यार का पर्व
प्रेम एक दर्शन है। दिल पर नहीं किसी का करार। वो तो बस मिटना जानता है। अगर प्यार में पागलपन ना हो तो वो प्यार नहीं है।   । दुनिया कुछ भी कहे, हालात कितना भी दबाए, पर दिल का जज्बात किसी न किसी रूप में हमेशा जिंदा रहता है अपने ही भीतर। 

असल में प्यार का पर्व एक सप्ताह पहले यानि 7 फरवरी से ही शुरू हो जाता है।
 
रोज डे: फरवरी महीने के सात तारीख से शुरू हो रहे इस वीक का पहला दिन रोज डे के नाम से जाना जाता है। यूं कहें तो इसकी शुरुआत गुलाब की खुशबू और खूबसूरती के साथ होती है। इस दिन प्रेमी जोड़े एक-दूसरे को गुलाब देकर अपने प्यार का इजहार करते हैं।  इस बात को जरूर ध्यान में रखें कि प्यार का इजहार केवल लाल गुलाब से ही किया जाता है।

प्रपोज़ डे: दूसरे दिन यानी 8 फरवरी को प्रपोज डे मनाया जाता है। अगर आपको किसी से बेइंतहा मोहब्बत है और उसे इस बात को बताना चाहते हैं, तो बिना देर किए इस दिन मौके पर चौका मारते हुए उन्हें प्रपोज कर ही डालिए।

चॉकलेट डे: पिछले 200 सालों से चॉकलेट लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बना हुआ है। स्ट्रेस दूर करना हो या फिर किसी से प्यार का इजहार करना हो, अलग-अलग बहानों से चॉकलेट को इस्तेमाल में लाया जाता है। प्यार के इस सप्ताह के तीसरे दिन यानी 9 फरवरी को चॉकलेट डे मनाया जाता है। इस दिन प्रेमी जोड़े एक-दूसरे को चॉकलेट खिलाते हैं ताकि जिंदगी में चॉकलेट की तरह ही मिठास बनी रहे।

टेडी बियर डे: टेडी बियर की तरह दिल भी बेहद कमजोर और नाजुक होता है। दिल की कोमलता का एहसास दिलाने के लिए चौथे दिन यानी 10 फरवरी को प्रेमी-प्रेमिका  एक-दूसरे को टेडी बियर गिफ्ट करते हैं। हालांकि,ऐसा माना जाता है कि लड़कियों को यह स्टफ्ड खिलौना ज्यादा पसंद होता है। टेडी को गले से लगाकर सोना, उससे बातें करना लड़कियों को खूब भाता है।

प्रॉमिस डे: प्यार करना जितना आसान है उससे कहीं ज्यादा  कठिन है इसे बरकरार रखना है। फरवरी में चलने वाले इस सप्ताह के पांचवें दिन यानी 11 फरवरी को प्रॉमिस डे मनाया जाता है। इस दिन प्रेमी जोड़े एक-दूसरे से जिंदगी भर के लिए कोई खास वादा करते हैं।

हग डे: छठे दिन यानी 12 फरवरी को 'हग डे' मनाते हैं। यह एक दूसरे को गले से लगाकर प्यार जताने का दिन है। इस दिन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक जादू की झप्पी के बहाने हमें यह जानने का मौका मिल जाता है कि सामने वाला हमें कितना चाहता है, उसके दिल में हमारे लिए क्या है।

किस डे: प्यार का इजहार बिना शब्दों के करना हो तो इसके लिए एक प्यार भरा चुंबन ही बहुत काफी होता है। इस इम्तिहान में सांतवें दिन यानी 13 फरवरी को हर प्रेमी जोड़े एक-दूसरे को किस कर अपने प्यार का इजहार करते हैं।

वेलेंटाइन डे: भागदौड़ भरी जिंदगी में पार्टी करने का बहाना मिल जाए, इससे बड़ी बात और क्या होगी। ठीक उसी तरह, भले हम प्यार रोज जताते हों, लेकिन उसका जश्न एक दिन तो मनाना बनता ही है। इसी प्यार का जश्न सप्ताह के अंतिम दिन यानि 14 फरवरी को  वैलेंटाइन डे के रूप में मनाते है।

वेलेंटाइन डे की कुछ खास बातें
14 फरवरी। वैलेंटाइट-डे। एक ग्लोबल फेस्टिवल। प्यार का पर्व। संत वैलेंटाइन के नाम पर मनाया जाने वाला यह उत्सव आज दुनिया के हर हिस्से में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुका है। माना जाता है कि संत वैलेटाइन ने अपनी मृत्यु के समय जेल की नेत्रहीन बेटी जैकोबस को अपनी आंखें दान कर दी थीं। साथ ही जैकोबस को लिखे अपने पत्र के अंत में उन्होंने लिखा था- तुम्हारा वैलेंटाइन। तभी से 14 फरवरी का दिन पूरे विश्व में निःस्वार्थ प्रेम का संदेश फैलाने के लिए एक त्योहार के तौर पर मनाया जा रहा है। कभी मुख्यतः पश्चिमी देशों का रहा यह त्योहार अब भारत और दक्षिण एशियाई देशों में भी एक बड़ा इवेंट बन गया है।

 

मानवता के प्रति प्रेम दिखाने का क्रेज लोगों के सिर पर चढ़ कर बोलता है। यह अलग बात है कि संपूर्ण मानवता के प्रति प्रेम इसमें नगण्य है और यह महज प्रेमी प्रेमिकाओं की प्यार की अभिव्यक्ति का दिवस बना हुआ है। ज्यादा से ज्यादा अपने और कुछ जानने पहचानने वालों को वैलेंटाइन विश की रस्म अदायगी भी हो जाती है। अखबारों के पन्ने भी इन दिनों कुछ ऐसी ही सामग्रियों से भरे पड़े हैं कि कैसे अपने प्यार का इजहार करें, जिनसे प्यार करते हैं, बस कह डाले आई लव यू, कहां मनाए अपना वैलेंटाइन, गुलाब दें, प्रपोज करें आदि-आदि। क्या इनसे कहीं भी मानवता के प्रति प्रेम या समाज में प्रेम को बढ़ावा देने का भाव नजर आता है।

 

चलिए मान भी लिया जाए कि यह समाज में प्रेम को बढ़ाने का संदेश देने वाला दिन है, जिसका इसके पैरोकार अक्सर दावा किया करते हैं, तो भी क्या वे ऐसा दावा करने की हालत में हैं कि 14 फरवरी के दिन उन्होंने कभी कोई ऐसा काम किया या करने जा रहे हैं, जिससे उनका मानवता के प्रति प्रेम जाहिर होता है। क्या महज अपने घर वालों को वैलेंटाइन की शुभकामनाएं दे देने व अपने जान पहचान के कुछ लोगों के साथ खाना-पिना, मौज मस्ती कर लेने से इस दिवस की प्रासंगिकता साबित हो जाती है। दुर्भाग्यवंश इस वैलेंटाइट के नाम पर यही हो रहा है। वैसे प्यार की भावनाएं दर्शाने के लिए किसी एक खास दिन की ही जरूरत क्यों है।

 

प्यार तो ऐसी चीज है, जो हर पल दिल के कोने में विद्यमान होना चाहिए। क्या मदर टेरेसा केवल किसी एक खास दिन मानवता की सेवा का अपना प्रण पूरा करती थीं। क्या बाबा आम्टे को कुष्ठ रोगियों की याद साल में एक बार आती थी। स्वामी कल्याणदेव क्या एक दिन की सेवा से मानवता की सेवा के प्रतीक बने। ऐसे न जाने कितने नाम हैं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानवता और समाज को प्रेम की एक डोर में बांधने में व्यतीत कर दिया। क्या वैलेंटाइन के नाम पर समाज प्रेम की पैरोकारी करने वाले लोगों को इनमें से किसी का जन्मदिन या पुण्यतिथि भी याद है। फिर काहे का मानवता प्रेम। और वह भी पश्चिम के एक चरित्र के नाम पर इतना बड़ा जलसा, जिसमें बाजार इस कदर हावी हो चुका है कि प्रेम शब्द के सारे मायने ही बदल गए हैं।

 

 प्रेम करना और प्रेम का इजहार करना निस्संदेह बुरी बात नहीं। वह चाहे प्रेमी प्रेमिकाओं के बीच का प्रेम हो, नाते-रिश्तेदारों के प्रति प्रेम हो या फिर आस पड़ोस और समाज के दूसरे लोगों के लिए। लेकिन क्या वैलेंटान डे के नाम पर हम वाकई प्रेम का प्रकाश फैला रहे हैं। प्रेमी प्रेमिकाओं के प्रेम का आदर्श वैलेंटाइन कैसे होने लगे। वह आदर्श तो लैला-मजनूं,  सोहनी-महिवाल या शीरी-फरहाद होना चाहिए था। और संत वैलेंटाइन को जिस प्रेम के लिए याद किया जा रहा है, उस प्रेम को मदर टेरेसा, बाबा आम्टे, स्वामी कल्याणदेव में भी तो देखा जा सकता है। निश्चित आज दुनिया को प्रेम की जरूरत है लेकिन क्या पश्चिम के तय दिवसों को ही हम प्रेम का प्रकाश फैलाने का दिन मानें।

 

भारतीय सभ्यता में वैसे भी मानवता के प्रति प्रेम को जीवन का एक अंग माना गया है। वह दैनंदिन की चीज है, कोई एक दिन का अभ्यास नहीं। हां, अगर कोई त्योहार हमें आपसी प्रेम का संदेश देता है तो उसे मनाने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन कम से कम उसकी प्रासंगिकता तो धरातल पर उतारी जाए, उसके उद्देश्यों को तो जीवंत रखा जाए। वैलेंटाइन को याद कर हम जिस तरह का त्योहार मना रहे हैं, उसमें वह उद्देश्य है कहां। बाजार भी जिस तरह इस दिन का हौवा खड़ा कर अपना उल्लू सीधा कर रहा है वह कतई प्रेम का वैलेंटाइन मॉडल नहीं है। वह महज संत वैलेंटाइन के नाम पर बाजार का खड़ा किया प्यार का एक नया मॉडल है। कोशिश हो कि 14 फरवरी को समाज में प्रेम को बढ़ावा देने का प्रयत्न हों, जहां मानवता धरातल पर उतरे। ऐसे हम भी यही कहेंगे कि प्यार एक मीठा सा जज्बात नहीं, एक फलसफा भी है। हजारों अफसानों में अलग-अलग रूप में झलकता है। प्रेम का यह दर्शन है। दिल पर नहीं किसी करार। वो तो बस मिटना जानता है। निहाल हो जाता है। दुनिया कुछ भी कहे, हालात कितना भी दबाए, पर दिल का जज्बात किसी न किसी रूप में हमेशा जिंदा रहता है अपने ही भीतर। प्यार में लिपटे बंद बेमिसाल अफसाने आपको दिख ही जाएंगें।

                              वेलेंटाइन डे विशेष-राज कमल

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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