कोरोना ने आभास कराया कि मानव ने पर्यावरण को किस हद तक हानि पहुंचाई- वेंकैया नायडू


कोरोना ने आभास कराया कि मानव ने पर्यावरण को किस हद तक हानि पहुंचाई- वेंकैया नायडू

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बुधवार को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर देशवासियों से पृथ्वी पर पर्यावरण के सजग प्रहरी बनने का आह्वान करते हुए कहा है कि कोरोना के वैश्विक संकट ने विकास की अवधारणाओं पर सवाल खड़ किये हैं और यह अहसास कराया है कि मानव ने किस हद तक पर्यावरण संतुलन को हानि पहुंचाई है। 

 

नायडू ने प्रकृति के साथ संतुलन कायम करने के बारे में सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करते हुये कहा, ‘‘हम विश्व पृथ्वी दिवस की 50 वीं सालगिरह ऐसे समय मना रहे हैं जबकि सारा विश्व कोविड-19 महामारी के कारण अभूतपूर्व स्वास्थ्य आपदा से ग्रस्त है।’’ 

 

फेसबुक पर अपने लेख में कोरोना संकट के बीच वैश्विक पर्यावरण के विषय में कुछ चौंकाने वाले तथ्य उजागर होने की बात कहते हुये नायडू ने कहा विश्व भर में कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन में विश्व थम सा गया है। उन्होंने कहा, ‘‘इस दौरान विभिन्न प्रकार के प्रदूषण के स्तर में कमी आई है और वायु स्वच्छ हुई है। इसने हमको आभास दिलाया है कि मानव ने किस हद तक पर्यावरणीय संतुलन को हानि पहुंचाई है।

 

उपराष्ट्रपति ने ट्वीटर पर भी कहा, ‘‘कोविड-19 के विरुद्ध मनुष्य के अभियान ने हमारी विकास की अवधारणा पर गहरे सवाल उठाए हैं, जिनका निराकरण करना मानव के अस्तित्व मात्र के लिए अपरिहार्य है। हमें सोचना होगा कि आधुनिकीकरण की अंधी दौड़ में मानव ने प्रकृति को कितनी हानि पहुंचाई है।

 

नायडू ने आह्वान किया आज विश्व पृथ्वी दिवस पर पृथ्वी के पर्यावरण के संतुलन को बहाल करने और उसके विविधतापूर्ण परिवेश का संरक्षण करने का संकल्प लें। यह समझें कि मनुष्य इस पृथ्वी को अन्य जीव, जंतुओं और वनस्पति से साथ साझा करता है, उनका भी इस पृथ्वी पर उतना ही अधिकार है जितना मनुष्य का है।

 

नायडू ने कहा कि पृथ्वी दिवस के अवसर पर एकात्म मानववाद के प्रणोता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के उस मंत्र का स्मरण करें कि प्रकृति सम्मत विकास ही संस्कृति है, प्रकृति को नष्ट करके किया गया विकास विकृति उत्पन्न करेगा। अपने सनातन संस्कारों, अपने शांति मंत्रों से सीखें, उनसे मार्गदर्शन लें।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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