पंडित रामप्रसाद बिस्मिल जी के स्मृतियों से संबंधित


पंडित रामप्रसाद बिस्मिल जी के स्मृतियों से संबंधित

-न्यायालय के आदेश के विरुद्ध मान्यता प्राप्त पत्रकार एवं समाज सेवी  श्यामनन्द जी को ज़ोर जबरदस्ती से निकालने के बाद भवन को तोड़कर गिरा दिया।

स्वराज इंडिया सरकार कि इस कार्यवाही की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है की बिस्मिल भवन का पुनः जीर्णोद्धार कर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी स्मृतियों को बचाया जाए।


नईदिल्ली-


गोरखपुर में स्थित "बिस्मिल भवन" का एक ऐतिहासिक महत्त्व रहा है। 1922 के चौरी-चौरा काण्ड के बाद गोरखपुर में सिविल लाईंस का एरिया कण्टोमेण्ट घोषित कर दिया गया था। जिसके बाद यह अति सुरक्षित क्षेत्र हो गया था। ब्रिटिश तकनीक से निर्मित बिस्मिल भवन उस जमाने की मजबूत बिल्डिंग में से एक था। 1966 में इस भवन का मालिकाना हक नाहिद अली का था, जिन्होंने श्यामानन्द जी को इस भवन में रहने व भवन में बिस्मिल अखबार का प्रकाशन करने की अनुमति दी थी। इस बीच उक्त मकान मान्यता प्राप्त पत्रकार श्यामानन्द को एलाट हो गया। एलाटमेण्ट पर जिला प्रशासन को आपत्ति हुई, जिसके बाद वह जोर- जबरदस्ती पर भी उतर आया।
सन 1970 में जिला न्यायालय ने इस भवन पर सुनवाई हुई जिसमें और मजिस्ट्रेट ने प्रशासन को आदेशित करते हुए श्यामानन्द जी को इस बिल्डिंग से कानूनी प्रक्रिया के जरिये ही निकाले जाने का आदेश देते हुए कोई जोर-जबरदस्ती न करने की हिदायत दी। अपने प्रवास के समय श्यामानन्द जी ने इस घर का नाम 'बिस्मिल भवन' रखा। तबसे पत्राचार में बिस्मिल भवन लिखा जाने लगा। बिस्मिल जी से जुड़े तमाम स्मृति चिन्ह शास्त्री जी ने बिस्मिल भवन को सुरक्षित मान कर संरक्षित रखा करते थे।

83 वर्षीय बिस्मिल उपासक श्यामानन्द से खीझकर प्रशासन ने भवन जर्जर बताकर ढहा दिया। बिस्मिल अस्थिभस्म, अनेक क्रांतिकारियों के पत्र, बिस्मिल जी से जुड़ी मेज और बहुत सारी जानकारियों से भरी कागजों की आलमारी प्रशासन ने बेतरतीब फेंक दी या गायब कर दी। 10 हजार दुर्लभ किताबें संरक्षित कर लगभग 80 बच्चों को प्रति वर्ष निःशुल्क अध्ययन सुविधा उपलब्ध करानेवाले श्यामानन्द जी आज अपने जरावस्था को प्राप्त हो चुके भवन के साथ प्रशासन से लड़ रहे है।

स्वराज इंडिया ये मांग करता है कि इस बिस्मिल भवन जैसी ऐतिहासिक इमारतें जो स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को समेटे हुए है, सरकार की ये जिम्मेदारी बनती है कि ऐसी इमारतों की पहचान कर पुनः स्थापित करें ताकि आने वाली पीढ़ियों के मन में, स्वतंत्रता संग्राम से जुडी हुई स्मृतियां और आदर्शों का मापदंड बना रहे।
दुनिया के सभी सभ्य देशों में कितने सारे उदहारण है जहां सरकारों ने अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ी इमारतों, विरासतों और चिह्न का पुनः निर्माण किया है और उन्हें बचाया है।
स्वराज इंडिया सरकार कि इस कार्यवाही की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है की बिस्मिल भवन का जीर्णोद्धारकर और खोई वस्तुओं को ला उसे पुनः विकसित करे।

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इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल


इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल

आज सुबह से सोशल मीडिया पर एक खबर को काफी तेजी से वायरल किया जा रहा है. दरअसल, कर्नाटक में BS येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली BJP सरकार के मंत्रियों ने बीते मंगलवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली. इस दौरान जब BJP नेता और विधायक मधु स्वामी पद और गोपनीयता की शपथ ले रहे थे, तभी उन्होंने गलती से बतौर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. 

 

 

बता दें कि, मधु स्वामी जब शपथ ले रहे थे तो उन्हें मंत्री बोलना था, लेकिन जुबान फिसलने के चलते वह मुख्यमंत्री बोल पड़े. अब इस खबर को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है. खास बात ये है कि इस दौरान CM येदियुरप्पा भी मौके पर मौजूद थे और मधु स्वामी की इस गलती पर मुस्कुरा दिए. इतना ही नहीं येदियुरप्पा ने मधु स्वामी को बाद में गले भी लगाया.

 

गौरतलब है कि, बीते मंगलवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल वजुभाई वाला ने 17 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलायी. जिन विधायकों को मंत्री पद से नवाजा गया है, उनमें बी. श्रीरमुलु, सीटी रवि, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केएस ईश्वरप्पा और पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार का नाम शामिल है. बता दें कि, येदियुरप्पा के 26 जुलाई को CM बनने के बाद उनके मंत्रिमंडल का यह पहला विस्तार है. उन्होंने 29 जुलाई को विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित किया था. 

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22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों


22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों

उतर-प्रदेश के बांदा जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, कई लोग इसे देखकर खुदा का करिश्मा मान रहें हैं तो वहीं कई लोग नेक इंसाल का दर्जा दे रहें हैं. बताया जा रहा है कि, यहां 22 वर्ष पहले कब्र मे दफनाए गए एक शख्स का जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला है.

 

ये मामला तब सामने आया जब मूसलाधार बारिश के चलते कब्रिस्तान में मिट्टी कटने से एक कब्र धंस गई और उसमें  22 वर्ष पहले दफन एक शख्स का कफन में लिपटा जनाजा़ दिखने लगा. यहां देखते ही देखते मौके पर काफी लोगों पहुंच गए. जब कफन में लिपटी लाश को निकाला गया तो वहां मौजूद सैकड़ों लोग देखकर दंग रह गए. क्योंकि 22 सालों बाद भी लाश ज्यों कि त्यों निकली.

 

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दरअसल, ये मामला उतर-प्रदेश के जिले बांदा के बबेरू कस्बे के अतर्रा रोड स्थित घसिला तालाब के कब्रिस्तान की है. यहां मूसलाधार बारिश से कई कब्रों की मिट्टी बह गई और एक कब्र में दफन जनाजा़ बाहर दिखने लगा. इसके बाद लोगों ने कब्रिस्तान कमेटी को इसकी जानकारी दी. कब्रिस्तान कमेटी के सदस्‍यों द्वारा जब कब्र की धंसी हुई मिट्टी को हटाकर देखा गया, तो उसमें दफनाया गया जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला.

 

गौरतलब है कि, इस कब्र में 22 वर्ष पहले 55 वर्षीय पेशे से नाई नसीर अहमद नाम के शख्स को दफनाया गया था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नसीर अहमद पुत्र अलाउद्दीन निवासी कोर्रही, थाना बिसंडा बबेरू में नाई की दुकान थी. उन्‍हें लगभग 22 वर्ष पहले दफन किया गया था. जबकी दूसरी तरफ मृतक नसीर के एक रिश्तेदार बताते हैं कि उनका कोई बेटा नहीं था. 

 

22 वर्ष पहले उनका निधन हुआ था, जिसके बाद उनलोगों ने ही उनके शव को दफनाया था. लेकिन, आज उनका जनाजा मिटटी धंसने की वजह से बाहर निकल आया. न शव ख़राब हुई थी और न ही कफ़न पर कोई दाग लगा था. हालंकी, बाद में स्थानीय मौलानाओं की मौजूदगी में शव को कल देर रात उसे दूसरी कब्र में दोबारा से दफन किया गया.

 

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