भारत आने वाले 7वें अमेरिकी राष्ट्रपति बने ट्रम्प, जानिए कब और कौन अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आए


भारत आने वाले 7वें अमेरिकी राष्ट्रपति बने ट्रम्प, जानिए कब और कौन अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आए

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पत्नी, बेटी और दामाद के साथ दो दिवसीय भारत यात्रा पर आज यानी सोमवार को अहमदाबाद पहुंच चुकें हैं। अहमदाबाद में रोड शो और नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति आगरा और फिर दिल्ली का भी दौरा करेंगे। वही, मेलानीया ट्रम्प दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में हैपीनेस क्लास में जाएँगी। आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप भारत आने वाले सातवें अमेरिकी राष्ट्रपति होंगे।

 

इससे पहले भारत के आजादी के बाद के 73 सालों में छह अमेरिकी राष्ट्रपति भारत का दौरा कर चुके हैं। हालाँकि, क्लिंटन की यात्रा से पहले सभी राष्ट्रपतियों ने भारत से ज्यादा पाकिस्तान को महत्व दिया था।आज हम आपको बताएंगे कब और कौन अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आये थे। 

 

डी आइजनहावर, दिसंबर 1959
डी आइजनहावर आजादी के बाद भारत के दौरे पर आने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे। वह दिसंबर 1959 में भारत के चार दिवसीय दौरे पर दिल्ली आए थे। इस दौरान आइजनहावर ने भारत की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किए तथा साथ ही ताजमहल देखने आगरा भी गए थे। उन्होंने इस दौरान दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल रैली को भी संबोधित किया था।

 

 

रिचर्ड निक्सन, जुलाई 1969
रिचर्ड निक्सन भारत आने वाले दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति  थे। रिचर्ड निक्सन 31 जुलाई 1969 को भारत दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने केवल 22 घंटे भारत में बिताए फिर वह पाकिस्तान चले गए। आपको बता दे कि, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से उनके संबंध अच्छे नहीं थे। निक्सन की यात्रा का उद्देश्य इंदिरा गांधी के साथ तनाव और अविश्वास कम करना था।

 

तब अमेरिका के पाकिस्तान प्रेम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1971 के भारत पाक युद्ध के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने खुलकर भारत को धमकी दी थी। इतना ही नहीं, अमेरिका ने पाकिस्तान की सहायता के लिए प्रशांत महासागर में तैनात अपना सातवां बेड़ा भी भेजा था। लेकिन, रूस द्वारा भारत का समर्थन करने के बाद वह पीछे हट गया।

 

जिमी कार्टर, जनवरी 1978
जिमी कार्टर भारत के दौरे पर आने वाले अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति थे। उन्होंने एक से तीन जनवरी 1978 को तीन दिन की भारत यात्रा की थी। यह यात्रा तब हुई थी जब भारत में आपातकाल के बाद पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी और इंदिरा गांधी की करारी हार हुई थी। कार्टर की इस यात्रा ने भारत और अमेरिका के बीच परमाणु परीक्षण के बाद तल्ख हुए रिश्तों को नरम किया था।

 

 

बिल क्लिंटन, मार्च 2000
बिल क्लिंटन भारत आने वाले चौथे अमेरिकी राष्ट्रपति  थे।अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत यात्रा ने 50 साल के पाक-अमेरिका समीकरण को पलट दिया था। उन्होंने इस दौरान पांच दिन भारत में बिताए जबकि पांच घंटे पाकिस्तान में। क्लिंटन की यात्रा के समय भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। क्लिंटन तब आगरा, हैदराबाद, मुंबई, जयपुर और दिल्ली गए थे।

 

जॉर्ज डब्ल्यू बुश, मार्च 2006
जॉर्ज डब्ल्यू बुश भारत आने वाले पाँचवे अमेरिकी राष्ट्रपति  थे।मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान एक से तीन मार्च 2006 को जार्ज बुश अपनी पत्नी लारा बुश के साथ भारत दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने 60 घंटे भारत में बिताए। बुश के इसी दौरे में भारत ने परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किया था।

 

बराक ओबामा, 2010 और 2015
बराक ओबामा भारत आने वाले छठे अमेरिकी राष्ट्रपति  थे।सबसे ख़ास बात तो यह है कि बराक ओबामा अपने दोनों कार्यकाल में भारत पहुंचे। उन्होंने भारत की संसद को संबोधित भी किया और 26/11 के मुंबई हमले के पीड़ितों से भी मिले थे। इसी दौरे में ओबामा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का भी समर्थन किया था।

 

आपको बता दे कि, मई 2014 में बराक ओबामा गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनकर दूसरी बार भारत पहुंचे थे। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट पर ओबामा का स्वागत किया था। 

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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