जानें ‘फ्लाईऑवर मैन’ की जीवनी, कैसे बने गरीब से अमीर


जानें ‘फ्लाईऑवर मैन’ की जीवनी, कैसे बने गरीब से अमीर

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी राजनीति मैदान के मंझे हुए नेता हैं। इनकी सत्यवादी छवि से पूरी दुनिया अवगत है। इन्होंने अपने कार्यकाल में भारतीय सड़क एवं परिवहन की रुपरेखा बदल दी है। अपने पिछले कार्यकाल में गडकरी ने सैकड़ों  सड़कों, एक्सप्रेसवे और फ्लाईऑवर का निर्माण करवाया। इस कारण लोग इन्हें ‘फ्लाईऑवर मैन’ के नाम से पुकारने लगे हैं। ऐसे में आज हम आपको ‘फ्लाईऑवर मैन’ की जीवनी बताने रहे हैं।

 

नितिन गडकरी का जन्म 27 मई, 1957 को महाराष्ट्र के नागपुर में एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनका पूरा नाम नितिन जयराम गडकरी है। इनके पिता का नाम जय राम गडकरी और माता का नाम भानुताई गडकरी है। इनका बचपन बेहद संघर्ष से गुजरा है क्योंकि इनके माता-पिता बेहद गरीब थे। इन्होने अपनी शिक्षा और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कठिन परिश्रम किया। 

 

गडकरी ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा नागपुर से ही हासिल की। जबकि उच्च उच्चतम शिक्षा जीएस कॉमर्स कॉलेज, नागपुर यूनिवर्सिटी एवं यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ लॉ, मेन ब्रांच, नागपुर से की। इसके साथ ही इन्होंने बिज़नेस मैनेजमेंट में डिप्लोमा भी किया है। 

 

 

 

राजनितिक करियर

नितिन गडकरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बचपन से ही कर दी थी। जब वे स्टूडेंट थे उसी समय सन 1976 में उन्होंने छात्र संघ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता युवा मोर्चा के लिए ढेर सारा काम किया। पेशे से वकील गडकरी ने अपने जीवन में वकालती को छोड़कर राजनीति को अपनाया। इस बारे में गडकरी का कहना है कि वे राजनीति को समाज सेवा के रूप में लेते हैं। इस बात की पुष्टि उनके द्वारा की गयी दलितों और गरीबों के लिए किये गए सराहनीय कार्य से होती है।

 

राजनीतिक पद

जब गडकरी केवल 24 साल के थे। उस समय उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रेजिडेंट बनाया गया था। फिर वे नागपुर में भारतीय जनता युवा मोर्चा के सचिव पद पर नियुक्त किये गए। इन्होंने इस समय संगठन को मजबूत करने के लिए कई साहसिक कार्य किये। इसके बाद 1989 में गडकरी महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य बने।

 

 

इसी समय उन्हें अपनी क़ाबलियत को साबित करने का मौका मिला और इस कार्य को गडकरी ने बखूबी निभाया। इसके बाद उन्हें बड़ी जिम्मेवारी दी गयी जब 1995 से 1999 तक वे महाराष्ट्र सरकार में पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर बने। इसके बाद गडकरी लगातार 1996, 2002, 2006 एवं 2008 में 4 बार विधान परिषद् पर जीत हासिल हुई। उनकी इस सफलता को देखते हुए बीजेपी की हाई कमान ने उन्हें 2004 में बीजेपी का राज्य स्तरीय प्रेजिडेंट चुना।

 

वहीं उनकी क़ाबलियत का लोहा 2009 में मनवाया। जब उन्होंने राजनाथ सिंह को पीछे छोड़ते हुए बीजेपी प्रेजिडेंट चुने गए। 2013 में इन्होने पद से इस्तीफा दे दिया और पूरा ध्यान 2014 लोक सभा पर दी और गडकरी नागपुर से सांसद चुने गए। इसके बाद उन्हें मोदी सरकार में सड़क एवं परिवहन मंत्री का पद दिया गया। पहले कार्यकाल में उनकी कार्य सफलता के लिए उन्हें दोबारा सड़क एवं परिवहन मंत्रालय दिया गया है।

 

nitin gadkari, nitin gadkari speech, nitin gadkari on caa, nitin gadkari news, nitin gadkari rally, nitin gadkari on nrc, nitin gadkari interview, nitin gadkari (politician), nitin gadkari latest news, nitin gadkari latest speech, नितिन गडकरी, केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री, नितिन गडकरी भाषण, nitin gadkari career, Union Road and Transport Minister

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

वायरल न्यूज़

×