आज नोट बंदी को हुए 3 साल पूरे,फिर भी जनता पर अभी तक है असर


आज नोट बंदी को हुए 3 साल पूरे,फिर भी जनता पर अभी तक है असर

8 नवंबर 2016 को डिमोनेटाइजेशन की घोषणा की गई थी, जिसमें 86 प्रतिशत मुद्रा प्रचलन से बंद कर दी गई थी. ये 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोट थे जो बाजार से वापस आरबीआई में लिए गए. तीन साल पहले आज ही के दिन एक टेलिविजन संबोधन में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह निर्णय आतंकवाद के वित्तपोषण, भ्रष्टाचार और काले धन की जमाखोरी का मुकाबला करने के लिए लिया गया था. एक ऑनलाइन सर्वेक्षण में उत्तरदाताओं के 66 प्रतिशत ने कहा है कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था और श्रम रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. केवल 28 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि डिमनेटाइजेशन का स्थानीय नागरिक मंच, लोकल सर्किल्स द्वारा किए गए सर्वेक्षण में कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है.

 

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सर्वेक्षण में भाग लेने वालों में से लगभग 33 प्रतिशत ने आर्थिक मंदी के लिए नोटबंदी को दोषी ठहराया जो सरकार के लिए कठिन है. जब नोटबंदी की घोषणा की गई तो भारतीय अर्थव्यवस्था ऊंची उड़ान भर रही थी. कुछ समय बाद अर्थव्यवस्था डाउनहिल पर थी. यह 2017-18 में संक्षिप्त रूप से उठी लेकिन फिर से फिसल गई. जीडीपी की वृद्धि दर पिछले पांच तिमाहियों से घट रही है. हालांकि, आर्थिक मंदी के लिए जिम्मेदार केवल एक कारक नहीं है. अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले लोगों ने माना कि असंगठित क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, जिससे नौकरियों की हानि हो रही है और सर्पिल प्रभाव शुरू हो रहा है, जिसमें खपत कम होने के कारण खपत में कमी आई है, खासकर गांवों में.

 

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नवीनतम सर्वेक्षण में, लगभग एक तिहाई उत्तरदाताओं ने इस दृष्टिकोण के साथ सहमति व्यक्त की कि 32 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए कमाई के नुकसान का प्रमुख कारण है. नोटबंदी के सकारात्मक प्रभावों पर मतदान करने वालों में, 42 प्रतिशत ने कहा कि इस कदम ने एक विस्तारित कर का जाल लाया जिसमें बड़ी संख्या में चोरों को अपने दायरे में लाया गया. सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि नोटबंदी की घोषणा के बाद नकदी के उपयोग – व्यवसायों और व्यक्तिगत लेनदेन में जल्द ही गिरावट आई है – पिछले दो वर्षों में वृद्धि हुई है.

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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