वैश्विक कृषि में भारत का नया भविष्य गढ़ने का वक्त


वैश्विक कृषि में भारत का नया भविष्य गढ़ने का वक्त

-अंबुज शर्मा मामले को विशेष रूप से देखेंगे

-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री औऱ केंद्रीय कृषिमंत्री को आईफा ने 25 सूत्री मार्गदर्शी सुझाव पत्र सौंपा था।

-आईफा के 52 अनुशांगिक किसान संगठन, एसपीओ सहित कई संगठनों ने दिये सुझाव दिए

-कृषि क्षेत्र के जीर्णोद्धार के लिए आईफा के विशेषज्ञ कर रहे हैं काम

-कृषि क्षेत्र के प्रत्येक हितधारकों को योगदान देने का आईफा ने किया है आह्वान

 

नईदिल्ली:

अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) ने वर्तमान वैश्विक महामारी की वजह से उत्पन्न लॉकडाउन से हो रहे कृषि क्षेत्र के नुकसान और किसानों को बदहाल स्थिति से उबारने के लिए " 25 सूत्री मार्गदर्शी सुझाव पत्र "   राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री औऱ केंद्रीय कृषि मंत्री को सौंपा है। जिसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने आईफा की मांग को मानते हुए अंबुज शर्मा को इसकी कमान भी सौंपी है।

 

आईफा ने देश भर में सक्रिय अपने 52 अनुशांगिक किसान संगठनों, किसान उत्पाद संगठनों (एपीओ), कृषि उत्पाद विपणन समूहों तथा कृषि से संबंद्ध संगठनों से कृषि व कृषकों की जमीनी दिक्कतों और कृषि की बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव मांगे थे। आईफा के आह्वान पर देशभर से भारी संख्या में न केवल किसान संगठन बल्कि किसानों ने अपने सुझाव भेजे हैं।

 

यह पहला अवसर है जब निजी स्तर पर किसी संगठन द्वारा इतने बड़े पैमाने पर सभी हितधारकों से सुझाव ले कर कृषि क्षेत्र के जीर्णोद्धार के लिए एक सामग्रिक सुझाव पत्र तैयार किया है, जो देश की कृषि और कृषकों की स्थिति में गुणात्मक परिवर्तन ला सकता है। आईफा के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजाराम त्रिपाठी ने बताया कि अब वक्त आ गया है कि कृषि क्षेत्र के सभी हितधारक वर्तमान समस्या के समाधान के लिए अलग-अलग राग अलापने के बजाय इसके लिए ठोस नीतिगत फैसले लें और सरकार के साथ सकारात्मक सामांजस्य स्थापित कर एक स्थायी पहल करें।

 

उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय किसान महासंघ ने सरकार से कोई मांग नहीं की है। आईफा का मानना है कि वर्तमान परिस्थिति में मांग से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। समाधान के लिए कृषि क्षेत्र के प्रत्येक हितधारकों को एक दूसरे के साथ सलाह-सुझाव पर सकारात्मक नजरिये से विचार करना होगा और सामुहिक रूप से समाधान की दिशा में प्रयास करना होगा।

 

डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि इन सुझावों का अध्ययन कर आईफा ने कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर 25 मुख्य विंदु चिन्हित किये हैं, जिसे केंद्र सरकार को भेजा गया है। ये सुझाव तीन स्तरों को ध्यान में रख कर दिये गये हैं

*पहला स्तर*: तात्कालिक तौर पर कोरोना संक्रमण और इसकी वजह से लॉकडाउन से कृषि क्षेत्र के नुकसान से उबारने तथा किसानों को तात्कालिक राहत देने

*दूसरा स्तर*: भारतीय कृषि की आधारभूत संरचना को सदृढ़ करते हुए ऩीतिगत कृषि सुधार

*तीसरा स्तर*: वर्तमान वैश्विक परिस्थिति के मद्देनजर भविष्य के अवसरों का लाभ उठाने के लिए संरचनात्मक विकास के साथ कृषि क्षेत्र में निवेश और नवाचार के लिए सहज-सुगम माहौल का सृजन।

 

*डॉ त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय कृषि इस लॉकडाउन के पहले ही एक प्रकार से आईसीयू में थी अब यहां दो ही विकल्प हैं:

एक कि भारतीय कृषि को उसके हाल पर छोड़ दिया जाए, जो किसी संप्रभुता संपन्न राष्ट्र के लिए संभव नहीं है, जिसकी आबादी का एक बड़े हिस्से की आजीविका कृषि पर आधारित हो। दूसरी स्थिति है कि जब वैश्विक अर्थव्यवस्था ही मणासन्न पर आ गई है, तब भारतीय कृषि क्षेत्र स्वयं को वैश्विक नेतृत्व देने की स्थिति में स्वयं को खड़ा करे और विश्व में कृषि का अनुकरणीय मॉडल पेश करे। इसकी पूरी संभावना भारत में है। बस कुशल नेतृत्व, सही नीति और उसका सटीक क्रियान्वयन इसके मूल में है।

 

इसी को ध्यान में रखते हुए आईफा ने अपने स्तर पर पहल की है। आने वाले समय में आईफा कृषि क्षेत्र के विभिन्न पहलु पर शोध-सर्वेक्षण के आधार पर नीति निर्माण के लिए वस्तुस्थिति की जानकारी केंद्र सरकार को उपलब्ध करायेगी। इसके लिए आईफा कृषि विशेषज्ञों की एक टीम भी बना रही है जो अगले सप्ताह-दस दिन में मूर्त रूप ले लेगी। आईफा का मानना है कि सिर्फ आंदोलन से भारतीय कृषि की दशा-दिशा में बदलाव नहीं आएगा। कृषि क्षेत्र के प्रत्येक हितधारकों को अपने स्तर पर कृषि के उज्जवल भविष्य के लिए अपना योगदान देना होगा।

 

डॉ त्रिपाठी ने कहा कि कभी-कभी स्थितियां इतनी प्रतिकूल हो जाती है कि लगता है कि उससे उबरना मुश्किल है। लेकिन इन्हीं मुश्किल हालातों का जब समाधान तलाशा जाता है तो उत्कृष्ट समाधान और अभूतपूर्व अवसर मिलते हैं, सजिसकी पूरी संभावना है। आईफा इसी संभावना को ध्यान में रख कर नई रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है औऱ आईफा को इसमें अबभूतपूर्व सहयोग-समर्थन मिल रहा है।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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