शाहीनबाग : नोएडा से फरीदाबाद और जैतपुर जाने का रास्ता खुला


शाहीनबाग : नोएडा से फरीदाबाद और जैतपुर जाने का रास्ता खुला

दो महीनो से दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ चल रहे  धरने की वजह से बंद नोएडा से फरीदाबाद और जैतपुर जाने का रास्ता खुल गया है।  शुक्रवार सुबह पुलिस ने इस रास्ते से बैरिकेडिंग हटा दी। आपको बता दे कि कालिंदीकुंज का रास्ता अब भी बंद है। प्रदर्शनकारियों द्वारा कोई ढील नहीं दी गई है, वो ज्यों-का-त्यों है। 

 


नोएडा पुलिस द्वारा शुक्रवार सुबह ओखला बर्ड सेंचुरी के पास लगाया गया बैरिकेंडिग  को हटा दिया गया। जिससे बदरपुर जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है। लोगों को अभी तक मदनपुर खादर के रास्ते से होकर जाना पड़ता था। लोगों को इससे काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा था। फरीदाबाद जाने के लिए लोगों को डीएनडी के जरिए आश्रम होते हुए कई किलोमीटर घूमकर जाना पड़ रहा था।

 

 


लोगों के मुताबिक, मदनपुर खादर वाले रास्ते से जाने से 20 मिनट का सफर को तय करने में ढाई घंटे लग रहे थे। अब रास्ता खुलने बदरपुर, जैतपुर में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिल गई है। लोगों का कहना है कि नोएडा पुलिस को यह रास्ता बंद करने की जरूरत ही नहीं थी क्योंकि प्रदर्शनकारी वहां से काफी दूर बैठे हुए हैं कालिंदी कुंज का रास्ता अभी भी बंद है। 

 

 

शाहीन बाग में प्रदर्शन के कारण बंद इस रास्ते को खुलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने धरने पर बैठे लोगों को समझाने के लिए तीन सदस्यीय टीम का भी गठन किया जिसमें वकील संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन के अलावा देश के पहले मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह शामिल हैं। वार्ताकारों ने बुधवार और गुरुवार को शाहीन बाग जाकर प्रदर्शनकारियों को दूसरी जगह शिफ्ट होने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी।
 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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