एनबीटी का प्रयास सराहनीय- डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,


एनबीटी का प्रयास सराहनीय- डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,

नईदिल्ली-
मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार, डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक‘ प्रगति मैदान स्थित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में पधारे। उन्होंने विशेष रूप से डिजाइन किए गए थीम मंडप- ‘गांधी: लेखकों के लेखक‘ तथा गांधी पर आधारित पुस्तकों की प्रदर्शनी की सराहना की। श्री पोखरियाल ने बाल मंडप, विदेशी मंडप और अन्य हॉलों में अंग्रेजी, हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में प्रदर्शित पुस्तकों का अवलोकन किया। वह मेले में पुस्तक प्रेमियों के साथ बातचीत करके अत्यंत प्रसन्न दिखाई दिए और एनबीटी के इस वार्षिक प्रयास की सराहना की।

 

थीम पैवेलियनः-
थीम मंडप में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा ‘गांधी की विचारधारा‘ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में विद्वान श्री मिलिंद बोकिल और श्री कृष्ण काकेड उपस्थित थे। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के मराठी भाषा संपादक सुश्री निवेदिता ने उनसे बातचीत की। श्री मिलिंद बोकिल ने कहा कि हमें सत्य और अहिंसा को बुनियादी विचार समझकर अपनाना चाहिए। गांधीजी के सर्वोदय की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब दलित, आदिवासी, घुमन्तु जनजाति आदि विकास की धारा से जुड़ जाएंगे तभी सही मायनों में  देश का विकास माना जाएगा। आज हम राजधानी और कुछ शहरों के विकास को ही देश का विकास समझ लेते हैं, जबकि सुदूर गाँव से मंडी तक अनाज पहुँचाने में कई दिन लग जाते हैं। यह विकास नहीं हो पाने की यथार्थ तसवीर है।

 

श्री कृष्ण काकेड ने घुमन्तु एवं विमुक्त लोगों की प्रकृति पर रचित अपनी पुस्तक ‘भटके विमुक्त समाज‘ पुस्तक पर बात करते हुए बताया कि घुमन्तु जनजातियों का कोई गाँव नहीं होताय  वे इधर-उधर घूमकर अपना जीवन व्यतीत करते हैं। इस कारण उनके बच्चों को पढ़ने-लिखने का अवसर नहीं मिल पाता है। स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी उनका विकास नहीं हो पाया है। कुछ जनजातीय इलाकों में विद्यालय अवश्य हैं लेकिन उनमें मातृभाषा की बजाय हिंदी, अंग्रेजी या संविधान में उल्लिखित किसी अन्य भाषा में शिक्षा दी जाती है, जिस कारण बच्चों में पढ़ने के प्रति रुचि नहीं जग पाती है। उन बच्चों के लिए मातृभाषा में शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए।

 

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा ‘गांधी और पंजाब‘ पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया । इस अवसर पर वक्ताओं में डॉ. कुलबीर गोजरा, डॉ. चरणपुष्पेंद्र सिंह, डॉ. सुमेल सिंह सिद्धू और डॉ. खुशवंत सिंह बरगाड़ी शामिल थे। सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने महात्मा गांधी और पंजाब राज्य के बीच संबंधों पर अपने विचार साझा किए।

 

नेशनल बुक ट्रस्ट व नेशनल गांधी म्यूजियम ने मिलकर ‘गांधी पब्लिशिंग गांधी’ पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया। डॉ. साधना राउत, पूर्व महानिदेशक, प्रकाशन विभाग ने विभिन्न चरणों के बारे में बात की जिसमें गांधी के संपूर्ण कार्यों को एकत्र किया गया और उनका पुनरुत्पादन किया गया। उन्होंने कहा कि उनके कामों को प्रकाशित करने में 38 साल लग गए। राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के निदेशक श्री ए. अन्नामलाई ने गांधी के बारे में दक्षिण अफ्रीका और भारत में उनके एक प्रकाशक और लेखक रूप की चर्चा की।

 

 

बाल मंडपः-

पुस्तक मेले में आज की गतिविधियों की शुरुआत बाल मंडप में एक कार्यशाला, ‘कैन राइट- कैन प्ले‘ के साथ शुरू हुई। इस सत्र के दौरान श्री अजय वर्मा ने बच्चों का मनोरंजन किया और संगीतमय ध्वनियों का उपयोग करके उन्हें कहानियाँ सुनाईं। सुश्री संगीता सेठी ने बच्चों को खेल के इर्द-गिर्द घूमती हुई कहानियाँ भी सुनाईं।

 

एक वैज्ञानिक कार्टून कार्यशाला का आयोजन ‘निस्केयर‘ संस्था द्वारा किया गया। संगठन के विशेषज्ञ सुश्री चारु वर्मा, डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, श्री जावेद और सुश्री शुभदा कपिल ने बच्चों के साथ बातचीत की और उन्हें बताया कि वैज्ञानिक कार्टून क्या है। प्रतियोगिता में दिल्ली वल्र्ड स्कूल और कैम्ब्रिज स्कूल, नोएडा से बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया।

 

‘स्टोरीघर‘ द्वारा आयोजित संगीतमय कहानी वाचन कार्यक्रम बच्चों को कल्पना की एक अलग ही दुनिया में ले गया। जयश्री सेठी ने बताया कि कैसे संगीत से कहानियों में सार-तत्व जोड़ा जा सकता है। इस बीच बच्चों ने कीबोर्ड, गिटार और अन्य उपकरणों की बीट्स का भी आनंद लिया।

 

ऑथर्स कॉर्नरः-

‘हार्पर कॉलिंस पब्लिशर्स इंडिया‘ द्वारा सुश्री सुधा मूर्ति के साथ एक परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित हुआ। सत्र के दौरान सुश्री सुधा मूर्ति ने बच्चों के लिए हाल ही में प्रकाशित पुस्तकों, ‘गोपी डायरीज‘, तथा ‘कमिंग होम‘ के बारे में बात की। पुस्तक पे्रमियों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि किताब उनके कुत्ते गोपी के बारे में लिखी गई है जो उनके और उनके परिवार के लिए एक फरिश्ता से कम नहीं है। गोपी ने अपने प्यार की ताकत से पालतू जानवरों के बारे में उनके घर पर सभी का दृष्टिकोण बदल दिया था।

 

बाद में सुश्री सुधा मूर्ति ने अपनी पुस्तक के कुछ अंश भी पढ़े। सुश्री आकृति त्यागी द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं में श्री उदयन मित्रा और सुश्री टीना भी शामिल थे। साहित्य अकादेमी द्वारा ‘युवा साहित्य‘ पर एक बहुभाषी कविता पाठ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कवि और लेखक श्री मुकुल कुमार ने कहा- कविता भावनाओं का एक सहज प्रवाह है। उन्होंने कहा कि कविता कला का उच्चतम रूप है क्योंकि यह कुछ शब्दों के भीतर हजारों भावनाओं को व्यक्त करती है जो इसे अन्य शैलियों की तुलना में श्रेष्ठ बनाती है।

 

अन्य वक्ताओं में विजय शंकर बर्मन ने असमिया भाषा में एक कविता का पाठ किया और दर्शकों के लिए इसका हिंदी अनुवाद किया। इस अवसर पर कृष्ण मोहन सिंह ;मणिपुरीद्ध, मनोज कुमार पांडे ;हिंदीद्ध, एन सुरेश बाबू के अलावा अन्य लोगों ने भी अपनी-अपनी कविताओं का पाठ किया व उन पर चर्चा की। सुमित दत्त मजूमदार द्वारा लिखित पुस्तक ‘आर्टिकल 370: फाॅर कॉमन मैन‘ का लोकार्पण किया गया।

 

पुस्तक के बारे में बात करते हुए ओमेर अहमद ने कहा कि पुस्तक में ऐतिहासिक उपद्रव और विभिन्न समस्याओं के प्रति भारतीय संविधान का दृष्टिकोण शामिल है। जयंत रॉय चैधरी द्वारा संचालित कार्यक्रम में अन्य अतिथियों में टीसीए राघवन, निष्ठा गौतम और सुमित दत्त मजूमदार भी शामिल थे। यह पुस्तक इस तथ्य पर केंद्रित है कि भारत राज्यों का एक संघ कैसे बनेगा और धारा 370 की वास्तविकता क्या थी। सत्र का आयोजन नियोगी बुक्स द्वारा किया गया था।

 

 

लेखक मंचः-
लेखक मंच पर ‘लेखक से मिलिए’ कड़ी में ‘राजपाल एण्ड संस’ द्वारा ‘सरहद के आर-पार की शायरी’ शीर्षक से समारोह का आयोजन हुआ। इस आयोजन में पाकिस्तान एवं भारतीय शायरों की शायरियाँ पढ़ी गयीं। शायरी पढ़ने के लिए मंच पर जन नाट्य मंच से जुड़े सत्यम तिवारी, विकास शर्मा, कर्नल गौतम राज ऋषि, सौरभ शेखर तथा अंकित गौतम उपस्थित थे। इन शायरों के द्वारा उमैर नज्मी, नादिर अजीज, रफीद अजर, इदरिस बाबर, सुदर्शन फाकिर, तुफैल चतुर्वेदी, अजहर फराब, रऊफ रजा आदि की शायरी पढ़ी गयी।

 

अंकित गौतम ने शायरी को परिभाषित करते हुए उसे ‘खामोशी का तर्जुमा’ कहा तथा उसके रूमानी तेवर के साथ इंकलाबी रूप पर भी बात की। कार्यक्रम का संचालन इरशाद खान सिकंदर ने किया। ‘व्यंग्य यात्रा पत्रिका’ द्वारा ‘21वीं सदी के व्यंग्य पर परिचर्चा’ शीर्षक से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन ‘व्यंग्य पत्रिका’ के 16वें वर्ष में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ तथा पत्रिका की अद्यतन प्रति का लोकार्पण भी किया गया।

 

आयोजन में पत्रिका के सम्पादक प्रेम जनमेजय तथा पंकज सुबीर, रमेश सैनी, गिरीश पंकज, हरीश पाठक, महेश दर्पण, हरीश पाठक, समीक्षा तैलंग, सुरेश कांत उपस्थित थे। 21वीं सदी के व्यंग्य के स्वरूप पर बात करते हुए रमेश सैनी ने व्यंग्य में घटती निडरता को रेखांकित किया। समीक्षा तैलंग ने विद्रूपता के समय में व्यंग्य को सबसे उपयुक्त विधा बताया। कार्यक्रम का संचालन रणविजय राव ने किया।

 

‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान’ द्वारा गांधीजी के वाक्य ‘दुनिया वालों से कह दो मैं अंग्रेजी भूल गया’ को शीर्षक बनाकर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, श्री वेदप्रताप वैदिक, डॉ. कुंवर बेचैन, दिविक रमेश, पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट से जुड़े स्वामी विदेह देव, मातृभाषा उन्नयन संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन एवं सचिव गणतंत्र जैन ओजस्वी तथा ‘वल्र्ड बुक ऑफ रिकॉड्र्स’ से जुड़े प्रो. राजीव जैन व दिवाकर उपस्थित थे।

 

पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने हिंदी भाषा को ‘संस्कारों की भाषा’ कहा तथा वेदप्रताप वैदिक ने अपने ‘हिंदी में हस्ताक्षर अभियान’ से पाठकों को अवगत कराया। कार्यक्रम में रिंकल शर्मा के ‘ज्ञान गीता पब्लिकेशन’ से प्रकाशित लघुकथा संग्रह ‘क्या नाम रखूँ’ तथा ‘केबीएस प्रकाशन’ से प्रकाशित डॉ. अर्पण जैन की पुस्तक ‘वीरांगना’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का संचालन अमित शर्मा ने किया।

 

‘शब्द उत्सव‘ एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. पवन सिंह मलिक द्वारा सम्पादित ‘नागरिक पत्रकारिता’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में वक्ता के रूप में हितेश शंकर, राहुल महाजन, बृजकिशोर कोटियाला तथा उमेश उपाध्याय उपस्थित थे। कार्यक्रम में मीडिया के वर्तमान स्वरूप के विविध पक्षों पर बात हुई तथा हितेश शंकर ने मीडिया की भूमिका पर बात करते हुए मीडिया को व्यवस्था के भीतर का ही एक हिस्सा बताया।

 

उमेश उपाध्याय ने मीडिया को नैरेटिव बनाने वाला कहा तथा राहुल महाजन ने लोगों की सतर्कता एवं जागरूकता की आवश्यकता पर बात की। अनिल पांडे ने इस कार्यक्रम में संचालक की भूमिका निभायी। ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ‘वैदिक परिचय ग्रंथमाला-1 की पुस्तक ‘ऋग्वेद’ का लोकार्पण हुआ तथा उसके लेखक हृदयनारायण दीक्षित से बातचीत का सत्र आयोजित हुआ।

 

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