लॉकडाउन के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गई


लॉकडाउन के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गई

एक्शनएड एसोसिएशन एवं यूनिसेफ द्वारा संचालित नई पहल परियोजना जनपद महोबा के जिला समन्वयक अमन साहू का कहना है कि आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है जिसके चलते विश्व के अनेक देश सहित भारत में भी लॉकडाउन लगाया गया है जिसकी वजह से मध्यमवर्गीय व निम्नवर्गीय परिवारों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गई है, हालांकि भविष्य में स्थिति सामान्य होने की संभावना व्याप्त है।

 

मैं आप सभी से बच्चों की शिक्षा पर कुछ बात करना चाहूंगा कि बिना विद्यालयीय शिक्षा के बच्चों को मोबाइल,लैपटॉप इत्यादि के माध्यम से पढ़ाई का झुनझुना पकड़ाकर उनसे मोटी फीस वसूलने का सिलसिला निजी स्कूलों द्वारा जारी है।

 

अब मध्यमवर्गी परिवार जिनके बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई करते है तो ज्यादातर परिवार ये चाहते है कि उनके बच्चो की फीस जो है तीन महीनों की माफ कर दी जाए लेकिन प्राइवेट स्कूल वाले इससे सहमत नही होंगे बल्कि सरकार ने भी निजी स्कूल संचालकों से अपील की है कि वो अभिभावकों से फीस के लिए जोर ना बनाये , एक साथ फीस ना माँगे हो सके तो तीन महीनों की फीस माफ कर दे। जिसमे की निजी स्कूल  संचालक इस बात को मान भी सकते है और नही भी। तो मेरा उन सभी अभिभावकों से अपील है जो अभिभावक अपने बच्चों की प्राइवेट स्कूल में फीस जमा करने के लिए सक्षम नही है।

 

तो इसका विकल्प यह हो सकता है, परिषदीय विद्यालय क्योंकि सरकारी विद्यालयों में आधारभूत संरचना से लेकर शिक्षा की गुणवत्ता तक में आमूल चूल सुधार देखने को मिलें है।

 

क्योंकि आर0टी0ई0 अधिनियम 2009 के तहत सरकारी विधायलयो में कक्षा 01 से लेकर कक्षा 08 तक निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करने का प्रावधान है और सरकार भी इसी उद्देश्य के साथ इसका संचालन कर रही है एवं नामांकन बढ़ाने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर रही है क्योंकि परिषदीय विद्यालयों में उत्तम शिक्षण है , योग्य अध्यापक है, अच्छा पाठ्यक्रम, अच्छे भवन, निःशुल्क स्कूल ड्रेस, निःशुल्क कापी किताबे, मिड डे मील जिसमे मुख्यरूप से बच्चो को पोषक आहार दिया जाता है।

 

वो भी सब एकदम फ्री वो भी आपके अपने घर से बिल्कुल पास में जिसमे आप कभी भी किसी भी समय उन विद्यालय में जाकर अपने बच्चों के बारे जानकारी ले सकते है एवं मिल रही सुविधाओं को परख सकते है और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य बनकर विद्यालय को और भी बेहतर बना सकते है एवं कक्षा 08 के बाद 09 और 10वी की पढ़ाई के लिए भी सरकारी विद्यालयों में मामूली सी फीस लगती है तो किसी भी अभिभावक को परेशान होने की जरूरत नही है। क्योंकि परिषदीय विद्यालयों में सारी सुविधाएं बिल्कुल निःशुल्क है।

 

तो सरकार अभी जुलाई से शैक्षिक संस्थानों को खोलने का विचार बना रही है तो आप सभी इस विषय पर विचार-विमर्श करे और अपने बच्चों का नामांकन कराकर इस परेशानी से बच सकते है।

 

- भूपेंद्र मिश्रा

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इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल


इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल

आज सुबह से सोशल मीडिया पर एक खबर को काफी तेजी से वायरल किया जा रहा है. दरअसल, कर्नाटक में BS येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली BJP सरकार के मंत्रियों ने बीते मंगलवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली. इस दौरान जब BJP नेता और विधायक मधु स्वामी पद और गोपनीयता की शपथ ले रहे थे, तभी उन्होंने गलती से बतौर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. 

 

 

बता दें कि, मधु स्वामी जब शपथ ले रहे थे तो उन्हें मंत्री बोलना था, लेकिन जुबान फिसलने के चलते वह मुख्यमंत्री बोल पड़े. अब इस खबर को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है. खास बात ये है कि इस दौरान CM येदियुरप्पा भी मौके पर मौजूद थे और मधु स्वामी की इस गलती पर मुस्कुरा दिए. इतना ही नहीं येदियुरप्पा ने मधु स्वामी को बाद में गले भी लगाया.

 

गौरतलब है कि, बीते मंगलवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल वजुभाई वाला ने 17 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलायी. जिन विधायकों को मंत्री पद से नवाजा गया है, उनमें बी. श्रीरमुलु, सीटी रवि, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केएस ईश्वरप्पा और पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार का नाम शामिल है. बता दें कि, येदियुरप्पा के 26 जुलाई को CM बनने के बाद उनके मंत्रिमंडल का यह पहला विस्तार है. उन्होंने 29 जुलाई को विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित किया था. 

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22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों


22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों

उतर-प्रदेश के बांदा जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, कई लोग इसे देखकर खुदा का करिश्मा मान रहें हैं तो वहीं कई लोग नेक इंसाल का दर्जा दे रहें हैं. बताया जा रहा है कि, यहां 22 वर्ष पहले कब्र मे दफनाए गए एक शख्स का जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला है.

 

ये मामला तब सामने आया जब मूसलाधार बारिश के चलते कब्रिस्तान में मिट्टी कटने से एक कब्र धंस गई और उसमें  22 वर्ष पहले दफन एक शख्स का कफन में लिपटा जनाजा़ दिखने लगा. यहां देखते ही देखते मौके पर काफी लोगों पहुंच गए. जब कफन में लिपटी लाश को निकाला गया तो वहां मौजूद सैकड़ों लोग देखकर दंग रह गए. क्योंकि 22 सालों बाद भी लाश ज्यों कि त्यों निकली.

 

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दरअसल, ये मामला उतर-प्रदेश के जिले बांदा के बबेरू कस्बे के अतर्रा रोड स्थित घसिला तालाब के कब्रिस्तान की है. यहां मूसलाधार बारिश से कई कब्रों की मिट्टी बह गई और एक कब्र में दफन जनाजा़ बाहर दिखने लगा. इसके बाद लोगों ने कब्रिस्तान कमेटी को इसकी जानकारी दी. कब्रिस्तान कमेटी के सदस्‍यों द्वारा जब कब्र की धंसी हुई मिट्टी को हटाकर देखा गया, तो उसमें दफनाया गया जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला.

 

गौरतलब है कि, इस कब्र में 22 वर्ष पहले 55 वर्षीय पेशे से नाई नसीर अहमद नाम के शख्स को दफनाया गया था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नसीर अहमद पुत्र अलाउद्दीन निवासी कोर्रही, थाना बिसंडा बबेरू में नाई की दुकान थी. उन्‍हें लगभग 22 वर्ष पहले दफन किया गया था. जबकी दूसरी तरफ मृतक नसीर के एक रिश्तेदार बताते हैं कि उनका कोई बेटा नहीं था. 

 

22 वर्ष पहले उनका निधन हुआ था, जिसके बाद उनलोगों ने ही उनके शव को दफनाया था. लेकिन, आज उनका जनाजा मिटटी धंसने की वजह से बाहर निकल आया. न शव ख़राब हुई थी और न ही कफ़न पर कोई दाग लगा था. हालंकी, बाद में स्थानीय मौलानाओं की मौजूदगी में शव को कल देर रात उसे दूसरी कब्र में दोबारा से दफन किया गया.

 

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