जानें थावरचंद गहलोत की जीवनी


जानें थावरचंद गहलोत की जीवनी

वर्तमान में मोदी मंत्रालय में सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री थावरचंद गहलोत एक कुशल समाजसेवी एवं राजनेता हैं। इनकी रचना मध्य प्रदेश विधान सभा द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘विद्यायनी’ में साहित्यिक हित के लिए लेख लिखकर अपना लेखन सहयोग दिया है। फ़िलहाल गहलोत मंत्री के साथ साथ ‘बाला समाज’ के साथ जुड़कर शोषित वर्गों के लिए भी काम करते हैं। आज हम आपको थावरचंद गहलोत की जीवनी बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं।

 

थावरचंद गहलोत का जन्म 18 मई 1948 को मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के रुपेटा गांव में हुआ था। इन्होने अपनी प्रारंभिक पढाई रुपेटा से की और माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा बीए संकाय से विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, मध्यप्रदेश से की है। इन्होने 1 मई 1965 को अनीता गहलोत से शादी की। आज इनके परिवार में एक बेटी और तीन बेटे हैं।

 

 

राजनैतिक करियर

थावरचंद गहलोत ने अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत कालेज के समय से ही शुरू कर दी थी। जब गहलोत ने आरएसएस ज्वाइन की और फिर पहले बार 1962  में आरएसएस शाखा के जिला उज्जैन के नादगा में नगर कार्यवाहक बने। और फिर इनकी पदोन्नति होती रही और पहले 1977 तक मध्य प्रदेश आरएसएस के सचिव  नियुक्त किये गये।  इसी बीच 1968-71 के बीच इन्होने कामगारों की आवाज बुलंद करने के लिए उनका समर्थन किया और इस सिलसिले में कई बार जेल भी गये।

 

इसके साथ ही भैरवगढ़, उज्जैन जिला में लगभग 10 महीने तक जेल में रहे। इसके बाद 1975 तक केमिकल श्रमिक संघ के सचिव बने रहे। इन्हें 1975-76 में आपातकाल के समय आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (मीशा) के रखरखाव के तहत हिरासत में लिया गया। इसके बाद वह पार्टी से जुड़े रहे और लगातार पार्टी के लिए काम किया। वे 1996 से 2009 तक मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले से लोकसभा सांसद बने रहे।

 

2014 में लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी बड़ी पार्टी बनकर उभरी तो उस समय मोदी मंत्रालय में थावरचंद गहलोत को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री बनाया गया और उन्होंने अपने कार्यकाल को बखूबी निभाया। इसके बाद दूसरे कार्यकाल में भी जब मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी तो उन्हें सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री बनाया गया।

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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