सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रख लें सभी स्वास्थ्य सुविधाएं: सिविल सर्जन


सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रख लें सभी स्वास्थ्य सुविधाएं: सिविल सर्जन

-स्वास्थ्य सुविधाओं में न हो कमी, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश

-आपातकालीन व ओपीडी में काम सुचारू रूप से काम होने पर दिया जोर

-लॉकडाउन में भी लोगों से संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने पर बल

 

लखीसराय, 17 अप्रैल:

जिला में कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन को लेकर अन्य बाधित हुई स्वास्थ्य सेवाओं को पुन: चालू किया जा रहा है. आमलोगों तक अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को आसान किया जा सके इसके लिए स्वास्थ्य विभाग पुरी मुस्तैदी से काम कर रहा है. ओपीडी व आपातकालीन सेवाओं सहित गर्भवती के लिए भी सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था कराने के लिए लोगों को अस्पताल आने के लिए कहा गया है.

 

सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने लोगों से अपील किया है कि कोरोना संक्रमण को लेकर लॉकडाउन की स्थिति में बहुत आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा के लिए अस्पताल आ सकते हैं. घर से बाहर निकलते समय लोग अपनी पूरी सुरक्षा का ख्याल कर निकलें. उन्होंने लोगों से कहा है कि ओपीडी सहित आपातकालीन सेवाओं को सुचारू रूप से चालू करने में आमजन की सहभागिता भी जरूरी है ताकि सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का सही तरीके से अनुपालन किया जा सके.

 

और अन्य बीमारी का इलाज कराने के साथ कोरोना संक्रमण की रोकथाम की जा सके. उन्होंने कहा है कि गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव कराने के लिए जरूर जायें क्योंकि इस संकटकाल में भी संस्थागत प्रसव के मामले कम नहीं होने चाहिए. इसके लिए आवश्यक निर्देश भी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को दिये गये हैं.

 

प्रधान सचिव के निर्देश के अनुरूप हो रहा काम: 

सीएस ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के निर्देशानुसार जिला अस्पताल व अनुमंडलीय अस्पताल में आवश्यक व्यवस्थाएं की गयी हैं. अस्पताल के प्रवेशद्वार पर फ्लू कॉर्नर की व्यवस्था सहित एंट्रेंस व एग्जिट के लिए एक ही गेट चालू रखने के निर्देश दिये गये हैं. आशाओं व एएनएम के माध्यम से लोगों को बताया गया है कि आपातकालीन सेवा लेने वाले मरीज या प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती के साथ बहुत अधिक लोग नहीं आये. 

 

लॉकडाउन में भी संस्थागत प्रसव को दें प्राथमिकता: 

जिला में संस्थागत प्रसव सहित ओपीडी व अन्य आपातकालीन सेवाओं को शुरू करने के संबंध में राज्य सरकार के दिये गये निर्देश के बाद जिला अस्पताल सहित अनुमंडलीय अस्पतालों में इन सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं होने देने संबंधी निर्देश सिविल सर्जन ने दिये हैं. आशा व एएनएम के माध्यम से इस बात की लोगों तक जानकारी दी जा रही है कि लोग आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संस्थागत प्रसव आदि के लिए नजदीक के ही अस्पताल जायें.

 

यदि घर में कोई गर्भवती महिला है जिसके प्रसव का समय नजदीक है तो पूर्व से ही अस्पताल में संपर्क कर सारी व्यवस्था कर लें ताकि लॉकडाउन में कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. गर्भवती को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं होती है तो निजी वाहन से उसे अस्पताल ले जा सकते हैं. इसके लिए विभाग की ओर से आवागमन के लिए 500 रुपये की राशि का भुगतान भी किया जायेगा

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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