नक्सलवाद क्षेत्रों में सशक्त संचार माध्यम विकसित करने की आवश्यकता: कमलनाथ


नक्सलवाद क्षेत्रों में सशक्त संचार माध्यम विकसित करने की आवश्यकता: कमलनाथ

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नक्सलवाद समाप्त करने में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचार माध्यमों को सशक्त बनाया जाना चाहिए ताकि सूचनाओं को संग्रहण त्वरित गति से हो सके और समय पर कार्रवाई संभव हो। नाथ ने कहा कि राज्य में नक्सल समस्या को खत्म करने के सभी प्रयास किए गए है। उन्होंने इसके स्थाई समाधान के लिए राज्य और भारत सरकार के संयुक्त प्रयास की आवश्यकता बताई।

 

कमल नाथ आज यहाँ विज्ञान भवन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बुलाए गए नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की समीक्षा बैठक में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। बैठक में ग्यारह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया। मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती, डीजीपी वी.के. सिंह और एडीजी जी.पी. सिंह ने भी बैठक में उपस्थित थे।

 

प्रदेश में नक्सलवाद से निपटने में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2000 में ’’हाॅकफोर्स’’ बनाया गया था । सहभागिता आधारित विकास नीतियों के कारण नक्सलवाद को केवल दो जिलों बालाघाट और मंडला की सीमा तक सीमित करने में सफलता मिली। राज्य पुलिस को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ समन्वय बनाने के निर्देश दिये गये है।

 

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पुलिस बल के आधुनिकीकरण पर अधिक जोर दिया गया है। वे आधुनिक गैजेट्स जैंसे ट्रैकर्स, जीपीएस, ड्रोन, ट्रैप कैमरा, बॉडी प्रोटेक्टिव आर्मर और जंगल रिस्ट वाहनों से लैस हैं। उन्होंने ह्यूमन इंटेलिजेंस के साथ टेक्नोलॉजी के समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष खुफिया शाखा बनाई गई है।

 

कमल नाथ ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खराब कनेक्टिविटी मुख्य मुद्दा है जो सूचनाओं के संग्रह करने और साझा करने को बाधित करता है। उन्होंने बालाघाट और मंडला जिलों में कम से कम फोर-जी कनेक्टिविटी का प्रावधान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि खराब टेलीफोन और मोबाइल नेटवर्क कव्हरेज के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचार नेटवर्क पुलिस वायरलेस पर बहुत अधिक निर्भर है।

 

50 प्रतिशत आदिवासी ब्लॉक में केवल टू-जी कनेक्टिविटी है। उन्होंने 33.74 करोड़ रुपये की मंजूरी के लिए भी अनुरोध किया, जिसके लिए पीएमजीवाई के तहत केंद्र सरकार को प्रस्ताव और डीपीआर को बालाघाट में दो सड़कों और एक पुल और मंडला जिलों में दो सड़कों और तीन पुलों के निर्माण के लिए प्रस्तुत किया गया है।

 

उन्होंने बालाघाट (बिरसा) के एक ब्लॉक और मंडला (मैनपुर, बीजाडांडी, मवई और मोहगांव) में चार ब्लॉक में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) स्थापित करने के लिए वर्ष 2019-20 के लिए धनराशि को जल्द मंजूरी देने का अनुरोध किया।

 

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कमल नाथ ने नागरिकों के वित्तीय समावेशन की आवश्यकता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बालाघाट और मंडला में प्रति लाख आबादी पर 6.6 बैंक शाखाएं हैं, जबकि राज्य के औसत बैंक ब्रांच की संख्या 10.58 है। प्रति बैंक शाखा का क्षेत्रफल लगभग 102.5 वर्ग किमी है जबकि राज्य का औसत 49 वर्ग किमी है ऐसी स्थिति से निपटने के लिए, राज्य सरकार ने इस वर्ष 16 अगस्त 2019 से 15 सितंबर 2019 तक राज्य के 89 आदिवासी ब्लॉकों में एक वित्तीय साक्षरता अभियान शुरू किया है। इस दौरान लगभग 30 वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित किए जाएंगे। मंडला और बालाघाट जिलों के 12 आदिवासी ब्लॉक भी इसमें शामिल हैं।

 

कमल नाथ ने बताया कि सरकार आदिवासियों के अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। प्राप्त किए गए 6.26 लाख पट्टा दावा आवेदनों में से 2.66 लाख मामलों में अधिकार दिए गए हैं। सभी 3.66 लाख आवेदनों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं, जो अपूर्ण दस्तावेज के कारण खारिज कर दिए गए थे। उन्होंने बताया कि सभी जिलों में 3.6 लाख खारिज किए गए दावों के व्यापक, पारदर्शी और त्वरित निपटान के लिए ’’वन मित्र’’ पोर्टल शुरू किया गया है।

 

 

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