पीएचसी में तैनात सरोजनी की कहानी, घर-घर स्क्रीनिंग कर निभा रहीं अपना कर्तव्य


पीएचसी में तैनात सरोजनी की कहानी, घर-घर स्क्रीनिंग कर निभा रहीं अपना कर्तव्य

कोरोना संकट के इस दौर में स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी से डटी हुई है। कई कर्मी तो ऐसे हैं जो फरिश्ते से कम भूमिका नहीं निभा रहे हैं। ऐसे समय में जब ज्यादातर लोग कोरोना का नाम सुनते ही दूर भागने लगते हैं, वहीं नारायणपुर पीएचसी में तैनात नर्स सरोजनी कुमारी घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रही हैं। गांव-गांव जाकर लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक कर रही हैं। लोगों को समझा रही हैं कि स्क्रीनिंग कराने के क्या फायदे हैं। संदिग्धों की पहचान कर रही हैं। वह ऐसे संक्रमण काल में अन्य क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनी हैं। इस दौरान अगर कोई दूसरी बीमारी के शिकार मिल जाते हैं तो उसे भी सही इलाज का सुझाव देकर अस्पताल में भर्ती करवा देती हैं।

 

सरोजनी कुमारी मार्च 2003 से नारायणपुर में नर्स के तौर पर ड्यूटी कर रही हैं। तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा है। अभी जब कोरोना संकट आया है, वह गांव-गांव जाकर लोगों का थर्मल स्क्रीनिंग कर रही हैं। अभी तक वह सैकड़ों लोगों की स्क्रीनिंग कर चुकी हैं। अगर किसी में एक से अधिक लक्षण मिलते हैं तो उसे एंबुलेंस की व्यवस्था कर नवगछिया भेज देती हैं। वहां पर मरीजों का सैंपल लिया जाता है।

 

सरोजनी मुश्किल की इस घड़ी में सेवा करना अपना धर्म समझ रही हैं। उनका कहना है कि इस मुश्किल दौर में हमारा दायित्व बढ़ जाता है। ऐसे समय में न सिर्फ घर-घर जाकर लोगों को स्क्रीनिंग करना जरूरी है, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है। खासकर गांव के लोगों में थोड़ी झिझक होती है। उन्हें समझाना पड़ता है कि आखिर स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है। दरअसल, लोगों को जागरूक कर मनाना पड़ता है। साथ ही अगर कोई दूसरी बीमारी से पीड़ित रहता है तो उसकी भी उचित व्यवस्था कर देती हूं।

 

कई दिनों से घर नहीं गयीं:

सरोजनी कुमारी का घर नारायणपुर से लगभग 70 किलोमीटर दूर बेगूसराय जिले के बलिया में है। घर में पति और पांच बच्चे हैं। इनमें चार बेटियां। इतना बड़ा परिवार और इतनी बड़ी जिम्मेदारी के बावजूद वह काफी दिनों से घर नहीं गई हैं। वह दिनरात अपने काम में लगी हुई हैं। वह घर जाने के बारे में सोच भी नहीं रही हैं।

 

पीएचसी प्रभारी डॉ. विजयेंद्र कुमार विद्यार्थी कहते हैं कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीम पिछले डेढ़ महीने से सक्रिय है। टीम में सरोजनी की भूमिका महत्वपूर्ण है। उसका लगन देखने लायक है। स दौरान एक बार भी सरोजनी ने काम को छोड़कर परिवार के पास जाने की इच्छा जाहिर नहीं की है। काम के प्रति सरोजनी का यह समर्पण दूसरों के लिए प्रेरणादायी है।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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