कर्नल सहित 20 जवान शहीद पर राजनीतिक दलों का बयान


कर्नल सहित 20 जवान शहीद पर राजनीतिक दलों का बयान

 

भारत और चीनी सैनिकों के बीच गलवन में हुए हिंसक झड़प में कर्नल सहित 20 जवान शहीद हो गए। जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया कि गलवन में जवानों का शहीद होना काफी परेशान करने वाला और कष्टदायक है। हमारे सैनिकों ने अपने कर्तव्य का पालन करते वक्त अनुकरणीय साहस का प्रदर्शन किया और अपने जीवन का बलिदान दे दिया। देश इनके बहादुरी और बलिदान को कभी नहीं भूलेगा. भारतीय सूत्रों के मुताबिक एलएसी पर झड़प में चीन के 43 सैनिकों की या तो मौत हुई या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हिंसक झड़प में चीनी यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर की मौत हुई है। सूत्रों ने कहा कि गलवां घाटी में झड़प में मारे गए चीनी सैनिकों में चीनी यूनिट का कमांडिंग ऑफिसर भी शामिल है।

 

सूत्रों ने कहा कि 15-16 जून की रात को हुई झड़प में चीन को भारी संख्या में नुकसान का सामना करना पड़ा है। जो सैनिक इस झड़प का हिस्सा थे उन्होंने चीनी हताहतों की संख्या के बारे में बताया। सूत्रों ने कहा, मारे गए और घायल दोनों हताहतों की सही संख्या बताना मुश्किल है लेकिन संख्या 40 से अधिक होने का अनुमान है. भारत और चीने के बीच लद्दाख में हुए इस हिंसक झड़प में भारतीय सेना के कर्नल संतोष बाबू भी शामिल हैं. कर्नल संतोष बाबू ने हिंसक झड़प से एक दिन पहले ही अपनी मां से फोन पर बात की थी. लद्धाख के गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिक के बीच हुए हिंसक झड़प को लेकर देश में गुस्से का माहौल है.

 

देश की जनता केंद्र की मोदी सरकार को करारा जवाब देने की मांग कर रही है. भारत और चीनी सैनिकों के बीच गलवन में हुए हिंसक झड़प को लेकर विपक्ष भी मोद सरकार को लगातार घेर रहा है. कांग्रेस के पूर्व अध्य़क्ष राहुल गांध ने इस मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि ‘प्रधानमंत्री मोदी चुप क्यों हैं? वे क्या छुपा रहे हैं? अब बहुत हो गया है। हम जानना चाहते हैं कि आखिर क्या हुआ। चीन की हिम्मत कैसे हुई हमारे सैनिकों को मारने की? उनकी हिम्मत कैसे हुई हमारी जमीन हथियाने की?’

 

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सीमा पर 20 सैनिक शहीद हो गए और सरकार चुप है। सरकार को देश के सामने स्वीकार कर लेना चाहिए कि चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया है। 20 जवान कैसे शहीद हो गए, मौजूदा स्थिति क्या है और सरकार की इससे निपटने की रणनीति क्या है?- 

 

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, सीमा पर जो हुआ उसके लिए हम जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी या राहुल गांधी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं। 20 जवानों की शहादत के लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। प्रधानमंत्री जो भी फैसला लेंगे उसका सभी पार्टियां समर्थन करेंगी। 

 

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिको के बीच हुए मामले को लेकर कहा कि हम अपने जवान खो रहे है. क्या हम चुप बैठे रहेंगे?’’  उन्होने आगे कहा, कि ‘‘भारत की जनता सच की हकदार है,. सामने आइए, नरेंद्र मोदी जी, चीन का सामना करने का वक्त आ गया है. गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच एलएसी पर हुए मामले को लेकर देशभर में चीन के प्रति नाराजगी है और देश की जनता इस मामले को लेकर चीन के करारा जवाब देने की मांग कर रही है. आज देश के कई हिस्सों में लोगों ने चीन के इस कायराना हरकत को लेकर चीन

 

लद्दाख सीमा पर जहां दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी, वहां चीनी हेलीकॉप्टरों की आवाजाही बढ़ गई है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि चीन को इस झड़प में खासा नुकसान हुआ है. समाचार एजेंसी एएनआइ ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि सोमवार शाम चीनी सैनिकों के साथ लद्दाख की गलवन घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद फिलहाल चार भारतीय सैनिकों की हालत गंभीर है।

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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