मजदूर दिवस पर सरकार की पहल, तेलंगाना से प्रवासियों को लेकर झारखंड चली स्पेशल ट्रेन


मजदूर दिवस पर सरकार की पहल, तेलंगाना से प्रवासियों को लेकर झारखंड चली स्पेशल ट्रेन

रेलवे ने लॉकडाउन शुरू होने के बाद से पहली बार शुक्रवार को किसी पैसेंजर ट्रेन को चलाई। यह स्पेश ट्रेन तेलंगाना के लिंगमपल्ली में फंसे 1,200 प्रवासियों को झारखंड के हटिया तक ले जाने के लिए रवाना की गई, जो रात करीब 11 बजे हटिया पहुंचेगी। यह स्पेशल ट्रेन है। अभी सिर्फ यही एक ट्रेन चलाई गई है बाकी जगहों पर ट्रेनें नहीं चल रही है।

 

रेलवे पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बिना केंद्र सरकार के निर्देश के ट्रेनों को चलाने का सवाल ही नहीं है। आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार ने बताया 24 बोगियों वाली यह ट्रेन शुक्रवार सुबह 4 बजकर 50 मिनट पर रवाना हुई। उन्होंने बताया कि यह प्रवासियों के लिए अब तक चलने वाली पहली ट्रेन है। संयोग से शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस भी है।

 

दो दिन पहले ही केंद्र ने राज्यों को दूसरे राज्यों में लॉकडाउन के दौरान फंसे अपने यहां के प्रवासियों को निकालने को हरी झंडी दी थी। हालांकि, प्रवासियों को सिर्फ बसों से ले जाने की इजाजत है लेकिन कई राज्य केंद्र से इसके लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग कर चुके हैं।

 

केंद्र की गाइडलाइंस के मुताबिक प्रवासियों को बसों से ही ले जाया जा सकता है। उन्हें बैठाने में भी सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखना है। महाराष्ट्र ने तो तय कर दिया है कि प्रवासियों को ले जाने वाली बसों में 30 से ज्यादा लोग नहीं बैठ सकते। इससे प्रति व्यक्ति लाने का खर्च भी बहुत ज्यादा होगा।

 

यही वजह है कि पंजाब, बिहार जैसे कई राज्यों ने केंद्र से प्रवासियों को लाने-ले जाने के लिए स्पेशल ट्रेनों को चलाने की मांग की है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर कहा है कि फंसे हुए मजदूर इतनी बड़ी संख्या में हैं कि उन्हें बसों के जरिए नहीं ले जाया जा सकता। उन्होंने इसके लिए ट्रेनों को चलाने की मांग की है।

 

इसी तरह बिहार के डेप्युटी सीएम सुशील मोदी ने भी ऐसी ही मांग की है। उन्होंने कहा, 'बड़ी संख्या में प्रवासी चेन्नै, बेंगलुरु और मुंबई जैसी जगहों पर हैं जो बहुत दूर हैं। बसों को वहां जाने और फिर वहां से लौटने में कम से कम 6 से 7 दिन लग सकते हैं। इसलिए इतने बड़े पैमाने पर लोगों को बसों से लाना व्यावहारिक नहीं है। इसमें एक महीने से ज्यादा वक्त लग जाएगा। बहरहाल अब देखना है कि अन्य जगहों के लिए ट्रेन चलाई जाती है या नहीं।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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