'विश्व एड्स डे' पर पढ़ें कुछ खास खबर


'विश्व एड्स डे' पर पढ़ें कुछ खास खबर

आज से लगभग 200 साल पहले इस दुनिया में मानवों में एड्स का नामोनिशान तक नही था। यह सिर्फ अफ्रीकी महादेश में पाए जाने वाले एक विशेष प्रजाति के बंदर में पाया जाता था। इसे कुदरत के अनमोल करिश्मा ही कहे कि उनके जीवन पर इसका कोई प्रभाव नही पडता था। ये बंदर सामान्य जीवन जी रहे थे।

 

ऐसी मान्यता है कि सबसे पहले एक अफ्रीकी युवती इस बंदर से अप्राकृतिक यौन संबंध स्थापित की और वह एड्स का शिकार हो गई, क्योंकि अफ्रीका में सेक्स कुछ खुला है, फिर उसने अन्य कईयों से यौन संबंध बनायी और कईयों ने कईयों से इस तरह एक चैन चला और अफ्रीका महादेश से शुरु हुआ. यह एड्स जैसी घातक बिमारी आज पूरी दुनिया को अपने आगोश में ले चुकी है।

 

आज पूरी दुनिया में लगभग 40 मिलियन के आसपास एच.आई.बी.पाँजिटीव है. इनमें से 25 मिलियन तो डिटेक्ट हो चुके हैं. जिसमें सिर्फ अमेरिका में ही 1 मिलियन इस रोग से प्रभावित हैं। हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्रसंघ की ताजा रिपोरट के अनुसार एच.आई.वी. से प्रतिदिन 6,800 लोग संक्रमित हो रहें हैं. तथा कम से कम 5,700 लोग एड्स के कारण मौत को गले लगा रहे है।

 

संयुक्त राष्ट्र संघ के 2017 के हिसाब से 36.9 मिलीयन ग्रसित थे. जिसमें 21.7 मिलीयन एंटी रेटेरोवायरल (ART) दवाई ले रहे है औऱ 2017 में ही 1.8 मिलीयन इसके शिकार हुए है। ताजा आकड़े  के अनुसार 39 मिलीयन ग्रस्त है. जिसमें 20 मिलीयन दवाई ले रहे है। भारत में 21 लाख के आसपास ग्रस्त है जिनमें 14 लाख पंजीकृत है।

 

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1997 में मार्गव स्टेट यूनिवर्सिटी में भाषण के दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने विषेषज्ञों एंव वैज्ञानिको से एड्स के लिए टीके बनाने को कहा था। वर्ष 2018 का थीम था अपनी स्थिति को जानों वही 2019 का थीम है टीकाकरण के प्रति जागरुकता। इसके लिए खासकर सेक्स वर्करों के लिए.

 

प्रेम पिल वोरल दवा बनी है जिसका असर 24 घंटे रहता है पर अभी इसको  डब्लू एच. ओ. ने इसे मान्यता नहीं दी है। पर हू ने एड़स जागरुकता गाइड लाइन जारी किया है। टेस्ट एंड ट्रीटमेंट यानी जांच कराओ औऱ पता चले तो दवाई तुरंत शुरु करो... नया नारा हू ने दिया है  कि एड्स अब डैथ सेंट्स अर्थात मृत्यु दंड नहीं रहा।

 

भारत में कुछ मशहूर रेड लाइट एरिया- मुम्बई, सोना गाछी (कोलकाता), बनारस, चतुर्भुज स्थान (मुज्जफरपुर), मेरठ एवं सहारनपुर आदि है। उनमें कुछ साल पहले तक तो सबसे ज्यादा सेक्स वर्कर मुम्बई में इस एड्स से प्रभावित थे पर आज एड्स से सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्स कर्मी लुधियाना(पंजाब) में है और राज्यों की बात करे तो सर्वाधिक महाराष्ट्र में है। इसके बाद दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश है।

 

इस विमारी के फैलने का मुख्य कारण (80-85 प्रतिशत) असुरक्षित यौन संबंध के कारण (तरल पदार्थ के रुप में बीर्य) ब्यभिचारियों, बेश्याओं, वेश्यागामियों एंव होमोसेक्सुअल है। इसके अलावे संक्रमित सुई के इस्तेमाल किसी अन्य के साथ करने, संक्रमित रक्त चढाने तथा बच्चों में मां के जन्म के समय 20 प्रतिशत का जोखिम और स्तनपान के समय 35 प्रतिशत का जोखिम रहता है एड्स के फैलने का।

 

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इस बीमारी के चपेट में आने पर एम्यूनी डिफेसियेंसी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कम हो जाती है। जिससे मानव काल के ग्रास की ओर बहुत तेजी से बढता है। और अपने साथी को भी इस चपेट मे ले लेता है। अतः जरुरी है कि अपने साथी से यौन संबंध बनाने के समय सुरक्षक्षित होने के लिए कंडोम का प्रयोग अवश्य करें। सन 1981 में इसके खोज के बाद अभी तक 30 करोड से ज्यादा लोग काल के गाल में पूरी दुनिया में समा चुके हैं।

 

इसके लक्षणों में मुख्य रुप से लगातार थकान, रात को पसीना आना, लगातार डायरिया, जीभ/मूँह पर सफेद धब्बे, सुखी खांसी, लगातार बुखार रहना आदी प्रमुख हैं। इस बीमारी को फैलने  में भारत के ग्रामिण  इलाके में गरीबी रेखा से नीचे, अशिक्षा, रुढीवादिता, महंगाई और बढती खाद्यानों के दामों के कारण पापी पेट के लिए इस कृत(पाप) को करने पर उतारु होना पडता है। इससे बचने के लिए सुरक्षा कवच के रुप में कंडोम का उपयोग एवं साथी के साथ ही यौन संबंध बनायें रखना ही सर्वोत्म उपाय है।

 

इसके साथ ही अपने शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने क  लिए आयुर्वेद पद्धति अपनाना चाहिये। जिसमें गेंहू के ज्वारे, गिलोय, तुलसी के पते, बेल के फल का रस अपना के इससे लड़ा जा सकता है। इसके साथ ही साथ ही कुछ शारीरिक ब्यायाम-साइकिल चलाना, तैराकी करना, पैदल चलना, एरोबिक करने से भी इसे कम करने में मदद मिलेगी। होमियोपैथी में भी एमयुनी बढ़ाने की कई दवाये है।

 

अमेरिका में इसके दवाई बनाने के लिए हुए कुछ परीक्षण में सफलता मिली है। बंदरो पर हुए टेस्ट में हमें कामयाबी मिली है। यह अच्छी बात है पर अभी भी इसके लिए जागरुकता की सख्त जरुरत है। इसी क्रम में आम जन को जागरुक करने के लिए 1988 से प्रतिवर्ष 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाते आ रहे हैं।

-लेखक बिहारी गुप्ता लाल

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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