सभी शॉपिंग सेंटर जरूरी और कठोर मानकों के साथ काम शुरू करने के लिए तैयार हैं - SCAI


सभी शॉपिंग सेंटर जरूरी और कठोर मानकों के साथ काम शुरू करने के लिए तैयार हैं - SCAI

शॉपिंग सेंटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एससीएआई) ने 3 मई तक प्रधानमंत्री द्वारा किए गए लॉकडाउन की घोषणा का स्वागत किया है, इस आश्वासन के साथ कि अर्थव्यवस्थाधीरे धीरे  खुलेगी। साथ ही, एससीएआई को उम्मीद है कि सरकार उद्योग को समर्थन देने और 12 मिलियन आजीविका की सुरक्षा के लिएविचार करेगी और हस्तक्षेप करेगी क्योंकि संगठित खुदरा का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

 

एससीएआई को उम्मीद है कि केंद्र सरकार केरल राज्य सरकार के कार्यों से ध्यान हटाएगी और शॉपिंग सेंटर को एक श्रेणीबद्ध तरीके से शामिल करने पर विचार करेगी, जिसमें सबसे पहले सूची के रूप में जो 20 अप्रैल के बाद खोलने की अनुमति होगी।

 

इसके अलावा पीएम के संबोधन में आज उल्लेख किया गया है कि लॉकडाउन 2.0 में 20 अप्रैल से व्यापक जांच के आधार पर लॉकडाउन की सशर्त वापसी उन क्षेत्रोंमें अनुमति दी जाएगी जो किसी हॉटस्पॉट में नहीं हैं या हॉटस्पॉट में बदलने की कम संभावना है। इसके अलावा “एससीएआई भारत में संगठित खुदरा व्यापार के अस्तित्व और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सरकार और वित्तीय संस्थानों से ठोस समर्थन की आवश्यकता की वकालत कर रहा है।

 

”एससीएआई के अध्यक्ष अमिताभ तनेजा ने कहा, हमें उम्मीद है कि लॉकडाउन से बाहर निकलने की विकेंद्रीकृत रणनीति हॉटस्पॉट मुक्त क्षेत्रों या उन क्षेत्रों से शुरू होने वाले शॉपिंग सेंटरों को फिर से खोलने की दिशा में दृढ़ दिशा-निर्देश देगी जहां महामारी को फैलने से रोका गया, ताकि इन आजीविकाओं के भाग्य की रक्षा की जा सके।

 

आगे, इस विचार का समर्थन करने के लिए, हमने यह सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत व्यवस्था की है कि देश भर में प्रत्येक शॉपिंग सेंटर सभी के लिए सबसे सुरक्षित जगह है। देश भर में फैले कोरोना वायरय से जारी जंग में शॉपिंग सेंटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एससीएआई) भी अपना अहम योगदान दे रहा है। बुरे दौर से गुजर रहे देश भर के शॉपिंग सेंटरों की मदद में एससीएआई कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।

 

ये हैं एससीएआई के अहम योगदान-

  • नियंत्रित प्रवेश और निकास
  • सभी आने वालों कर्मचारियों की कॉन्टेक्टलेस इंफ्रारेड गन से स्क्रीनिंग
  • ग्राहकों और कर्मचारियों के लिए मास्क बनाना
  • ग्राहकों की संख्या पर सीमा
  • दुकानों / फूड कोर्ट्स के अंदर ग्राहकों की सोशल डिस्टेंसिंग
  • मॉल और दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या पर नियंत्रण
  • सैनिटाइजेशन
  • संदिग्ध मामलों को तत्काल अलग करने के लिए इमरजेंसी रूम
  • एयर क्वालिटी की नियमित जांच।
  • दुकानों के खुलने-बंद होने के समय पर पैनी नजर
  • कोई इवेंट नहीं, ओपेन स्पेस में कोई बिक्री नहीं और ना ही कोई लाइव परफार्मेंस

 

वहीं सभी मानकों के सख्त पालन के कारण है कि कोच्चि में एक एससीएआई सदस्य मॉल ने राज्य सरकार का विश्वास हासिल किया और हाइपरमार्केट, रेस्तरां, फार्मेसियों के साथ सेवाएं फिर से शुरू कीं, लॉकडाउन के दौरान अनिवार्य 7 से 5 बजे तक उसे संचालित करने की अनुमति दी गई है, जबकि रेस्तरां से टेकवे या डिलीवरी को रात 8 बजे तक संचालित करने की अनुमति है। केरल सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, किताबें, स्टेशनरी और आईवियर बेचने वाली दुकानों को फिरसे खोलने की दिशा में एक क्रमबद्ध दृष्टिकोण अपना रही है।

 

श्री तनेजा ने कहा, “लॉकडाउन लागू होने से पहले ही देश भर के शॉपिंग सेंटरों ने कोविड-19 से लड़ने के लिए कई ठोस कदम उठाए। इनमें आवश्यक सावधानियोंपर स्टाफ ब्रीफिंग और प्रशिक्षण शामिल थे। मॉल में प्रवेश करने वाले ग्राहकों की सामाजिक दूरी और कतार, नियमित रूप से सफाई और ग्राहक स्पर्श बिंदुओं कीसफाई, इन्फ्रारेड थर्मामीटर का उपयोग कर स्क्रीनिंग स्टाफ, मॉल के अंदर विभिन्न स्थानों पर सैनिटाइजर और एलीवेटर्स और एस्केलेटर की व्यवस्था की गई।

 

इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान, मॉल के अंदर कुछ कदम उठाए गए हैं, जिसमें एयर कंडीशनिंग, एयर फिल्टर का निरीक्षण और सफाई के साथ सभी उपकरणोंका सही रखरखाव व ताजगी बनाए रखने के लिए बार किट नियंत्रण छिड़काव किया जा रहा है।

 

इसके अलावा पूर्ण लॉकडाउन ने संगठित खुदरा को भारत में संगठित खुदरा क्षेत्र में भारी तनाव दिया है। कुल राजस्व का 85 प्रतिषत हिस्सा किराये से माना जाता है, पूर्ण लॉकडाउन के मद्देनजर सेंटरों के बंद होने के कारण राजस्व शून्य हो गया है, जब तक वे कार्मिक वेतन, उपयोगिता और चल रहे नियमित खर्चों के लिए एकउच्च निश्चित लागत वहन करना जारी रखते हैं। इसके अलावा, उनकी ऋण सेवा और ब्याज भुगतान की बाध्यता बनी हुई है।

 

एससीएआई गैर-लाभकारी संगठन है, जो भारत में शॉपिंग सेंटर मॉल के विकास को संलग्न करने और प्रोत्साहित की दृष्टि के साथ स्थापित किया गया है। भारतीय शॉपिंग सेंटर उद्योग के विकास में अग्रणी की भूमिका निभाना, इसे बड़े समाज और अर्थव्यवस्था में विलय करने में मदद करना और विभिन्न राष्ट्रीयऔर अंतर्राष्ट्रीय मंचों में शॉपिंग सेंटर उद्योग का  प्रतिनिधित्व करना।   

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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