जस्टिस शरद अरविंद बोबडे बने 47वें प्रधान न्यायाधीश, जाने कौन हैं अरविंद बोबडे


जस्टिस शरद अरविंद बोबडे बने 47वें प्रधान न्यायाधीश, जाने कौन हैं अरविंद बोबडे

आज जस्टिस शरद अरविंद बोबडे देश के 47वें मुख्य न्यायाधीश  के रूप में शपथ ले ली है. जहां उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. बता दें कि जस्टिस बोबडे जस्टिस रंजन गोगोई की जगह देश के नए सीजेआई होंगे. शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई वरिष्ठ मंत्री के अलावा पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी और पूर्व PM मनमोहन सिंह भी इस दौरान उपस्थित रहे.

 

आपको बता दें कि 24 अप्रैल 1956 को नागपुर में जन्मे न्यायमूर्ति बोबडे के पिता अरविंद श्रीनिवास बोबडे भी मशहूर वकील थे. बोबडे के अलावा उनके भाई भी एक वरिष्ठ वकील थे. जस्टिस बोबड़े ने 1978 में नागपुर विश्वविद्यालय से LLB की डिग्री हासिल करने के बाद काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र में नामांकन दर्ज किया. इसके बाद उन्होंने 21 साल तक बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में प्रैक्टिस की और सुप्रीम कोर्ट में भी पेश हुए.

 

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जहां उन्हें 1998 में वरिष्ठ वकील के रूप में नामित किया गया और बाद में मार्च 2000 में बॉम्बे उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था. इसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे बोबडे को अप्रैल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया. बता दें कि इस बार जस्टिस बोबड़े अयोध्या भूमि विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के हिस्सा थे. 

 

जस्टिस बोबडे उस तीन जजों वाली पीठ का हिस्सा थे, जिसने 2015 में स्पष्ट किया कि आधार कार्ड के बिना भारत के किसी भी नागरिक को बुनियादी सेवाओं और सरकारी सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है. इसके इलावा जब सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान पीठ ने अगस्त 2017 में निजता के अधिकार को भारत में संवैधानिक रूप से संरक्षित मूल अधिकार होने का फैसला दिया तो जस्टिस बोबडे भी इसका हिस्सा थे.

 

इसके अलवा हाल ही में न्यायमूर्ति बोबडे की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का प्रशासन देखने के लिए पूर्व नियंत्रक एवं महालेखाकार विनोद राय की अध्यक्षता में बनाई गई प्रशासकों की समिति को निर्देश दिया कि वे निर्वाचित सदस्यों के लिए कार्यभार छोड़ें. गौरतलब है कि, न्यायमूर्ति बोबडे 17 महीने तक उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पद पर रहेंगे और 23 अप्रैल 2021 को सेवानिवृत्त होंगे.

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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