रमजान का सबसे अहम दिन शब-ए-कद्र, जहां दुआ होती है कबूल


रमजान का सबसे अहम दिन शब-ए-कद्र, जहां दुआ होती है कबूल

कोरोना और लॉकडाउन में मुसलमानों का पवित्र महीना अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर है 29 या 30 रोजा के बाद ईद की नमाज अदा कर रमजान को एक वर्ष के लिए अलविदा किया जाता है यह माह मुसलमानों के लिए सबसे अहम है. जहां इस क्रम में रमजान के पाक महीने का आखिरा अशरा शुरू हो गया है. मुसलमानों के लिए रमजान का ये आखिरी अशरा अल्लाह पाक के और भी करीब पहुंचने का है. रमजान के 21 वें रोजे से मुसलमान उस पाक रात की तलाश में जुट जाते हैं, जिस रात को कुरान नाजिल हुआ था.

 

इस रात मुस्लिम समुदाय के लोग पूरी रात जाग कर अल्लाह पाक की इबादत करते हैं. अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और अल्लाह की बारगाह में दुआएं तलब करते हैं. आखिरी नबी मोहम्मद सल्लाहो अलैहे वसल्लम लैलातुल कद्र पर अल्लाह की पूरी रात इबादत करते थे और नमाज की पाबंदी रखते थे. जिस रात को कुरान नाजिल हुआ, उस रात को शब-ए-कद्र कहते हैं.

 

बता दें कि, लैलातुल कद्र-रमजान के आखिरी अशरे में अल्लाह ताला ने लेलातुल कद्र को इन पांच रातों में छुपाया हुआ है, जो रमजान के महीने की आखिरी दस रातों में से एक है. ये वो रात है, जो रामजान के 21वे, 23 वे 25 वे, 27 वे और 29 वे रोजे की रात में किसी एक दिन होती है. लैलातुल कद्र की इन पांच रातों में से मुस्लमान 27 वे रोजे की राज को कसरत से इबादत करते हैं और खुदा से दुआ तलब करते हैं.

 

दरअसल, लैलातुल कद्र की रात में की गई इबादत को कुरान में एक हजार रातों तक की गई इबादत के बराबर बताया गया है. इस रात को कई नामों से पुकारा जाता है. गुनाहों से तौबा करने की रात, मगफिरत की रात और इबादत की रात है, जब खुदा ने कुरान नाजिल किया. इस दौरान एक नेकी के बदले 70 नेकीयां लिखी जाती है. गौरतलब है कि, रमाजान के आखीर ईद की नमाज अदा की जाती है जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोगों गरिबों को दिल खोल कर दान देते हैं. ईद के दिन सभी लोग आपस में एक दुसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं.

-मुस्तकीम अंसारी

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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