पृथ्वीराज चौहान के बयान से संत समाज में आक्रोश, सोनिया गांधी से अपनी संपत्ति दान करने की मांग की


पृथ्वीराज चौहान के बयान से संत समाज में आक्रोश, सोनिया गांधी से अपनी संपत्ति दान करने की मांग की

कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान के मंदिरों से सोना जब्त करने के बयान से संत समाज आगबबूला है संतो ने कांग्रेस को देशविरोधी पार्टी बताते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास लूटपाट से भरा हुआ है संतो ने कांग्रेस पर वार करते हुए सोनिया गांधी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि सोनिया को अपनी पूरी संपत्ति कोरोना संकट से निपटने के लिए दान कर देनी चाहिए अगर सोनिया गांधी अपनी संपत्ति दान करती है तो संत समाज भी अपनी संपत्ति दान कर देगा  इस तरह के बयान की संत समाज ने पुरजोर निंदा करते हुए पृथ्वीराज चौहान से माफी भी मांगने की मांग की है -पृथ्वीराज चौहान के बयान के बाद संत समाज आक्रोशित है जूना अखाड़े के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद गिरि का कहना है कि कांग्रेस पार्टी देश विरोधी पार्टी ना यह देश की सोचते हैं कांग्रेस के नेता कुछ भी बोल देते हैं मैं कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी को चुनौती देता हूं मैं अपनी संपत्ति देश के लिए दान करता हूं और गंगा किनारे झोपड़ी में बैठकर भजन करूंगा मगर सोनिया गांधी भी आगे आए और अपनी सारी संपत्ति देश के नाम करे और इसी के साथ सभी कांग्रेस के लोग भी आगे आए और अपनी संपत्ति दान करें इसके बाद सभी संत अपनी संपत्ति दान कर देखें और पृथ्वीराज चौहान को अपना नाम बदलकर जयचंद्र नाम रख लेना चाहिए सोनिया गांधी आगे नहीं आती तो फिर पृथ्वीराज चौहान आगे आए और अपनी संपत्ति दान करें

-बड़े अखाड़े के महामंडलेश्वर हरीश चेतनानंद महाराज का कहना है किपृथ्वीराज चौहान ने अगर इस तरह का बयान दिया है तो संत समाज इसकी निंदा करता है इस तरह का बयान उनको देने का अधिकार किसने दिया इस तरह के बयान से लगता है इनकी नजर मंदिरों पर ही है इन्होंने मंदिरों के सोने की ही बात क्यों की अन्य धर्म के भी पूजा स्थल है इसकी चर्चा ना करके उन्होंने सिर्फ हिंदू मंदिरों की चर्चा की है इस तरह का बयान बहुत ही अशोभनीय हैं संत समाज इस तरह के बयानों की निंदा करता कोरोना में सबसे आगे मठ मंदिर ही आगे आए हैं राष्ट्र की सेवा के लिए पृथ्वीराज चौहान का यह कहना कि मठ मंदिरों में जितना सोना है उसको ले लेना चाहिए इस तरह के बयान देश को तोड़ने वाले हैं पृथ्वीराज चौहान को माफी मांगनी चाहिए

वहीं वरिष्ठ संत वेधानन्द महाराज का कहना है कि कांग्रेस पार्टी का काम ही ऐसा और हर बार इनकेेेे नेता ऐसे ही बोलते है मठ मंदिर तो पहले से ही सेवा का कार्य करते आ रहे हैं जब भी देश पर संकट आया है मठ मंदिरों ने ही सहयोग किया है चाहे तो इतिहास उठाकर देख ले इन लोगों को मठ मंदिरों के बारे में नहीं पता मठ मंदिरों के पास जो संपत्ति होती है वह देश के लिए ही होती है अशोक चौहान जैसे बहुत बोलने वाले हैं उनको बोलने दिया जाए इससे मठ मंदिरों और साधु-संतों को कोई फर्क नहीं पड़ता मगर हम उनके इस बयान की निंदा करते हैं इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि कांग्रेस पार्टी के नेता ही देश को लूटते आए हैं पहले तो इस पैसे को समाज की सेवा में लगाना चाहिए रॉबर्ट वाड्रा के पास इतनी संपत्ति है उसको देश के कार्य में लगाए उसके बाद मठ मंदिरों पर नजर रखें

पृथ्वीराज चौहान के बयान के बाद संत समाज में उबाल आ गया है और संत समाज ने कांग्रेस के साथ-साथ कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी आड़े हाथों लेते हुए उनसे अपनी संपत्ति दान करने की मांग की है और साथ ही इस तरह के बयान की संत समाज ने  पुरजोर निंदा करते हुए पृथ्वीराज चौहान से माफी भी मांगने की मांग की है

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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