रिसर्च: पांच में से चार मजदूर ऐसे हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी नसीब नहीं


कोरोना और लॉकडाउन के बीच सबसे कठिन जीवन उनका है जिनके पास दो वक्त की रोटी जुटाने का कोई सहारा नहीं है. दुनिया में हर 5 में 4 मजदूर प्रभावित हैं. ऐसे परिवारों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है जो पहले से ज्यादा अब भुखमरी की कगार पर हैं. लॉकडाउन के चलते कुछ काम करने की स्थिति नहीं हैं जिससे कारण बेरोजगारी का आलम बढ़ता जा रहा है.

 

इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, दुनियाभर के कामगारों में पांच में से चार मजदूर लॉकडाउन में काम बंद होने के चलते प्रभावित हैं. ऐसे लोगों का कुल आंकड़ा करीब 330 करोड़ है. वहीं दूसरी तरफ 106 करोड़ कामगारों को इस बात का चिंता है कि उनका रोजी रोटी का साधन पूरी तरह तबाह हो जाएगा.

 

अर्जेंटीना में हालात पहले से ही खराब हैं. 4 करोड़ 40 लाख की आबादी में एक तिहाई लोग गरीबी में जी रहे हैं. महामारी से पहले 80 लाख लोग खाने की मदद मांग रहे थे, अब इसमें 30 लाख लोग और जुड़ गए हैं.

 

दूसरी तरफ मिस्र में भी हालात खराब हो चुके हैं. देश की आधिकारिक स्टेटिस्टिक्स एजेंसी के मुताबिक राजधानी काहिरा में 2 करोड़ लोग प्रभावित हैं क्योंकि उनका रोजगार बंद हो चुका है और नौकरियां जा चुकी हैं और लोग वापस अपने घरों की ओर लौट रहे हैं. महामारी में कोई किसी से काम कराने को तैयार नहीं है.

 

मिस्र में करीब रोजाना करीब 100 रुपये में गुजारा करने को मजबूर हैं. छह फीसदी लोग अत्यंत गरीबी में जी रहे हैं. सरकार ने राहत के लिए हर महीने 2200 रुपये आर्थिक मदद देने की बात भी कही है जिससे अत्यंत गरीब लोगों के जीवन को बचाया जा सके.

 

भारतीय अर्थव्यवस्था पर नज़र रखने वाली संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी ने अपने ताज़ा आंकलन में दावा किया है कि 3 मई को ख़त्म होने वाले पिछले हफ्ते के दौरान बेरोज़गारी दर बढ़कर 27.1 % पहुंच गयी.

 

ये अब तक की सबसे ऊंची बेरोज़गारी दर है. 2019-20 के दौरान कुल औसत रोज़गार 40.4 करोड़ था जो अप्रैल 2020 में 30% गिरकर 28.2 करोड़ रह गया यानी 12.2 करोड़ रोज़गार घट गया.

 

गौरतलब है कि लॉकडाऊन की सबसे ज्यादा मार छोटे व्यापारियों और दिहाड़ी मज़दूरों पर पड़ी है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है 2019-20 में छोटे व्यापारियों और दिहाड़ी मज़दूरों में औसतन 12.8 करोड़ के पास रोज़गार था. अप्रैल 2020 में ये गिरकर सिर्फ 3.7 करोड़ तक सीमित रह गया यानी लॉकडाऊन के दौरान अप्रैल में 9.1 करोड़ का रोज़गार छिन गया.

-मुस्तकीम अंसारी

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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