राशन माफियों ने गरीबों के निवाले पर डाला डाका


राशन माफियों ने गरीबों के निवाले पर डाला डाका

कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण पूरे देश में 24 मार्च से 14 अप्रैल तक 21 दिनों का लॉकडाउन हुआ फिर यह लॉकडाउन को 14 अप्रैल को 3 मई तक बढ़ा दिया क्योंकि कोरोना वायरस की चपेट में भारत आ चुका था. कोरोना के बढ़ते मामले को देख प्रधानमंत्री नरेंद मोदी द्वारा दूसरा कदम उठाया जाना जरूरी था. इसकी वजह कुछ और नही बल्कि दुनियाभर के सैकड़ो देश में बढ़ते मामले और लोगो की मौत थी.

 

अगर हम बात करें उत्तर प्रदेश की तो प्रदेश भर में सैकड़ो लोग इस वॉयरस से संक्रमित है. लॉकडाउन के कारण गरीबों मजदूरों को कोई हैरानी परेशानी न हो, भूख से मौत न हो इसके लिए सरकार द्वारा अतिरिक्त व फ्री राशन वितरण कराया जा रहा है जिससे गरीबों के चूल्हे ढंडे न पड़ें. इस संकट के समय दो वक्त की रोटी लोगो को मिले सरकार इस प्रयास में है. लेकिन राशन माफिया इस महमारी में सरकार के मंसुबो पर पानी फेरने से बाज नही आ रहे.

 

ये माफिया दसको सें इस कारोबार पर अपना पैर जमा चुके हैं जो ये लोग विभागिय मिली भगत से गरीबो के हक पर सीधे डाका डाल रहे हैं जिनको कही न कही विभागीय उच्चधिकारियों का संरक्षण प्राप्त हैं जो गरीबो के निवालें को अपना हक समझतें और इस खेल में हुई कमाई अपने आकाओ तक पहुचाते जब कभी आवाज भी उठती इनके खिलाफ तो साफ तौर से कार्यवाही से बच निकलतें. क्या है यह पूरे गरीबो के हक पर डाका डालने का खेल देखते कुशीनगर इस खास रिपोर्ट को।

 

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से ऐसा एक मामला सामने आया है जहां कालाबाजारी के लिए ले जाये जा रहे खाद्यान्न को कप्तानगंज के एसडीएम अरविंद कुमार के द्वारा एक मुखबिर की सूचना पर पकड़ा गया. बीती रात के 8:20 मिनट पर एसडीएम अचानक सार्वजनिक वितरण प्रणाली परिवहन ठेकेदार के निजी गोदाम पर छापा मारते है. छापा पड़ते ही विभागों में हड़कंप मच जाता है, हड़कंप मचे भी क्यों न क्योंकि मामला सरकारी अनाज लदे दो ट्रकों का जो था जो चला तो गरीबो में बांटने के लिए लेकिन पहुँचा बेचौलीयो के पास.

 

यह सोचने वाली बात भी है कि मुख्य एफसीआई गोदाम अर्जुनहा से जब 6 ट्रक सरकारी राशन लेकर निकलते है उनमें दो ट्रक एक निजी परिवहन ठेकेदार के गोदाम पर पहुचता है यानी कि ठेकेदार का रसूख इतना कि इस महामारी में भी गरीबो के हक पर डाका डाल जाए तो सवाल शासन प्रसासन से यह कहना जरूर बनता है कि योगी जी आखिर गरीबो को राशन पर यू डाका कर कालाबाज़री की भेंट चढ़ना सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है कि फिर आखिर क्या सख्ती सरकार कागज़ों में जारी करता है.

 

फिलहाल कहना यह भी गलत नही की यह सब अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा है. वरना डिप्टी एआरएमो को इसकी भनक क्यों न लगी आखिर कप्तानगंज एसडीएम के द्वारा इस गोरखधंधे का उजागर होना किस तरफ इशारा करता है. आखिर सरकारी FCI गोदाम से दो ट्रक गेहूं का निकलना फिर रूट से हट कर ठेकेदार के निजी गोदाम पर चोरी से पहुँचना क्या है.

 

खैर इस मामले में एसडीएम द्वारा मौके से पकड़े गए ट्रक को रामकोला पुलिस को सौप दिया गया तो वही दूसरी तरफ एसडीएम द्वारा पाँच आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है. वही एसडीएम के द्वारा दोषियों के विरुद्ध आवश्यक बस्तु अधिनियम के तहत सरकारी राशन के कालाबाजारी का FIR दर्ज भी कराया गया है. अब देखना यह हैं यह कार्यवाही की जद में आयें जिम्मेदारो पर कब तक कार्यवाही होती हैं या हर बार की तरह सातिर माफिया इस कार्यवाही सें बच निकलता यह पुरा मामला एक बार फिर सरकारी सिस्सटम पर सवाल खड़ा करता 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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