इस वर्ष रमजान का रोजा 15 घंटे, रब लेगा बंदे से इम्तिहान


 

कोरोना और लॉकडाउन के बीच शुरू हो रहे रमजान में इस बार रोजेदारों का रब सख्त इम्तिहान लेगा. इस वर्ष रोजा मुस्लिमों को करीब 15 घंटे यानि 900 मिनट रखने होंगे. अगर 23 अप्रैल को चांद दिखा तो पहला रोजा 24 अप्रैल को होगा. अगर 24 को चांद दिखा तो 25 अप्रैल को पहला रोजा 15 घंटे 22 मिनट यानि कुल 922 मिनट रखना होगा.

 

पहला रोजा रखने के लिए सुबह सेहरी 3.55 बजे करनी होगी. जबकि इफ्तार शाम छह बजकर 33 मिनट पर करने के बाद रोजा खोला जाएगा. इसी तरह आखिरी रोजे की सहरी का समय भोर में तीन बजकर 29 मिनट और इफ्तार शाम को छह बजकर 48 मिनट पर होगा.

 

कैलेंडर के मुताबिक रमजान के हर दूसरे और तीसरे दिन समय में परिवर्तन रहेगा. शुरू के रोजे जहां कुछ लंबे होंगे. वहीं 15वां रोजा सबसे छोटा महज 15 घंटे का होगा. अगर 24 अप्रैल से रमजान शुरू हुआ, तो पहले रोजे में सहरी का आखिरी वक्त सुबह 3.56 बजे व इफ्तार का वक्त शाम 6.32 बजे रहेगा.

 

गालिबपुरा निवासी हाफिज मोहम्मद नजीर के मुताबीक 36 साल बाद रमजान पुन: उसी मौसम में पहुंच जाता है. इस्लामी कैलेंडर और अंग्रेजी कैलेंडर में एक साल में 10 दिन का अंतर आता है. ये अंतर इसलिए आता है कि इस्लामी कैलेंडर में 29-30 दिन का महीना होता है, वहीं अंग्रेजी कैलेंडर में 30-31 दिन का महीना होता है.

 

रमजान दुनिया भर में मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र महीना है. रमजान के पूरे महीने (29 या 30 दिन) तक मुस्लिम समुदाय के लोग रोजे रखते हैं, कुरान पढ़ते हैं. हर दिन की नमाज के अलावा रमजान में रात के वक्त एक विशेष नमाज भी पढ़ी जाती है, जिसे तरावीह कहते हैं.

 

मुस्लिम समुदाय के लोग साल भर रमजान का बेसब्री से इंतजार करते हैं. रमजान के दौरान मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक खाने या पीने से परहेज करते हैं. दिन का समापन तरावीह के साथ होता है.

 

बता दें कि देश विदेश में कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर किसी भी धार्मिक जगहो पर जाने या भीड़ जुटाने से मना की गई है. पिछले महीने, सऊदी अरब ने कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए लोगों को मस्जिदों के अंदर प्रार्थना करने से रोक दिया था. सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती शेख अब्दुल अजीज अल-शेख ने लोगों को घर से रमजान के दौरान तरावीह और बाद में ईद की नमाज अदा करने के लिए कहा था ताकि कोरोना को फैलने से रोका जा सके.

 

लखनऊ ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा है रमजान के पाक महीने में सोशल डिस्टेंस को कायम रखने हुए. देश के गरीबों को ख्याल रखते हुए घर से नमाज अदा कर और कोरोना से मुक्ति के लिए दुआ करें. इफ्तारी की रकम से गरीबों को मजलूमों को भोजन कराएं.  

 

-मुस्तकीम अंसारी

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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