जानें रेल मंत्री पियूष गोयल की जीवनी


जानें रेल मंत्री पियूष गोयल की जीवनी

भारतीय राजनीति के प्रखर, साफ़ छवि और वरिष्ठ नेता में से एक पियूष गोयल को उनकी बुद्धिमता और कुशल कार्य के लिए पूरी दुनिया जानती है। पेशे से वकील और चार्टेड एकाउंटेड रहने वाले पियूष गोयल एक कुशल राजनेता भी है। वर्तमान में गोयल भारत के रेल एवं कोयला मंत्री है। आज हम आपको इनकी जीवनी बताने जा रहे हैं। 

 

पियूष गोयल का जन्म 13 जून 1964 ई को महाराष्ट्र राज्य के मुंबई में हुआ था। इनके पिता स्वर्गीय वेद प्रकाश गोयल पेशे से एक राजनेता थे, इनकी माता चंद्रकांत गोयल भी राजनीति से थी। जहां पिता बीजेपी पार्टी में केशियर थे तो माता विधान परिषद की सदस्य थी। गोयल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के डॉन बोस्को हाई स्कूल से पूरी की।

 

इसके बाद उन्होंने जय हिन्द कॉलेज, मुंबई से पढाई की। फिर कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स, मुंबई से की। वहीं लॉ की पढ़ाई सरकारी लॉ कॉलेज, मुंबई से की। जबकि चार्टेड एकांटेंड की पढाई इंस्टिट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली से पूरी की। गोयल बचपन से ही प्रतिभाववान रहे हैं और चार्टर्ड अकाउंटेंट के एग्जाम में इन्होने पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। 

 

इन्होंने अपने करियर की शुरुआत पिता की तरह बैंक से की और जाति से बनिया परिवार के रहने वाले पियूष ने कम समय में ही अपनी पहचान बना ली। इसके बाद पिता की तरह स्वंय १९८४ में बीजेपी ज्वाइन कर ली और अपनी सेवा बीजेपी को देने लगे। अपनी कार्यकुशलता के कारण काफी कम समय ही इहें कई पद मिले। 

 

जब 1991 के आम चुनाव में गोयल को बड़ी जिम्मेवारी दी गयी। इस चुनाव में उन्हें बीजेपी प्रचार प्रसार की जिम्मेवारी दी गयी। इस जिम्मेवारी में वे खड़े उतरे। इसके बाद उनकी पकड़ राजनीति में मजबूत हुई और उन्होंने बीजेपी में अपने नाम से पहचान बनी।

 

 

पियूष गोयल की कुछ उपलब्धि 

*गोयल  2002 से 2004 तक टास्क फ़ोर्स ऑफ़ इंटर लिंकिंग ऑफ रिवर्स के सदस्य चुने गए। 

*गोयल को 2010 में बीजेपी का नेशनल ट्रैज़रर बनाया गया

 

ये 2010 में राज्य सभा उम्मीदवार थे लेकिन इन्हें विजय श्री प्राप्त नहीं हुई। फिर दूसरी बार 2012 में ये राज्य सभा उम्मीदवार बने और इस बार उन्हें विजय श्री प्राप्त हुआ। इसी वर्ष इन्हें प्रोविजन ऑफ़ कंप्यूटर कमिटी का सदस्य बनाया गया। 

 

इसके बाद इन्होंने सोशल मीडिया पर अपना पूरा ध्यान दिया और जब 2014 में लोक सभा चुनाव का समय आया तो इन्होने ही नरेंद्र मोदी को पीएम पद के लिए प्रोजेक्ट किया। जिसे सर्वसम्मति से मान लिया गया था। पियूष गोयल की इस भविष्यवाणी से बीजेपी की रुपरेखा बदल गई और बीजेपी ने पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाई। इस सरकार में गोयल को बिजली, कोयला और नई और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री भी बनाने का फैशला किया गया। इसके बाद 2017 में गोयल को रेल मंत्री की भी जिम्मेवारी दी गयी। 

 

गोयल ने पहले कार्यकाल को पूरा किया और मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी गोयल को रेल मंत्री सहित कोयला और नई और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री की जिम्मेवारी सौंपा गया। देश को पियूष गोयल से बड़ी उम्मीद है और गोयल उनकी उम्मीदों पर खड़ा उतरने की कोशिश में हैं।

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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