प्रधानमंत्री किसी बड़े तांत्रिक के प्रभाव में हैं : सांसद डॉक्टर


प्रधानमंत्री किसी बड़े तांत्रिक के प्रभाव में हैं : सांसद डॉक्टर

 

कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश मे 21 का लॉक डाउन लागू किया है, प्रधानमंत्री ने लॉक डाउन के दौरान 5 अप्रेल की रात 9 बजे 9 मिनट के लिये अपने घरों की लाइट बंद कर, मोमबत्ती, चिराग़, दिया, लालटेन, टोर्च सहित मोबाईल फोन की फ्लैश लाइट ऑन रखने के बयान पर मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद डॉक्टर एस टी हसन ने प्रधानमंत्री किसी बड़े तांत्रिक के प्रभाव में हैं।

 

उन्होंने कहा की, "देखिए आपको याद होगा प्रधानमंत्री जी ने पहले भी थाली ताली बजाने की बात कही थी, अब उन्होंने यह बात कही है लोग अपने घरों की लाइट 9 मिनट के लिए बंद कर दे और मोमबत्ती टॉर्च वगैरह जलाएं, मैं समझता हूं 21वीं सदी में एक प्रधानमंत्री को इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए यह शोभनीय नहीं है, हमें ऐसा लगता है या तो प्रधानमंत्री जी पुरे जनता को प्राइमरी क्लास के बच्चे समझ रहे हैं, कि उनका दिमाग डायवर्ट करने के लिए बाकी खेल खिलौनों में लगा रहे हैं, या फिर किसी बहुत बड़े तांत्रिक के प्रभाव में प्रधानमंत्री जी हैं, शायद वह समझते हैं इस तंत्र क्रिया से कोरोना भाग जाएगा, मैं नहीं समझता कि कोई टॉर्च से कोरोना पर कोई असर पड़ेगा,

 

क्या टॉर्च लेकर देखने से कोरोना डर के भाग जाएगा, टॉर्च लेकर कोई आ गया है मुझे मारने के लिए, यह इसका पर पस क्या है यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है, लोग इस वक्त परेशान हैं, देश पर मुश्किल घड़ी का वक्त है, इस वक्त हौसला देना जरूरी है, जनता को हौसला देना जरूरी है और जनता को एजुकेट करना जरूरी है, इसकी अहमियत को बताना जरूरी है, इससे मरने वालों का आंकड़ा बताना जरूरी है, आज दुनिया के अंदर 1000 से 1500 लोग रोज मर रहे हैं, डेवलप कंट्री ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं, बेहतर होता अगर यह कहते सब लोग 9:00 बजे अपने तरीके से इबादत करें, पूजा करें, उस परवरदिगार को जिसने हम सब को पैदा किया है, उस पालनहार को ईश्वर को, उस अल्लाह को याद करें और उससे दुआ करें वह ऐसी बीमारी से बचाए रखें।"

 

सपा संसद ने गाज़ियाबाद में जमात के लोगो पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराई गई FIR पर जमात वालो का बचाव करते हुये कहा, "देखिए यह बात हमारी समझ में नहीं आती है, जमात के लोग बड़े नेक इंसान होते हैं, हम यह कह रहे हैं कि मामूली से मामूली घटना की सीसीटीवी फुटेज सामने आते हैं, मोबाइल से फुटेज होते हैं, मामूली से मामूली घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज होतें हैं, क्या इतनी बड़ी घटना का कोई फुटेज है किसी के पास, क्या अस्पतालों के अंदर सीसीटीवी नहीं लगे हुए हैं, उसको लाकर मंज़र ए आम पर लाया जाए, इस तरह से एक फ़िरक़े को एक समाज को बदनाम करने की साजिश को इस घड़ी में बंद होना चाहिए हर हालत में बंद होना चाहिए।"

 

सपा संसद ने लॉक डाउन पर कहा कि सरकार ने, देखिए पूरे विपक्ष ने इस बात को कहा था, राहुल गांधी जी ने तो ट्वीट करके कहा था लॉक डाउन करें, बहुत एहतियात करें उसके बाद भी 15 लाख लोग जहाजों से हिंदुस्तान में आ गए, उनका क्यों नहीं उनका टेस्ट हुआ, वो जहाजों के सफर करने वालों ने आज रिक्शा पर चलने वालों का जीना हराम कर दिया है, वो गलती किसकी है, उसी वक्त लॉक डाउन होना चाहिए था अगर विपक्ष ने कहा तो विपक्ष की कोई बात आज तक पार्लियामेंट में मानी नहीं गई है, विपक्ष सही कहे गलत कहे कुछ नहीं माना जाता है, अगर विपक्ष ने कहा था राहुल गांधी जी ने कहा था तो उसको मान लेना चाहिए था, लॉक डाउन और पहले लागू हो जाना चाहिए था हम लोगों ने भी कहा था।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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