पेटलावद- गरीबी के चलते युवक बना बैल


पेटलावद- गरीबी के चलते युवक बना बैल

देश मे भले ही सरकार गरीब परिवारों के लिए हर संभव मदद करने व योजनाओं का लाभ देने का दावा कर रही हो, किंतु जमीनी हकीकत तो कुछ और ही है। सरकार की बड़ी-बड़ी जनकल्याणकारी योजनाए आज भी MP के झाबुआ जिले में कागजो तक ही सिमीत है। यंहा गरीब परिवार आज भी अपनी मेहनत का पसीना बहाकर दो वक्त की रोटी की जुगत में लगा है। 

 

दरसअल, आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिले में अब भी कई गरीब परिवार ऐसे है जिन्हें सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है और ना ही स्थानीय स्तर पर उनकी कोई सुनवाई होती है। मजबूरन उन्हें अपनी गरीबी के साथ ही जीने पर मजबूर होना पड़ता है। 

 

कुछ इस तरह का मामला पेटलावद जनपद पंचायत की आदर्श ग्राम पंचायत सारंगी से सामने आया है, जंहा एक युवक खुद बैल (मवेशी) बनकर अपने खेत की हकाई करने में जुट गया है। साथ ही उसकी पत्नी भी उसका बक्खर चलाने में मदद कर रही है। क्योकि युवक बेहद गरीब है। और उसकी बैल खरीदने की भी हैशियत नही है। 

 

सारंगी निवासी महेश पिता गेंदालाल मालवीय खुद अपने एक छोटे से जमीन के टुकड़े पर हल-बक्खर चलाने हेतु बैल बनकर कार्य कर रहा है और उसकी पत्नी ममता भी उसका पूरा सहयोग कर रही है। महेश काफी गरीब परिवार से है, जिसके माता- पिता बचपन में ही गुजर गए थे उसके बाद महेश को झाबुआ के रहने वाले बलराम कसारा व उनकी पत्नी के  द्वारा गोद ले लिया था जिसके बाद महेश की परवरिश उन्हीं के द्वारा की गई है।

 

अब महेश को उनके द्वारा भी घर से निकाल दिया गया है। ऐसे में महेश व उसकी पत्नी ममता दोनों सारंगी से थोड़ी ही दूर पर स्थित अपने दादाजी की की जमीन के एक छोटे से टुकड़े पर एक घासफूस की झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर है। ना तो महेश के घर शौचालय है और ना ही रहने हेतु घर। झोपड़ी में रहकर महेश मजदूरी का कार्य करता है जो 100- 200 रुपये रोजाना कमाता है, और अपने व अपनी पत्नी के पेट को पालता है। मजदूरी के साथ ही महेश व उसकी पत्नी मिलकर अपने जमीन के टुकड़े पर कुछ फसल भी तैयार करते है किंतु अब गरीबी की मार के चलते उन्हें फसल तैयार करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

युवक महेश खेती करने हेतु खुद बैल (मवेशी) बनकर कार्य कर रहा है क्योंकि इनके पास इतने पैसे भी नही है कि वह बैल खरीद ले या फिर ट्रेक्टर से खेत की हकाई जुताई करवा लें। ऐसे में महेश व उसकी पत्नी ममता ने फैसला की वह खुद अपनी मेहनत से फसल तैयार करेंगे और फिर महेश गरीबी के चलते खुद ही बैल बन गया और उसकी पत्नी उसकी मदद कर रही है।

 

बताते चलें कि ग्राम पंचायत सारंगी आदर्श ग्राम पंचायत है राष्ट्रपति से भी सारंगी पंचायत को अवार्ड मिल चुके हैं किंतु इस पंचायत में इस गरीब परिवार की कोई सुनवाई नहीं हो रही है यह काफी गरीबी के बीच अपना जीवन यापन कर रहे हैं। 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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