प्रवासी मजदूरों से भेदभाव रोकने आशा करेंगी लोगों को जागरूक


प्रवासी मजदूरों से भेदभाव रोकने आशा करेंगी लोगों को जागरूक

प्रवासी मजदूरों के योगदान को लेकर होगी लोगों के बीच चर्चा

 

लखीसराय, 1 जून:

कोरोना संकटकाल में प्रवासी मजदूरों का आना जारी है. प्रवासी मजदूरों को क्वारेंटीन सेंटर में 14 दिन बीताने के बाद वे अपने घर जा रहे हैं. अपने गृहजिला आने के बाद गांव पहुंचने पर कई प्रवासी मजदूरों के साथ ग्रामीणों द्वारा भेदभाव जैसी बातें भी सामने आयीं हैं. इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग आशा व आशा फैसिलीटेटरों को इस बात के लिए उन्मुख कर रही हैं कि वे गांव में जाकर लोगों को यह समझायें कि कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए आवश्यक उपायों को अपनायें ना कि अपनों को दूर करें. 

 

इसको लेकर जिला में भी कोरोना महामारी के दौरान आमजनों के मध्य भेदभाव को दूर करने व साइको सोशल स्पोर्ट संबंधी एएनएम आशा आशा फैसिलीटेटर के उन्मुखीकरण के संबंध में राज्य स्वास्थ समिति ने सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिये हैं.

 

भेदभाव नहीं करने पर दिया जायेगा जोर:

सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कोविड 19 महामारी एवं लॉकडाउन के दौरान आमजनों के मध्य उत्पन्न हो रहे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के निदान हेतु राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों से अवगत कराने एवं महामारी के दौरान ही उत्पन्न लक्षण एवं भेदभाव दूर करने से संबंधित एएनमएम आशा आशा फैसीलिटेटर का उन्मुखीकरण कराया जाना है. इसको लेकर जिला के सभी प्रखंडों में उन्मुखीकरण का काम किया जा रहा है. 

 

 

गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ सुरेश शरण ने जानकारी दी कि उन्मुखीकरण के दौरान आशाओं को बताया गया है कि वे लोगों को इस बात की जानकारी दें कि प्रवासियों से मानसिक दूरी न बना कर उनके दर्द को समझें क्योंकि विपरीत हालातों में वे अपने काम-काज को छोड़कर घर लौटे हैं. उन्हें मानसिक मनोबल की जरुरत है. इसलिए आस-पास के लोगों को भी इस बात को समझने की जरूरत है. उनके प्रति सहानुभूति रखने की आवश्यकता है. आशाओं के माध्यम से लांक्षण व भेदभाव करने वाले ग्रामीणों को यह समझाया जायेगा कि प्रवासियों ने भी समाज और घर-परिवार के लिए बहुत कुछ किया है. किसी के कोरोना से संक्रमित होने की बात भी सामने आती है तो उसके साथ किसी भी तरह के दुर्व्यवहार नहीं किया जाये. आशाओं के माध्यम से यह बताया जायेगा कि कोरोना वायरस से संक्रमित या संदिग्ध व्यक्तियों को सोशल सिटग्मा के साथ देखना सही नहीं है. यह संक्रमण किसी भी व्यक्ति को हो सकता है. आवश्यक उपायों को बता कर हम सुरक्षित रह सकते हैं

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इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल


इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल

आज सुबह से सोशल मीडिया पर एक खबर को काफी तेजी से वायरल किया जा रहा है. दरअसल, कर्नाटक में BS येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली BJP सरकार के मंत्रियों ने बीते मंगलवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली. इस दौरान जब BJP नेता और विधायक मधु स्वामी पद और गोपनीयता की शपथ ले रहे थे, तभी उन्होंने गलती से बतौर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. 

 

 

बता दें कि, मधु स्वामी जब शपथ ले रहे थे तो उन्हें मंत्री बोलना था, लेकिन जुबान फिसलने के चलते वह मुख्यमंत्री बोल पड़े. अब इस खबर को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है. खास बात ये है कि इस दौरान CM येदियुरप्पा भी मौके पर मौजूद थे और मधु स्वामी की इस गलती पर मुस्कुरा दिए. इतना ही नहीं येदियुरप्पा ने मधु स्वामी को बाद में गले भी लगाया.

 

गौरतलब है कि, बीते मंगलवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल वजुभाई वाला ने 17 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलायी. जिन विधायकों को मंत्री पद से नवाजा गया है, उनमें बी. श्रीरमुलु, सीटी रवि, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केएस ईश्वरप्पा और पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार का नाम शामिल है. बता दें कि, येदियुरप्पा के 26 जुलाई को CM बनने के बाद उनके मंत्रिमंडल का यह पहला विस्तार है. उन्होंने 29 जुलाई को विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित किया था. 

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22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों


22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों

उतर-प्रदेश के बांदा जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, कई लोग इसे देखकर खुदा का करिश्मा मान रहें हैं तो वहीं कई लोग नेक इंसाल का दर्जा दे रहें हैं. बताया जा रहा है कि, यहां 22 वर्ष पहले कब्र मे दफनाए गए एक शख्स का जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला है.

 

ये मामला तब सामने आया जब मूसलाधार बारिश के चलते कब्रिस्तान में मिट्टी कटने से एक कब्र धंस गई और उसमें  22 वर्ष पहले दफन एक शख्स का कफन में लिपटा जनाजा़ दिखने लगा. यहां देखते ही देखते मौके पर काफी लोगों पहुंच गए. जब कफन में लिपटी लाश को निकाला गया तो वहां मौजूद सैकड़ों लोग देखकर दंग रह गए. क्योंकि 22 सालों बाद भी लाश ज्यों कि त्यों निकली.

 

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दरअसल, ये मामला उतर-प्रदेश के जिले बांदा के बबेरू कस्बे के अतर्रा रोड स्थित घसिला तालाब के कब्रिस्तान की है. यहां मूसलाधार बारिश से कई कब्रों की मिट्टी बह गई और एक कब्र में दफन जनाजा़ बाहर दिखने लगा. इसके बाद लोगों ने कब्रिस्तान कमेटी को इसकी जानकारी दी. कब्रिस्तान कमेटी के सदस्‍यों द्वारा जब कब्र की धंसी हुई मिट्टी को हटाकर देखा गया, तो उसमें दफनाया गया जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला.

 

गौरतलब है कि, इस कब्र में 22 वर्ष पहले 55 वर्षीय पेशे से नाई नसीर अहमद नाम के शख्स को दफनाया गया था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नसीर अहमद पुत्र अलाउद्दीन निवासी कोर्रही, थाना बिसंडा बबेरू में नाई की दुकान थी. उन्‍हें लगभग 22 वर्ष पहले दफन किया गया था. जबकी दूसरी तरफ मृतक नसीर के एक रिश्तेदार बताते हैं कि उनका कोई बेटा नहीं था. 

 

22 वर्ष पहले उनका निधन हुआ था, जिसके बाद उनलोगों ने ही उनके शव को दफनाया था. लेकिन, आज उनका जनाजा मिटटी धंसने की वजह से बाहर निकल आया. न शव ख़राब हुई थी और न ही कफ़न पर कोई दाग लगा था. हालंकी, बाद में स्थानीय मौलानाओं की मौजूदगी में शव को कल देर रात उसे दूसरी कब्र में दोबारा से दफन किया गया.

 

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