चार दिन बढ़ी चिदंबरम की पुलिस रिमांड, 30 तक रहेेेंगे अंदर


चार दिन बढ़ी चिदंबरम की पुलिस रिमांड, 30 तक रहेेेंगे अंदर

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट के बाद  CBI कोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है. अब CBI कोर्ट ने चिदंबरम को 30 अगस्त तक पुलिस रिमांड के लिए भेज दिया है. इस दौरान CBI कोर्ट में सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी चिदंबरम का पक्ष रख रहे थे. इसके अलावा चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम और बेटा कार्ति चिदंबरम भी कोर्ट में मौजूद थे. वहीं CBI की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तषार मेहता दलील रख रहे थे.

 

आपको बता दें कि, इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी पूर्व मंत्री पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया था कि CBI द्वारा गिरफ्तारी होने के बाद इस याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाता है. हालांकि कोर्ट ने चिदंबरम को ईडी से गिरफ्तारी के मामले में एक दिन की राहत दी थी. सुप्रीम कोर्ट ईडी केस की सुनवाई मंगलवार को करेगा.

 

गौरतलब है कि, INX मीडिया केस में CBI ने पी चिदंबरम को 21 अगस्त को उनके आवास से गिरफ्तार किया था. इसके बाद कोर्ट में पेश किए जाने पर चिदंबरम को 26 अगस्त तक रिमांड पर भेज दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस भानुमति की पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती है. पीठ ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के पहले का फैसला है. कोर्ट ने कहा कि अगर चिदंबरम को CBI मामले में राहत चाहिए तो उन्हें निचली अदालत में जाना होगा और वहीं से राहत की मांग करनी होगी. 

 

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इसके बाद सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि CBI ने पिछले 5 दिनों में चिदंबरम पर उनके खिलाफ लगाए गए आरोप के बारे में कुछ भी नहीं पूछा है, उनसे सिर्फ विदेशी बैंक खाते के बारे में पूछा गया था, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया था. सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल से यह भी पूछा गया था कि क्या उनके पास ट्विटर अकाउंट है जो जांच की गंभीरता दर्शाता है. कपिल सिब्बल ने कहा मीडिया ट्रायल किया जा रहा है. जांच एजेंसी बिना सत्यापित जानकारी मीडिया के जरिये दे रही है. अगर एजेंसी एक बैंक अकॉउंट या संपत्ति विदेश में दिखा दें तो हम याचिका वापस ले लेंगे.

 

आपको बता दें कि, चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने बीते शुक्रवार को कोर्ट में कहा था, ‘‘इंसाफ पाना चिदंबरम का मूल अधिकार है. दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ हमने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. लेकिन जिस तरह से मामले को डील किया जा रहा है, वह बेचैन करने वाला है. हाईकोर्ट में जिरह खत्म होने के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस गौर को नोटिस दे दिया. हमें जवाब देने का भी मौका नहीं दिया गया.’’

 

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इस पर मेहता ने कहा था, ‘‘गलत बयानी मत कीजिए. बहस खत्म होने के बाद मैंने कोई नोटिस नहीं दिया’’. सिब्बल बोले कि क्या कसम खाकर ऐसा कह सकते हैं? सिब्बल के मुताबिक, ‘‘हाईकोर्ट का फैसला शब्दश: यहां है. कॉमा की जगह कॉमा और पूर्णविराम की जगह पूर्णविराम लगा है. कॉपी में सबकुछ है, लिहाजा यही चिदंबरम को जमानत न देने का आधार बन गया.’’

 

वित्त मंत्री रहते हुए विदेशी निवेश की मंजूरी दी थी, आरोप है कि चिदंबरम ने वित्त मंत्री रहते हुए रिश्वत लेकर आईएनएक्स को 2007 में 305 करोड़ रु. लेने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से मंजूरी दिलाई थी। जिन कंपनियों को फायदा हुआ, उन्हें चिदंबरम के सांसद बेटे कार्ति चलाते हैं। सीबीआई ने 15 मई 2017 को केस दर्ज किया था। 2018 में ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। एयरसेल-मैक्सिस डील में भी चिदंबरम आरोपी हैं। इसमें सीबीआई ने 2017 में एफआईआर दर्ज की थी।

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