मात्र 18 साल का अर्जुन देशपांडे, जिसने रतन टाटा से की बिजनेस डील


मात्र 18 साल का अर्जुन देशपांडे, जिसने रतन टाटा से की बिजनेस डील

 

आज सुबह से सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा देश के एक नया उभरता हुआ चेहरा अर्जुन देशपांडे की हो रही है. अगर रतन टाटा जैसा बड़ा उद्योगपति किसी कंपनी में निवेश करे तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वह कितनी बड़ी होगा. लेकिन गुरुवार को उन्होंने एक छोटी सी कंपनी में निवेश किया है, जो महज दो साल पुरानी है. बल्कि वह एक स्टार्टअप है, जिसे अर्जुन देशपांडे ने शुरू किया है. ये स्टार्टअप है 'जेनरिक आधार'. वैसे तो ये पता नहीं है कि ये डील कितने में हुई है, लेकिन बताया जा रहा है कि टाटा ने करीब 50 फीसदी हिस्सा खरीद लिया है.

 

दरअसल, अर्जुन देशपांडे की उम्र अभी केवल 18 साल है, जिन्होंने दवा का खुदरा कारोबार करने वाली कंपनी जेनरिक आधार शुरू की है. जब वह 16 साल के थे तब उन्होंने इस कंपनी की शुरुआत की थी.

 

कैसे काम करती है अर्जुन की कंपनी?

 

सीधे मैन्युफैक्चरर्स से सामान लेकर रिटेलर्स को बेचती है. इस वजह से रिटेलर्स की कमाई करीब 20 फीसदी बढ़ गई है. वर्तमान में इस कंपनी का रेवेन्यू करीब 6 करोड़ रुपये हैं और अगले 3 सालों में इसे 150-200 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

 

बता दें कि अर्जुन को अपनी मां से प्रेरणा मिली है, जो इंटरनेशनल फार्मा बिजनेस से जुड़ी हुई हैं. वह अपने स्कूल की छुट्टियों में अमेरिका, वियतनाम, चीन और दुबई जैसे देशों में जाया करते थे, जिस दौरान उन्हें ये कंपनी खोलना का आइडिया सूझा. वह बहुत से आयातकों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी मिलते थे, जिससे पता चला कि अन्य देशों में सस्ती दवाएं मिलती हैं. उन्होंने जब मां से पूछा कि भारत में दवाइयां महंगी क्यों हैं तो पता चला कि भारत में अधिकतर जेनरिक दवाएं ब्राड के जरिए प्रमोट की जाती हैं, इसलिए वह महंगी होती हैं.

 

अर्जुन का मिशन भी जान लीजिए

 

जेनरिक कंपनी के जरिए अर्जुन देशपांडे एक मिशन पर काम कर रहे हैं. वह चाहते हैं कि बुजुर्गों और पेंशनभोगियों को जरूरत की दवाई कम से कम कीमत में मिले. वह कहते हैं कि करीब 60 फीसदी आबादी महंगी होने की वजह से दवा नहीं खरीद पाती है, इसलिए वह कीमत को घटाना चाहते हैं.

 

अर्जुन का आइडिया बिल्कुल यूनीक है. उनका मॉडल फार्मेसी-एग्रीगेटर बिजनस मॉडल है. ये यूनीक आइडिया ही है, जिसमें रतन टाटा जैसे बड़े कारोबारी को भी लुभा लिया, जिसके चलते उन्होंने जेनरिक आधार कंपनी में निवेश किया है.

 

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शेयर बाजार में भारी गिरावट से कारोबारी मायूस


शेयर बाजार में भारी गिरावट से कारोबारी मायूस

शेयर बाजार में भारी गिरावट से मायूस हुए देश भर में छोटे, मझले और बड़े कारोबारी. आज भारतीय शेयर बाजार में काफी कमजोरी देखी गई. शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स 90 अंक से टूटा और निफ्टी भी सपाट खुलने के बाद फिसल गया. 

 

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आज सुबह 9.39 बजे सेंसेक्स पिछले सत्र से 68.36 अंकों यानी 0.18 फीसदी की कमजोरी के साथ 37,259.65 पर कारोबार कर रहा जबकि निफ्टी 34.20 अंक यानी 0.31 फीसदी फिसलकर 10,982.80 पर कारोबार कर रहा था. 

 

इसके साथ BSE के 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र के मुकाबले मामूली कमजोरी के साथ 37,298.73 पर खुला और 37,346.05 तक उछला. मगर, सुस्त कारोबारी रुझान के कारण सेंसेक्स करीब 90 अंक पिसलकर 37,237.47 पर आ गया.

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देश भर में 1 वर्ष में बंद किए गए 5500 ATM और 600 ब्रांच : RBI


देश भर में 1 वर्ष में बंद किए गए 5500 ATM और 600 ब्रांच : RBI

देश में मौजूद सरकारी बैंक बड़े-बड़े शहरों में अपने ATM और ब्रांच को बंद कर रहें हैं. इसकी वजह यह बताई जा रही है कि शहर में रहने वाले लोग इंटरनेट बैंकिंग पर बहुत ज्यादा जोर दे रहें शिफ्ट हो गए हैं, जिसकी वजह से सरकारी बैंकों का ऐसा मानना है कि ब्रांच और ATM जैसे फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को कम किया जा सकता है. बता दें कि, पिछले 1 वर्ष में देश के 10 सरकारी बैंक ने कुल मिलाकर 5,500 ATM और 600 ब्रांच बंद किए हैं.

 

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बताया जा रहा है कि, देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने जून 2018 से 2019 के बीच 420 ब्रांच और 768 ATM बंद किए हैं. वहीं विजया और देना बैंक को मिलाने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ने कुल40 ब्रांच और 274 ATM पर इस बीच शटर गिराया है. इस लिस्ट में पंजाब नैशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया,  केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक और इलाहाबाद बैंक भी शामिल हैं.

 

गौरतलब है कि, जहां एक तरफ सरकारी बैंक खर्च घटाने के लिए नेटवर्क में कटौती कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट सेक्टर के एक्सिस बैंक, HDFC बैंक और ICICI बैंक ने अपने बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार किया है. RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि इन बैंकों ने खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में अपने ATM लगाए हैं.

 

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