अब बिना राशन कार्ड वाले मजदूरों को भी मिलेगा दो माह फ्री राशन


अब बिना राशन कार्ड वाले मजदूरों को भी मिलेगा दो माह फ्री राशन

कोरोना और लॉकडाउन के बीच दिहाड़ी मजदूरों का पलायन जारी है, इस बीच केंद्र सरकार मजदूरों के लिए लगातार पैकेज का ऐलान कर नहीं है ताकी मजदूरों को राहत मिल सके. दरअसल, कोरोना लॉकडाउन के कारण सबसे अधिक प्रभावित प्रवासी मजदूरों के लिए सरकार ने आज राहत उपायों की घोषणा की. इसके तहत 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को अगले दो महीने तक प्रति व्यक्ति मुफ्त पांच किलो अनाज और प्रति परिवार एक किलो चना दाल दी जाएगी. इसके लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

 

केंद्र सरकार के 20 लाख करोड़ रुपये के महापैकेज के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी घोषणा की. उन्होंने कहा कि इसके लाभार्थियों की पहचान राज्य सरकार के जिम्मे होगी और यह योजना राज्यों के जरिये ही लागू की जाएगी. इससे उन 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को फायदा होगा जो दूसरे राज्यों में रह रहे हैं और उनके पास राशन कार्ड नहीं है. ये प्रवासी एनएफएस के दायरे में नहीं हैं या राज्य के कार्डधारक नहीं हैं.

 

वित्त मंत्री ने कहा कि 23 राज्यों के 67 करोड़ लोगों को ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना के दायरे में लाया जा चुका है. इसके तहत देश के 83 फीसदी राशनकार्डधारी आ चुके हैं. इसे अगस्त 2020 से लागू कर दिया जाएगा. मार्च 2021 तक सभी को इस योजना से जोड़ लिया जाएगा. इससे देश में कोई भी व्यक्ति किसी भी राज्य में उचित दर की दुकान से अपने हिस्से का राशन ले सकेगा.

 

इस मौके पर वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता लेकर आई है और उसन करोड़ों रुपये बचाए हैं. इन पैसों का इस्तेमाल गरीबों के उत्थान के लिए किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना बेहद क्रांतिकारी है और इससे देश में कोई भी व्यक्ति कहीं से भी अपने हिस्से का राशन ले सकता है. इसका सबसे ज्यादा फायदा प्रवासी मजदूरों को होगा. कोरोना और लॉकडाउन के बीच दिहाड़ी मजदूरों का पलायन जारी है, इस बीच केंद्र सरकार मजदूरों के लिए लगातार पैकेज का ऐलान कर नहीं है ताकी मजदूरों को राहत मिल सके.

 

दरअसल, कोरोना लॉकडाउन के कारण सबसे अधिक प्रभावित प्रवासी मजदूरों के लिए सरकार ने आज राहत उपायों की घोषणा की. इसके तहत 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को अगले दो महीने तक प्रति व्यक्ति मुफ्त पांच किलो अनाज और प्रति परिवार एक किलो चना दाल दी जाएगी. इसके लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

 

केंद्र सरकार के 20 लाख करोड़ रुपये के महापैकेज के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी घोषणा की. उन्होंने कहा कि इसके लाभार्थियों की पहचान राज्य सरकार के जिम्मे होगी और यह योजना राज्यों के जरिये ही लागू की जाएगी. इससे उन 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को फायदा होगा जो दूसरे राज्यों में रह रहे हैं और उनके पास राशन कार्ड नहीं है. ये प्रवासी एनएफएस के दायरे में नहीं हैं या राज्य के कार्डधारक नहीं हैं.

 

वित्त मंत्री ने कहा कि 23 राज्यों के 67 करोड़ लोगों को ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना के दायरे में लाया जा चुका है. इसके तहत देश के 83 फीसदी राशनकार्डधारी आ चुके हैं. इसे अगस्त 2020 से लागू कर दिया जाएगा. मार्च 2021 तक सभी को इस योजना से जोड़ लिया जाएगा. इससे देश में कोई भी व्यक्ति किसी भी राज्य में उचित दर की दुकान से अपने हिस्से का राशन ले सकेगा.

 

इस मौके पर वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता लेकर आई है और उसन करोड़ों रुपये बचाए हैं. इन पैसों का इस्तेमाल गरीबों के उत्थान के लिए किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना बेहद क्रांतिकारी है और इससे देश में कोई भी व्यक्ति कहीं से भी अपने हिस्से का राशन ले सकता है. इसका सबसे ज्यादा फायदा प्रवासी मजदूरों को होगा.

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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