निर्भया गैंग रेप के दोषी अक्षय ने दायर की पुनर्विचार याचिका, दिए अजीब तर्क


निर्भया गैंग रेप के दोषी अक्षय ने दायर की पुनर्विचार याचिका, दिए अजीब तर्क

हैदराबाद डॉ.प्रियंका के आरोपियों को एनकाउंटर के बाद अब निर्भया सामूहिक दुष्कर्म का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. माना जा रहा है कि अब जल्द-जल्द इन आरोपियों को फांसी की सजा हो जाएगा.

 

इस बीच खबर है कि निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में फांसी की सजा पाए अक्षय कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका में कहा है कि, 'सरकार को सिर्फ यह साबित करने के लिए लोगों को फांसी नहीं देनी चाहिए कि वह आतंकी या महिलाओं के खिलाफ हिंसा के अपराध में शामिल है. उसे बदलाव के लिए सुनियोजित तरीके से सुधार के लिए काम करना चाहिए.'

 

'फांसी से सिर्फ अपराधी मरता है, अपराध नहीं. मौत की सजा बेरहमी से हत्या है और यह दोषियों को सुधरने का अवसर प्रदान नहीं करती.' इस याचिका में पूर्व चीफ जस्टिस पीएन भगवती की टिप्पणी का जिक्र किया गया है कि गरीब पृष्ठभूमि वाले अधिकांश दोषियों को फांसी के फंदे तक भेजने की संभावना अधिक रहती है.

 

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अगर हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली कानूनी मानकों के तर्कसंगत आवेदन की गारंटी नहीं ले सकती, तो हम कैसे न्यायपालिका को यह अधिकार दे सकते हैं कि किसे जीना चाहिए और किसे नहीं. इसके अलावा अक्षय ने याचिका में वेद पुराणों का हवाला देते हुए कहा, 'मौत की सजा क्यों? जब मनुष्य की आयु कम हो रही है.'

 

'हमारे वेद, पुराण और उपनिषदों में कहा गया है कि सतयुग में मनुष्य 1000 वर्ष जीता था. द्वापर में 100 वर्ष, लेकिन कलयुग में नहीं. इस युग में मनुष्य की उम्र 50-60 वर्ष ही रह गई है. बहुत ही कम सुनते हैं कि कोई 100 वर्ष जिया.' साथ ही अक्षय का कहना है की, 'गांधी जी हमेशा कहते थे कि कोई भी फैसला लेने से पहले सबसे गरीब व्यक्ति के बारे में सोचें. यह सोचें कि आखिर आपका फैसला कैसे उस व्यक्ति की मदद करेगा. आप ऐसा विचार करेंगे तो आपके भ्रम दूर हो जाएंगे.'

 

गौरतलब है कि दोषियों ने दक्षिणी दिल्ली में 16-17 दिसंबर, 2012 की रात चलती बस में 23 वर्षीय छात्रा के साथ दरिंदगी की हदें पार कर दी थीं. सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसे बुरी तरह जख्मी करके सड़क पर फेंक दिया था. निर्भया का बाद में 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर में माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में निधन हो गया था.

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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