घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने की सख्त जरूरत


घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने की सख्त जरूरत

• भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने जारी किए सरल दिशानिर्देश 

• बेहतर सफाई एवं स्वच्छता से संक्रमण पर लग सकती है लगाम 

• सार्वजानिक जगहों पर पैर से संचालित हैण्डवाशिंग स्टेशन इंस्टाल करने की जरूरत 

• सामुदायिक शौचालयों के इस्तेमाल में भी सामाजिक दूरियों का रखें ख्याल 

 

14 अप्रैल: कोरोना संक्रमण के प्रसार को कम करने के सरकार द्वारा हर’ संभव प्रयास किये जा रहे हैं. कोविड-19 का प्रसार घनी आबादी वाले क्षेत्रों में तेजी से फैलने की आशंका होती है. इसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा पत्र जारी कर विस्तार से दिशानिर्देश दिया गया है, जिसमें घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बेहतर सफाई एवं स्वच्छता की जरूरत पर बल देने की बात कही गयी है.

 

साथ ही सामुदायिक स्तर पर जहाँ लोग शौचालय, कपड़े धोने या स्नान करने की सुविधाओं को साझा करते हैं, वहाँ विशेष रूप से कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए साफ़- सफाई, स्वच्छता एवं सामाजिक दूरियाँ अपनाने की जरूरत पर बल दिया गया है.

 

संक्रमण के खिलाफ़ सबों को मिलकर करना होगा कार्य: 

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर के विजयराघवन ने जोर देकर कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई में भारत हरेक संदर्भ में सबसे प्रभावी और समर्थ उपाय लागू करने के लिए एक साथ आया है. हमारी घनी आबादी वाली जगह धारावी इसका एक उदाहरण है लेकिन वहां विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

 

पीएसए कार्यालय में इस टीम द्वारा प्रस्तु त मैनुअल में बताया गया है कि किस प्रकार सस्तेी लेकिन प्रभावी उपकरण सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं. सामुदायिक संपर्क की जगहों जैसे साझा शौचालयों और स्नानागारों पर विशेष ध्याकन देने की जरूरत है. सामुदायिक नेताओं, गैर-सरकारी संगठनों, उद्योग जगत आदि से इन उपायों को लागू करने का आग्रह किया गया है.

 

यह सुझाव दिया जाता है कि उद्योग जगत, गैर-सरकारी संगठन और इस बीमारी की रोकथाम में मदद करने वाली संस्थाुएं विशेष रूप से घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में इन दिशानिर्देशों में बताए गए समाधान को अपनाने और उसे लागू करने में समुदायों और स्वरयंसेवकों के साथ मिलकर काम करें’’.

 

बेहतर साफ़-सफाई एवं स्वच्छता संक्रमण की रोकथाम के लिए जरुरी: 

पैर से संचालित हैण्डवाशिंग स्टेशन है जरुरी: 

सार्वजानिक स्थानों पर इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे हैंडल्स, घुंडी एवं दरवाजें समुदाय में रोग को फ़ैलाने वाले मुख्य स्रोत माने जाते हैं. इसलिए समुदायिक स्तर पर पैरों से संचालित हैण्डवाशिंग स्टेशन इनस्टॉल करने की सलाह दी गयी है ताकि संक्रमण का फैलाव सार्वजानिक जगहों पर कम हो. प्रस्तावित डिजाइन के तहत लॉकडाउन और आपूर्ति-श्रृंखला संबंधी चुनौतियों के बावजूद सस्ती एवं स्थानीय तौर पर उपलब्ध सामग्रियों के इस्ते्माल से सामुदायिक स्वयंसेवकों और अधिकारियों द्वारा आसानी से स्वरयं असेंबल किया जा सकता है.

 

लोकल स्तर पर पैरों से संचालित हैण्डवाशिंग स्टेशन को लगभग 100 रूपये की लागत से निर्मित किया जा सकता है. पैरों से संचालित हैण्डवाशिंग स्टेशन न केवल संक्रमण की रोकथाम में प्रभावी होगा बल्कि इससे पानी का भी बचाव होगा.

 

ऐसे करें हाथ की धुलाई: 

यदि आप सैनिटाईजर का इस्तेमाल करते हैं तब आपको कम से कम 20 से 30 सेकंड तक इसका इस्तेमाल करना चाहिए. जबकि साबुन एवं पानी से 40 से 60 सेकंड तक हाथ साफ करना चाहिए.

 

सामुदायिक शौचालयों के इस्तेमाल के दौरान रहें सचेत:

• शौचालय में फेस मास्क का उपयोग करें 

• शौचालय के अंदर अपनी नाक, आँखें एवं मुँह को स्पर्श न करें 

• शौचालय के तुरंत बाद अच्छे से साबुन से हाथ साफ़ करें 

• शौचालय के भीतर इधर-उधर न थूकें 

• सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करने के दौरान सामाजिक दूरी का रखें ख्याल

 

इन बातों का भी करें पालन:

• यदि किसी व्यक्ति को इन्फ्लुएंजा की तरह बीमारी दिख रही हो जैसे बुखार, ठण्ड लग्न, सूखी खाँसी. बहती नाक तो तुरंत नजदीकी आशा, आंगनबाड़ी या अन्य क्षेत्रीय स्वास्थ्य कर्मी को जानकारी दें 

• अपने मोबाइल में आरोग्य सेतु एप को इंस्टाल करें. यह 11 भाषाओँ में उपलब्ध है जिसकी सहायता से आप कोरोना के खतरे से अवगत हो सकते हैं एवं फ्रंट लाइन वर्कर को रिपोर्ट भी कर सकते हैं 

• मास्क पहनकर ही घर से निकलें. इसे पुनः इस्तेमाल करने के लिए गर्म पानी एवं साबुन से साफ़ करें एवं इसे धूप में सुखाएं

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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