मुस्लिम भी मानते हैं कि बाबरी मस्जिद के स्थान पर राम मंदिर ही था: हिंदू पक्ष


मुस्लिम भी मानते हैं कि बाबरी मस्जिद के स्थान पर राम मंदिर ही था: हिंदू पक्ष

लंबे समय से विवाद का कारण बने रहे बाबरी मस्जिद और रामजन्म भूमि के मामले आज सर्वोच्च न्यायालय में एक बार फिर से सुनवाई हुई जहां 13वें दिन हो रही सुनवाई में निर्मोही अखाड़ा अपना पक्ष रखा.

 

इस दौरान निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने कहा कि विवादित ढांचे में मुस्लिम ने 1934 के बाद से कभी नमाज नहीं पढ़ी है. ये मंदिर ही था जिसकी देखरेख निर्मोही अखाड़ा करता था. उन्होंने आगे कहा कि पूरा का पूरा ढांचा मंदिर से घिरा हुआ है और वहां हिंदू देवता थे. इस बात को मुस्लिमों ने भी स्वीकार किया है कि 1855 से पहले वहां नमाज पढ़े जाने का साक्ष्य नहीं है.

 

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गौरतलब है कि करीब 2.77 एकड़ के इस अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ कर रही है. इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं.

 

इस बीच उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान रामलला का पक्ष रखते हुए निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील कुमार जैन ने दलीलें पेश किया. उन्होंने कहा कि हम देव स्थान का मैनेजमेंट करते हैं और पूजा का अधिकार चाहते हैं. जन्मस्थान पर अधिकार न तो देवता के नेक्स्ट फ्रेंड को दिया जा सकता है न ही पुजारी को. यह केवल जन्मस्थान का मैनेजमेंट करने वाले को दिया जा सकता है.

 

खास बात यह है कि चीफ रंजन गोगोई इसी साल अक्टूबर के अंत तक रिटायर होने वाले हैं ऐसे में वह अपने पद पर रहते हुए इस मामले को निपटा देना चाहते हैं.

 

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