जानें अदम्य साहस की जननी और सांसद मेनका गांधी की जीवनी


जानें अदम्य साहस की जननी और सांसद मेनका गांधी की जीवनी

एनिमल राइट एक्टिविस्ट, एनवायरोमेंटलिस्ट और दिवगंत कोंग्रेसी नेता संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी अपनी सादगी और परायणता के लिए जानी जाती है। उनका राजनैतिक कद समय के साथ आसमान की ऊंचाइयों को छू गया है। आज हम आपको लोक सभा सांसद और बीजेपी राजनेत्री मेनका गांधी की जीवनी बताने जा रहे हैं।

 

मेनका गांधी का जन्म 26 अगस्त 1952 को दिल्ली में एक सिक्ख परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम तरलोचन सिंह आनंद थे जोकि सेना में लेफ्टिनेंट थे। इनकी माता का नाम अमतेश्वर आनंद था। मेनका ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई दिल्ली के लॉरेन्स स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने माध्यमिक पढ़ाई लेडी श्री राम कॉलेज और उच्च शिक्षा जेएनयू से पूरी की। इसी दरम्यां उनकी मुलाकात संजय गांधी से हुई और बाद में उनसे ही शादी हुई। इनके परिवार में एक बेटा वरुण गांधी हैं जोकि राजनीति में ही हैं।

 

 

राजनैतिक करियर

जब कांग्रेस को इमरजेंसी के बाद 1977 में करारी हार झेलनी पड़ी तो इस हार के बाद मेनका ने अपने पति का साथ दिया और राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ा दी लेकिन में संजय गांधी की हवाई दुर्घटना में देहांतवास होने के बाद ये अंदर से टूट गयी और राजनीति और कांगेस परिवार से दूर हो गयी। इस सदमे के कुछ साल बाद मेनका फिर से राजनीति में आई और संजय विचार मंच की स्थापना की।

 

इसके बाद 1988 में संजय विचार मंच का गठबंधन जनता दल से कर लिया। इसके एक साल इनकी पार्टी ने लोक सभा चुनाव में पहली जीत दर्ज की और फिर 1996 में स्वंय मेनका गाँधी पीलीभीत से चुनाव लड़ी और इस सीट पर विजय पाने में वे कामयाब हुई। इस सीट से मेंनका लगातार 2009 तक चुनाव जीतती रही और इसी बीच 1999 में मेनका बीजेपी में शामिल हुई।

 

इसके बाद 2009 में ओनला से चुनाव लड़ी और इस चुनाव में भी वे विजयी हुई। मोदी सरकार के प्रथम कार्यकाल में वे पीलीभीत से चुनाव लड़ी और जीतने में कामयाब हुई। इसके बाद कैबिनेट में उन्हें जगह मिला और उन्हें महिला एवं बाल विकास मंत्री बनाया गया। जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक निभाया। वहीँ 2019 में वे फिर से सांसद चुनी गयी और अपने दायित्व को बखूबी निभा रही हैं।

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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