हरिद्वार : मंत्री और मेला अधिकारी कुंभ कार्यों को जल्द पूरा करने की कर रहे बात


कोरोना वायरस संक्रमण के चलते पूरे देश में लॉक डाउन हैं। ठीक ऐसे ही हालात धर्मनगरी हरिद्वार में भी हैं। हरिद्वार में लॉक डाउन की वजह से अगले साल शुरू होने वाले कुंभ मेले के सभी कार्य अधर में लटके हुए हैं, अब इन कार्यों को पूरा करने की थोड़ी बहुत आस जगी है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा कुंभ मेले के कार्यो को पूरा करने के लिए लॉक डाउन के दौरान छूट दी है।

 

इनमे पीडब्लूडी विभाग रेलवे विभाग नेशनल हाईवे और अंडर ग्राउंड बिजली के कार्य अभी शुरू किए गए है। वही शहरी विकास मंत्री के अनुसार कंस्ट्रक्शन से जुड़े कई कार्य और इसके लिए कच्ची सामग्री उपलब्ध कराने वाले प्रतिष्ठान को खोलने के लिए आगामी 3 तारीख के आस पास होने वाली भारत सरकार की समीक्षा बैठक में अनुमति मांगी जाएगी ताकि यह कार्य भी शुरू किए जा सके।

 

लॉक डाउन की वजह से अधर में लटके कुंभ कार्यो को पूरा करने के लिए भारत सरकार द्वारा दी गई रियायत पर हरिद्वार के मेलाधिकारी दीपक रावत का कहना है कि लॉक डाउन की वजह से कुम्भ मेले के लिए किए जा रहे सभी कार्य रुक गए थे। अभी दो दिन पहले सरकार ने इन कार्यो को शुरू करने की अनुमति दी है। मेले से संबंधित कार्यो में पीडब्लूडी विभाग के सभी कार्य यूपीसीएल द्वारा अंडर ग्राउंड बिजली की तारे बिछाने का कार्य और नेशनल हाईवे के कार्य शुरू किए गए है।

 

हरिद्वार शहर के नेशनल हाईवे के कार्यो को पूरा करने  के लिए मजदूर और मशीनों का प्रबंध भी किया जा रहा है। मेलाधिकारी का यह भी कहना है कि इन कार्यो को पूरा करने के लिए लेबर की अभी ज्यादा दिक्कत नही है, मगर जो लेबर कार्यो को करने में सक्षम है जो कुशल श्रमिक है उनका अभी आभाव है, कई कार्य कुशल श्रमिक द्वारा किये जाने है जो अभी पूरे नही हो रहे है। वही मेला अधिकारी यह मान रहे है कि श्रमिको और मशीनरी को बढ़ाने से कुंभ कार्य समय पर पूरे हो सकेंगे।

 

कुंभ कार्यो के शुरू होने पर हरिद्वार के साधु संतो से कार्यो को लेकर विचार विमर्श करने पहुचे। उत्तराखंड के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि कुंभ मेले के दृष्टिगत कंस्ट्रक्शन के वह सभी कार्य जो शुरू होने है उनको शुरू किया गया है। 3 तारीख के बाद यह पहले एक समीक्षा बैठक भारत सरकार की होनी है। इसमें हमारे द्वारा राज्य के लिए 2 चीजो की मांग की गई है, एक यह कि जहाँ कंस्ट्रक्शन की साइट है वहां कच्ची सामग्री जैसे सीमेंट सरिया रेत बजरी पहुचाने की अनुमति दी जाए और इन सभी सामग्री की दुकानें बंद है इनको खोलने की अनुमती भी दी जाये उम्मीद है।

 

अगली समीक्षा बैठक में अनुमति मिल सकती है। वही कुंभ मेले के कई कार्यो को करने अनुमति पहले ही मिल गई है, इनमे अधिकतर कार्य लॉक डाउन के बाद गति में आएंगे हाईवे का निर्माण पुलों का निर्माण रेलवे के कार्य और पीडब्लूडी के कार्य शुरू हो चुके है और जिन जगहो पर मजदूर और कच्ची सामग्री पहले से पड़ी है वहां पहले कार्यो को शुरू किया गया है। लॉक डाउन की गाइड लाइन के अनुसार कार्यो को पूरा कराया जा रहा है।


कुंभ मेला 2021 को भव्य दिव्य और आकर्षक कुंभ बनाने के लिए सरकार और प्रशासन पूरी शिद्दत से कुंभ कार्य को पूरे करने में लगे हुए थे मगर देश में अचानक हुए लॉक डाउन के कारण यह सभी कार्य अधर में अटक गए। अब दोबारा इन कार्यों को पूरे करने की अनुमति मिलने पर कार्यों के पूरे होने की आस जगी है देखने वाली बात यह होगी कि अधिकारी और मंत्री के समय से कार्य पूरा करने के दावों के अनुसार जमीनी स्तर पर क्या इन सभी अधर में पड़े कार्यों को समय से पूरा कर लिया जाता है और कितना भव्य और दिव्य कुंभ मेले 2021 का आयोजन हरिद्वार में किया जाता है।

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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