केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियो औऱ सैनिके के डीए में वृद्धि को रोकना वर्तमान में उचित नहीं - डॉ. मनमोहन सिंह


केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियो औऱ सैनिके के डीए में वृद्धि को रोकना वर्तमान में उचित नहीं - डॉ. मनमोहन सिंह

कोरोना वायरस के कारण देश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा सी गई है. देश को आर्थिक मोर्चों पर काफी नुकासान उठाना पड़ रहा है क्योकि लॉकडाउन के कारण लोग अपने घरों में है और व्यापार – व्यवसाय ठप पड़ा है. हालांकि सरकार अब धीरे -  धीरे कल कारखानों और उघोगों को कुछ शर्तों के साथ शुरू करने की इजाजत दे रही है पर कोरोना से बेपटरी  हुई देश की अर्थव्यवस्था को संभलने में अभी समय लगेगा.

 

कोरोना कारण उतपन्न हुई चुनौतियो से निपटने के लि सरकार हर संभव प्रयास कर रही है औऱ इसी कड़ी में केंद्र की मोदी सरकार ने कुछ दिन पहले केंद्रीय कर्मचारियों और पैंशनभोगियो के डीए यानि मंहगाई भत्ते में बढ़ोतरी पर रोग लगा दी. सरकार के इस फैसले की विपक्ष ने जमकर आलोचना की और कहा कि सरकार को केंद्रीय कर्मचारियों , और पैंशनभोगियो के डीए में बढ़ोतरी को रोकने के बजाय फिजूल खर्जी पर रोक लगाना चाहिए.

 

इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने डीए की बढ़ोतरी पर रोक लगाने के फैसले को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को घेरा और कहा कि  इस वक्त केंद्रीय कर्मियों एवं सैनिकों के लिए मुश्किल पैदा करना उचित नहीं है. कांग्रेस की ओर से जारी पार्टी के सलाहकार समूह की बैठक के वीडियो के मुताबिक पूर्व प्रधानंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि कांग्रेस को इस वक्त इन सरकारी कर्मचारियों और सैनिकों के साथ खड़े रहना है. हमें उन लोगों के साथ खड़े होना है जिनके भत्ते काटे जा रहे हैं.

 

गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेल के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सरकार द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में बढ़ोतरी को रोकने के फैसले पर सरकार को जमकर घेरा था और कहा था कि सरकार बुलेट ट्रेन परियोजना और सेंट्रल विस्टा सौंदर्यीकरण परियोजना को निलंबित करने के बजाय कोरोना वायरस महामारी से जूझ कर जनता की सेवा कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशन भोगियों और देश के जवानों का महंगाई भत्ता काट रही है जो अमानवीय है.

 

आपको बता दे कि कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार के इस फैसले के खिलाफ जमकर बोल रही है. विपक्ष का कहना है कि कोरोना महामारी के इस समय में केंद्रीय कर्मचारियों और पैशनभोगियों के डीए में बढ़ोतरी पर रोक लगने की आवश्यक्ता नहीं थी. आपको बता दे कि  कांग्रेस पार्टी केंद्रीय कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि नहीं करने के सरकार के फैसले जमकर आलोचना कर रही है और कांग्रेस ने सरकार को नसीहत दी है कि वो इसके बजाय फिजूल खर्ची को रोको जिससे कोरोन से निपटन में मदद मिले.

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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