मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना के प्रति हुआ फेल, ट्रम्प पर उठे सवाल


मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना के प्रति हुआ फेल, ट्रम्प पर उठे सवाल

देश दुनिया में कोरोना वायरस के मामले बेकाबू होतो जा रहे हैं, कोरोना के प्रति वैक्सिन बनाने का भी सिलसिला जारी है देश विदेश के सरकारें और डॉक्टर अपना महत्वपुर्ण योगदान दें रहे हैं ताकी कोरोना से किसी तरह निजात मिल सके. इस बीच एक चर्चे की विषय बनी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा जो दावा किया जा रहा था की यह कोरोना के प्रति कारगर है मगय यह भी आज फेल हो गया है.

 

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कोरोना के लिए बेहद उपयोगी मानी जा रही मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं. यूनिवर्सिटी ने करीब 1400 मरीजों पर की गई एक स्टडी में दावा किया कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन लेने वाले और न लेने वाले मरीजों की स्थिति में बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा है, क्योंकि ये दवा गंभीर मरीजों को बचा नहीं पा रही. ये रिपोर्ट न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपी है.

 

इस स्टडी में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की उस सलाह पर भी आपत्ति उठाई गई है जिसमें उन्होंने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया था. अमेरिकी सरकार ने 19 मार्च को  मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली क्लोरोक्वीन को कोरोना के लिए इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी थी. 

 

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन लेने वाले 800 से अधिक मरीजों की तुलना ऐसे 560 मरीजों से की है जिनका इलाज इस दवा की बजाय दूसरे तरीके से किया गया. हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन वाले मरीजों में से कुछ को सिर्फ यही दवा मिली जबकि कुछ मरीजों को एजिथ्रोमाइसिन के साथ मिलाकर दी गई थी.

 

इन दोनों समूहों के अलग-अलग नतीजों में पता चला कि करीब 1400 मरीजों में से 232 की मौत हो गई और 181 लोगों को वेंटिलेटर पर ले जाना पड़ा. दोनों ही समूहों में ये आंकड़े लगभग बराबर थे. हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल के कारण न तो मरने का जोखिम कम हुआ और न ही वेंटिलेटर की जरूरत को कम किया जा सका.

 

अचानक जीवन रक्षक बनकर उभरी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर इन अमेरिकी शोधकर्ताओं की सलाह है कि ये दवा फायदे ज्यादा नुकसान कर सकती है. उन्होंने इसके संभावित गंभीर दुष्प्रभाव बताए हैं, जिसमें दिल की धड़कन का अचानक से बेकाबू हो जाना भी है और ये मौत का कारण भी बन सकता है. एफडीए ने भी औपचारिक अध्ययन के अलावा कोरोनो के लिए इस दवा के इस्तेमाल को लेकर सचेत किया है.

 

बता दें कि, हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन अमूमन ऐसे मरीजों को दी जा रही है जो ज्यादा संक्रमित हैं. इसके लिए दुनियाभर में व्यापक रूप से अपनाए जा रहे तरीकों पर ही अमल हो रहा है, लेकिन कोई बहुत अच्छे नतीजे नहीं मिल रहे क्योंकि मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. 

 

बता दें कि विदेशों में बढ़ते कोरोना के मामले को लेकर भारत सरकार से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से मांग कि गई थी जहां भारत सरकार नजीर बन कर उभरी और विदेशों में जितनी जरुरत हुई उतनी दवा की सपलाई की. इस दौरान PM मोदी सरकार की खुब बहाबही भी हुई थी लोग मतकर तारीफ भी किए थे मगर आज सब फेल हो गया खैर फिलहाल कोरोना से निपटने के लिए देश दुनिया जी जान से लगा हुआ है.

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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