जानें भारतीय राजनीति के मामा कहे जाने वाले राजनेता शिवराज सिंह की जीवनी


जानें भारतीय राजनीति के मामा कहे जाने वाले राजनेता शिवराज सिंह की जीवनी

भारतीय राजनीति के मंझे नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपनी आक्रमक शैली के लिए जाने जाते हैं। लोग इन्हें मामा कहकर पुकारते हैं। इन्होने भारतीय राजनीति में अपनी विशेष पकड़ बनाई है। हालांकि, हालिया मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में बीजेपी को उनके नेतृत्व में पराजय मिला लेकिन इससे पहले उनकी नेतृत्व में ही बीजेपी ने कई बार सरकार बनाई। आज हम आपको राजनीति मैदान के मामा यानि कि शिवराज सिंह चौहान की जीवनी बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं।

 

शिवराज सिंह चौहान का जन्म 5 मार्च 1959, को मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के जैत गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम प्रेमसिंह चौहान और माता का नाम श्रीमती सुंदरबाई चौहान है। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा यही से हासिल की। इसके बाद इन्होंने बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी, भोपाल से दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर की। इस संकाय में उन्होंने गोल्ड मैडल जीता।

 

इसी समय 1975 में मॉडल हायर सेकेण्डरी स्कूल के छात्रसंघ चुने गए और फिर 1976-77 में आपतकाल के विरोध में जेल की यात्रा की। जब वे जेल से रिहा हुए तो उन्होंने सबसे पहले 1977 में स्वयंसेवक संघ ज्वाइन कर आरएसएस में स्वयंसेवक के रूप में सेवा दी। फिर सन 1977-78 में अखिल भारतीय विधार्थी परिषद के संगठन मंत्री बनाये गए। इस पद पर इन्होंने अपने कार्य को अच्छी तरह से एक्सक्यूट किया और फिर 1978 से 1980 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, मध्य प्रदेश के जॉइंट मिनिस्टर बने।

 

 

इसके बाद 1980 से 1982 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, मध्य प्रदेश के महासचिव और 1982-83 में राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य बने। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सेवा देने के बाद शिवराज सिंह ने 1984-85 में भारतीय जनता युवा मोर्चा ज्वाइन की और मध्य प्रदेश के संयुक्त सचिव पद पर आसीन हुए। जबकि 1985 से 1988 तक महासचिव और फिर 1988 से 1991 तक अध्यक्ष पद को संभाला।

 

उनके सराहनीय कार्य से पार्टी ने उन्हें बुधनी विधानसभा क्षेत्र से टिकट दी। इस सीट से चौहान 1990 में विधायक बने और इसके अगले साल विदिशा संसदीय क्षेत्र से सांसद बने। इसके बाद पार्टी ने और बड़ी जिम्मेवारी दी और 1992 में उन्हें बीजेपी के प्रदेश महासचिव बनाया गया। इस पद पर वे 1994 तक रहे और फिर 1994 से 1996 तक हिन्दी सलाहकार समिति सदस्य के साथ साथ श्रम और कल्याण समिति के भी सदस्य बनाए गये।

 

इसी वर्ष 11वीं लोक सभा में विदिशा संसदीय क्षेत्र से एक बार फिर सांसद चुने गये और फिर जब 1998 में 12वीं लोक सभा चुनाव हुआ तो इस चुनाव में भी चौहान की विजयी श्री हुई। इसके अगले वर्ष भी जब अटल जी केवल एक दिन के पीएम बने थे और इसके बाद जब 13 वीं लोक सभा चुनाव हुआ तो इस चुनाव में भी वे चुने गए। इसके बाद 1999-2000 में कृषि समिति के सदस्य और 1999-2001 में सार्वजनिक उपक्रम समिति के सदस्य रहे। 

 

 

चौहान की राजनीतिक कद समय के साथ बढ़ता गया और फिर सन् 2000 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष  चुने गये, इस पद पर वे  2003 तक रहे। वर्ष 2004 इनके करियर के लिए स्वर्णिम वर्ष रहा क्योंकि इस वर्ष उन्हें एक साथ कई जिम्मेवारी दी गयी। जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव, भाजपा संसदीय बोर्ड के सचिव समेत कई अन्य संगठनों के अध्यक्ष रहे। जबकि वर्ष 2005 में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चुने गए।

 

इस वर्ष इनकी किस्मत और चमकी। जब इन्हें 29 नवम्बर 2005 को बाबूलाल गौर की जगह पर मध्य प्रदेश का सीएम बनाया गया। इस पदोन्नति से चौहान का राजनैतिक दायरा पूरे प्रदेश में फ़ैल गया और तेरह्न्वी विधान सभा चुनाव में इन्होने तूफानी चुनाव प्रचार किया। इस प्रचार में विपक्षी पार्टी का सूपड़ा ही साफ़ हो गया और 12 दिसम्बर 2008 को श्री चौहान को पुनः सीएम बनाया गया। इसके बाद अगले दोनों विधान सभा चुनावों में बीजेपी विजयी श्री हुई और श्री चौहान सीएम चुने गये। हालांकि, 2018 विधान सभा चुनाव में श्री चौहान का जादू नहीं चला और बीजेपी की करारी हार हुई। आज चौहान विपक्ष दल के नेता हैं।

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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