उपेंद्र कुशवाहा के आमरण अनशन से चिंतित महागठबंधन, RJD कार्यालय में बैठक


उपेंद्र कुशवाहा के आमरण अनशन से चिंतित महागठबंधन, RJD कार्यालय में बैठक

 

पटना: उपेंद्र कुशवाहा के आमरण अनशन से चिंतित महागठबंधन के नेतागण आज आरजेडी कार्यालय में बैठक की. जिसमें महागठबंधन के सभी नेतागण मौजूद थे. जहां जीता राम मांझी तेजस्वी यादव शरद यादव आरजेडी अध्यक्ष  जगदानंद सिंह के साथ कई कार्यकर्ता और नेता मौजूद थे. सिर्फ मुकेश सहनी और उपेंद्र कुशवाहा जो अभी पीएमसीएच में भर्ती हैं.

 

उनके हालात को लेकर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अनशन का कारण समाज के निर्माण का अनुरोध है जो ज्ञान मुल्क है. राज्य की शिक्षा व्यवस्था अस्त-व्यस्त है. क्योंकि गरीब एवं गांव की आबादी के लिए अच्छे संस्थान नहीं है. जो अच्छे हैं वह महंगे हैं जिनमें धनवान के बच्चे तो शिक्षा पा सकते हैं. मगर अन्य के लिए स्थान नहीं है. समाज एवं राज्य में अपने अधिकार प्राप्त करने का साधन है. जो गुणवत्ता पूर्वक माध्यम से पूरी हो सकती है.

 

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यह अधिकार हमें संविधान से प्राप्त भी है. मगर अधिकार की चाहत रखने वाले की मांग समान शिक्षा की नहीं मानी जा रही है. केंद्रीय विद्यालय एवं नवोदय विद्यालय भारत सरकार की सर्वोत्तम संस्थान है. केंद्रीय सरकार की नीति के अनुसार अन्य सभी कार्य केंद्र सरकार करेगी मगर जमीन राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी. शिक्षा राज्य मंत्री भारत सरकार में रहते हुए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना करने के लिए प्रदान की है. उससे जमीन सरकार नहीं दे रही है.

 

उपेंद्र कुशवाहा औरंगाबाद में जनसहयोग से प्राप्त कर ली है. मगर सरकार इसके लिए अपनी सहमति नहीं दे रही है. कुशवाहा का अपने निजी उद्देश्य से नहीं बल्कि एवं आम गरीब और कमजोर वर्ग के लिए शिक्षा दिलाने का प्रयास है. महागठबंधन के लोग उनकी आवरण को पवित्र मानता है. मगर इस सरकार से जनहित का कार्य करा लेना ही संभव नहीं है.

 

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महागठबंधन उपेंद्र कुशवाहा के प्रयास का समर्थन करते हुए राज्य सरकार की असंवेदनशील ता देखते हुए और उनके जीवन को दीर्घायु की अपेक्षा करते हैं. क्योंकि इस देश में अनेकों वर्तमान तथा आने वाले संघर्ष में उपेंद्र कुशवाहा को स्वास्थ्य तथा जीवित रखना आवश्यक है. महागठबंधन के सभी लोगों ने यह तय किया है कि आज अस्पताल में जाकर उनके आमरण अनशन को समाप्त कराने का आग्रह करेंगे तथा आगे के संघर्ष को और कैसे मजबूती से लड़ा जाए उसके लिए हम सब मिलकर मजबूती से लड़ने का आश्वासन देंगे.

 

-पटना से विश्वजीत कुमार 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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