भारत में लॉकडाउन प्रदूषण के मोर्चे पर एक वरदान है?


भारत में लॉकडाउन प्रदूषण के मोर्चे पर एक वरदान है?

भारत में कोरोना की वजह से लॉकडाउन जारी है। सड़कें सूनी पड़ी हैं। कामकाज ठप पड़ा है। और लोग घरों में लॉकडाउन पूरी तरह से खुलने का इंतज़ार कर रहे हैं। लेकिन इस सबके बीच एक अच्छी ख़बर यह आई है कि लॉकडाउन की वजह से भारत की राजधानी दिल्ली समेत तमाम दूसरे शहरों में वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण में भारी कमी आई है। सोशल मीडिया पर जालंधर से बर्फीली चोटियां और कांगड़ा से हिमालय दिखाने का दावा करने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं।

 

चलिए यह तो अच्छी बात है। खास बात यह है कि सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय कार्य करता है। जहां लाखों रुपए खर्च किया जाता है। अलग अलग नदियों को साफ करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं फिर भी शायद ही कुछ साफ हो पाती है जीवनदायिनी देश की नदी। अब जबकि नदी इस लॉकडाउन में साफ हो गई तो क्यों नहीं इस पैसे को गरीबों के कल्याण में लगा दिया जाए। हम आपको आंकड़ें दिखाते हैं। सबसे पहले हम बात करते हैं गंगा नदी की। केंद्र सरकार ने 2014-18 तक गंगा की सफाई के लिए 3,897 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च किया। फायदा ढाल के तीन पात।

 

इसके पहले राजीव गांधी ने गंगा सफाई के लिए सबसे पहले पहल की थी, और नीदरलैंड से समझौता भी किया था। जिसको विगत सभी सरकारों ने जारी ऱखा। राजीव गांधी ने शुरुआत में ही 450 करोड़ रुपए खर्च किए। लेकिन रत्तीभर गंगा साफ नहीं हो पाई। खास बात यह है 2014 में जब उमा भारती जी ने मंत्रालय का कामकाज संभाला था तो उस समय केंद्र सरकार ने संकल्प लिया लेकिन गंगा साफ नहीं हो पाई हुआ यह है कि उमा भारती जी ने हार मान ली और मंत्रालय छोड़ दिया।

 

सरकार अब भी करोड़ों रुपए आवंटित किया है गंगा की सफाई के लिए। लेकिन अभी गंगा तो बिना बजट के ही साफ हो गई। साफ है जो काम आदमी से संभव नहीं होता है प्रकृति खुद कर लेती है। और वह कर दिखाई। ऐसी ही कहानी यमुना नदी की है जिसपर 25 वर्षों में 1514 करोड़ रुपए खर्च किए गए और अभी भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी लगातार प्रयासरत हैं कि किसी भी प्रकार से यमुना में वोट चलाया जाए। इसके लिए उन्होंने सफाई भी कराई और कुछ हद तक सफल भी हुए लेकिन पूर्ण सफलता हासिल नहीं हो पाई। वहां भी प्रकृति ने अपना काम कर दिया है।

 

हालांकि एक्सपर्ट की मानें तो यह केवल अस्थायी है। जैसे ही लॉकडाउन खुलेगा तो वही दशा होने में देरी नहीं होगी। लेकिन सवाल यहां यह है कि जब गंगा अपने आप साफ हो गई है तो इतना पैसा जो आवंटित किया गया है उसे क्यों नहीं कोरोना महामारी में लगा दिया जाए। प्रदूषण पर खर्च किए जाने वाले हजारों करोड़ रुपए का सद्पयोग हो। ना कि मंत्रालय को चलाने के लिए उपयोग हो। फिर से जब प्रदूषण बढ़ेगा तो बजट लाया जाएगा।

 

लेकिन अभी प्रदूषण पर फिर से करोड़ों रुपए खर्च करने का कोई मतलब नहीं है। लेकिन मंत्रालय है और इस मंत्रालय को चलाने के लिए ही हजारों करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं और बिना वजह ही खर्च होते रहेंगे। बहरहाल सवाल यहां है कि आखिर पर्यावरण मंत्रालय को कुछ दिनों के लिए आराम करने क्यों नहीं दिया जाना चाहिए। इसकी जगह कोरोना मंत्रालय बनाया जाए। ऐसे भी जब कोरोना का कोई दवाई नहीं है तो ऐसे पर्यावरण से ही काम लिया जाना चाहिए।

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

और पढ़ें »

खास आपके लिए

Senior Citizen Tiffin Seva

Viral अड्डा

  • news
  • news
  • news
  • news
-

वायरल न्यूज़

×