जानें दलितों की कही जानेवाली देवी और बसपा सुप्रीमो मायावती की जीवनी


जानें दलितों की कही जानेवाली देवी और बसपा सुप्रीमो मायावती की जीवनी

दलितों की नेतृत्व करने वाली राजनेत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती भारतीय राजनीति की जानी मानी शख्सियत है। फ़िलहाल उनका सिक्का उत्तर प्रदेश की राजनीति में नहीं चल रहा है लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब बसपा सुप्रीमो उत्तर प्रदेश की सीएम थी। हालांकि, उन पर कई आरोप भी लगे। जिसमें नोएडा में हाथी पार्क और ताजमहल शामिल है। ऐसे में आज हम आपको मायावती के जीवनी के बारे में बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं।

 

मायावती का पूरा नाम मायावती प्रभु दास है। उनका जन्म 15 जनवरी, 1956 को श्रीमती सुचेता कृपलानी हॉस्पिटल, नई दिल्ली में हुआ था। उनके पिता का नाम प्रभु दास था और माता का नाम राम रती था। जबकि भाई का नाम आनंद कुमार है जोकि एक राजनेता हैं। मायावती ने अपनी प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा देश की राजधानी दिल्ली में ग्रहण की। उन्होंने 1975 में दिल्ली के वीमेन कॉलेज से स्नातक की और फिर 1976 में उत्तरप्रदेश के गाज़ियाबाद से  बी.एड की और फिर एल.एल.बी. की पढ़ाई दिल्ली युनिवर्सिटी से ही पूरी की।

 

 

राजनीतिक करियर : मायावती ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत सन1984 में की और इसी वर्ष उन्हें कांशीराम के बहुजन समाजवादी पार्टी में शामिल होने का मौका मिला। इसके बाद सन 1989 में मायावती पहली बार चुनाव लोक सभा चुनाव लड़ी और इस चुनाव में वे विजय होकर संसद पहुंची। उन्होंने अपने कार्यकाल को बेहतरीन तरीके से पूरा किया और फिर 1994 में वे पहली बार राज्य सभा की सदस्य बनीं।

 

इसके एक साल बाद उन्होंने सपा से गठबंधन कर सीएम की कुर्सी संभाली। वे प्रदेश की पहली दलित सीएम थी। ऐसा करने वाली  वे देश की पहली दलित महिला सीएम थी लेकिन मायावती इस पद पर अधिक दिन तक आसीन नहीं रह सकी थी। फिर सन 1996 से 1998 तक वे विधायक के रूप में कार्य की। इसी बीच उन्हें 1997 में दूसरी बार सीएम बनने का मौका मिला लेकिन इस बार भी वे पहली बार की भांति कुछ महीने ही तक सीएम बनी।

 

 

इसके बाद सन 2002 में मायावती ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई और इस तरह मायावती तीसरी बार प्रदेश की सीएम बनी लेकिन इस बार भी बीजेपी ने समर्थन वापस ले लिया। जिससे सीएम मायावती को इस्तीफा देना पड़ा। इसी समय बसपा के संस्थापक और अध्यक्ष कांशीराम का स्वर्गवास हो गया। जिसके बाद वे पार्टी की सर्वसम्मति से पार्टी की अध्यक्ष चुनी गई।

 

इसके बाद मायावती की बसपा पार्टी ने 2007 में स्वतंत्र रूप से विधान सभी चुनाव लड़ा और बहुमत से विजयी हुई। जिसके बाद मायावती चौथी बार प्रदेश की सीएम बनी लेकिन इस बार वे पुरे 5 साल के लिए सीएम बनी और उनका कार्यकाल 2012 तक चला लेकिन अगले चुनाव में सपा ने बाजी मार ली और अखिलेश यादव प्रदेश के सीएम बने। इसके दो वर्ष बाद देश और प्रदेश में मोदी लहर आई जो अब भी जारी है। इस लहर में बसपा और मायावती समेत सभी विपक्षी पार्टियों की राजनीति पर ग्रहण लग गया है।

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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