कोविड-19 से होगा बुजुर्गों का बचाव, मील का पत्थर साबित होगा सुरक्षित दादा – दादी, नाना - नानी अभियान


कोविड-19 से होगा बुजुर्गों का बचाव, मील का पत्थर साबित होगा सुरक्षित दादा – दादी, नाना - नानी अभियान

• पीरामल फाउंडेशन द्वारा चलाया जा रहा अभियान

• कॉल कर परिवार वालों से बुजुर्गों की सेहत की ली जा रही जानकारी 

• 1 लाख लोगों तक पहुंचने का रखा गया है लक्ष्य 

• चार स्तर पर बुजुर्गों को लाभ पहुँचाने की पहल 

 

बेगूसराय/ 1 जून:

कोरोना के बढ़ते संक्रमण एवं सटीक उपचार के आभाव ने समुदाय के कुछ विशेष वर्गों के लिए स्वास्थ्य चुनौतियों को बढ़ा दिया है. जिसमें बुजुर्गों के संक्रमित होने पर अधिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने की की पुष्टि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित अन्य रिसर्च संस्थानों के द्वारा पूर्व में ही की गयी है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार बुजुर्गों को कोविड-19 संक्रमण होने से सामान्य लोगों की तुलना में दोगुना अधिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या का सामना करना पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में परिवार के बुजुर्गों को कोरोना से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी सरकार के साथ परिवार के लिए बढ़ गयी है. इसे ध्यान में रखते हुए पीरामल फाउंडेशन ने परिवार के बुजुर्गों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से "सुरक्षित दादा – दादी, नाना - नानी अभियान" की शुरुआत की है. इस अभियान के तहत परिवारों को कोरोना वायरस से संबंधित जानकारी और संभावित मदद दी जा रही है। समुदाय में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को संक्रमण से बचाने की दिशा में यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा. 

 

 

नीति आयोग के द्वारा पीरामल फाउंडेशन के साथ की गयी शुरुआत: 

 

 

पीरामल फाउंडेशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक रोबिन राज हंस ने बताया कि "सुरक्षित दादा – दादी, नाना - नानी अभियान" की शुरुआत 5 मई को नीति आयोग के द्वारा पीरामल फाउंडेशन के साथ मिलकर की गई. जिसमें बेगूसराय सहित राज्य के 27 जिले शामिल हैं. जिलाधिकारी के नेतृत्व में चल रहे आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत इस अभियान की शुरुआत की गयी है. कोराना वायरस बुजुर्गों में अपना असर जल्दी दिखाता है. इसलिए इस अभियान को बुजुर्गों के लिए खास तौर पर चलाया जा रहा है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य कोरोना संक्रमण से बुजुर्गों को सुरक्षित रखना है एवं इसके लिए बुजुर्गों की हर संभव मदद करनी है.

 

1 लाख लोगों तक पहुंचने का रखा गया है लक्ष्य: 

 

 

रोबिन राज हंस ने बताया कि पीरामल फाउंडेशन पिछले 2 वर्षों से आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत से कार्यों को संपादित कर रहा है. बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम जाती है एवं इस लिहाज से सुरक्षित दादा दादी नाना नानी अभियान की शुरुआत ख़ास कर बुजुर्गो को ध्यान में रख कर की गयी है. अभियान को सफल बनाने के लिए जिले मे 550 स्वयं सेवकों को तैयार किया गया है. ये वॉलंटियर हर घर में फोन कर उनके परिवार में बुजुर्गों की सेहत की जानकारी लेते हैं. साथ ही उन्हें कोरोना की बचाव एवं रोकथाम के विषय में विस्तार से जानकारी भी देते हैं. उन्होंने बताया कि इस अभियान की सफलता के मद्देनजर जिले में 1 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अभी तक 3500 से ज्यादा लोगो से बात हो चुकी है. 

 

 

चार स्तर पर बुजुर्गों को लाभ पहुँचाने की पहल:  

 

     

पीरामल फाउंडेशन के प्रोग्राम लीडर राकेश कुमार ने बताया कि इस अभियान के तहत पर चार स्तर पर बुजुर्गों को लाभ पहुँचाने की कोशिश की जा रही है. जिसमें वॉलंटियर पहले तो बुजुर्गों को कॉल कर कोरोना से बचाव की जानकारी देते हैं. यदि किसी बुजुर्ग को कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती है तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से समन्वय स्थापित कर उनके उपचार की व्यवस्था भी करते हैं. साथ ही यदि बुजुर्ग को खाद्य सामग्री की कमी होती है तो जिले के पीडीएस ईकाई से समन्वय स्थापित कर उनकी मदद की जाती है. इसके अलावा किसी बुजुर्ग को मदद की आवश्यकता होने पर पंचायत के मुखिया या जनप्रतिनिधि से सहायता दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान में  फाउंडेशन की टीम तथा सभी स्वयं सेवक साथी मिलकर लोगों की सहायता कर रहे हैं। राकेश कुमार ने कोरोना संकटकाल में किसी भी स्वयंसेवी संस्था या समाजसेवी दवाई, भोजन का सहयोग देकर बुजुर्गों की मदद करने की भी अपील की

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इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल


इस मंत्री ने गलती से ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, हुए ट्रोल

आज सुबह से सोशल मीडिया पर एक खबर को काफी तेजी से वायरल किया जा रहा है. दरअसल, कर्नाटक में BS येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली BJP सरकार के मंत्रियों ने बीते मंगलवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली. इस दौरान जब BJP नेता और विधायक मधु स्वामी पद और गोपनीयता की शपथ ले रहे थे, तभी उन्होंने गलती से बतौर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. 

 

 

बता दें कि, मधु स्वामी जब शपथ ले रहे थे तो उन्हें मंत्री बोलना था, लेकिन जुबान फिसलने के चलते वह मुख्यमंत्री बोल पड़े. अब इस खबर को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है. खास बात ये है कि इस दौरान CM येदियुरप्पा भी मौके पर मौजूद थे और मधु स्वामी की इस गलती पर मुस्कुरा दिए. इतना ही नहीं येदियुरप्पा ने मधु स्वामी को बाद में गले भी लगाया.

 

गौरतलब है कि, बीते मंगलवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल वजुभाई वाला ने 17 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलायी. जिन विधायकों को मंत्री पद से नवाजा गया है, उनमें बी. श्रीरमुलु, सीटी रवि, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केएस ईश्वरप्पा और पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार का नाम शामिल है. बता दें कि, येदियुरप्पा के 26 जुलाई को CM बनने के बाद उनके मंत्रिमंडल का यह पहला विस्तार है. उन्होंने 29 जुलाई को विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित किया था. 

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22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों


22 वर्ष पहले दफ़न हुए व्यक्ति का नहीं गला शरीर, मिला ज्यों का त्यों

उतर-प्रदेश के बांदा जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, कई लोग इसे देखकर खुदा का करिश्मा मान रहें हैं तो वहीं कई लोग नेक इंसाल का दर्जा दे रहें हैं. बताया जा रहा है कि, यहां 22 वर्ष पहले कब्र मे दफनाए गए एक शख्स का जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला है.

 

ये मामला तब सामने आया जब मूसलाधार बारिश के चलते कब्रिस्तान में मिट्टी कटने से एक कब्र धंस गई और उसमें  22 वर्ष पहले दफन एक शख्स का कफन में लिपटा जनाजा़ दिखने लगा. यहां देखते ही देखते मौके पर काफी लोगों पहुंच गए. जब कफन में लिपटी लाश को निकाला गया तो वहां मौजूद सैकड़ों लोग देखकर दंग रह गए. क्योंकि 22 सालों बाद भी लाश ज्यों कि त्यों निकली.

 

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दरअसल, ये मामला उतर-प्रदेश के जिले बांदा के बबेरू कस्बे के अतर्रा रोड स्थित घसिला तालाब के कब्रिस्तान की है. यहां मूसलाधार बारिश से कई कब्रों की मिट्टी बह गई और एक कब्र में दफन जनाजा़ बाहर दिखने लगा. इसके बाद लोगों ने कब्रिस्तान कमेटी को इसकी जानकारी दी. कब्रिस्तान कमेटी के सदस्‍यों द्वारा जब कब्र की धंसी हुई मिट्टी को हटाकर देखा गया, तो उसमें दफनाया गया जनाजा ज्यों का त्यों पड़ा मिला.

 

गौरतलब है कि, इस कब्र में 22 वर्ष पहले 55 वर्षीय पेशे से नाई नसीर अहमद नाम के शख्स को दफनाया गया था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नसीर अहमद पुत्र अलाउद्दीन निवासी कोर्रही, थाना बिसंडा बबेरू में नाई की दुकान थी. उन्‍हें लगभग 22 वर्ष पहले दफन किया गया था. जबकी दूसरी तरफ मृतक नसीर के एक रिश्तेदार बताते हैं कि उनका कोई बेटा नहीं था. 

 

22 वर्ष पहले उनका निधन हुआ था, जिसके बाद उनलोगों ने ही उनके शव को दफनाया था. लेकिन, आज उनका जनाजा मिटटी धंसने की वजह से बाहर निकल आया. न शव ख़राब हुई थी और न ही कफ़न पर कोई दाग लगा था. हालंकी, बाद में स्थानीय मौलानाओं की मौजूदगी में शव को कल देर रात उसे दूसरी कब्र में दोबारा से दफन किया गया.

 

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