केजरीवाल का 'ऑड-ईवन' भ्रष्टाचार करने का एक और माध्यम है-मनोज तिवारी


केजरीवाल का 'ऑड-ईवन' भ्रष्टाचार करने का एक और माध्यम है-मनोज तिवारी

केजरीवाल सरकार प्रदूषण रोकने में पिछले 55 महीनों में पूरी तरह विफल रही है। आज एक बार फिर दिल्ली की जनता को गुमराह करने के लिए केजरीवाल सरकार ने प्रदूषण को रोकने के लिए विभिन्न उपाय बताकर दिल्ली को गुमराह करने की कोशिश की है। केजरीवाल के प्रदूषण रोकने के उपायों पर तंज कसते हुये दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रदूषण को कम करने के लिए एक भी काम नहीं किया।

 

केन्द्र की मोदी सरकार ने 2014 से ही प्रदूषण के खिलाफ जंग शुरू कर दी थी, जिससे दिल्ली में प्रदूषण लगातार कम हो रहा है। जिसका श्रेय लेने की कोशिश केजरीवाल विज्ञापनों के माध्यम से कर रहे हैं, लेकिन केजरीवाल की अब झूठ-फरेब की राजनीति चलने वाली नहीं है, क्योंकि दिल्ली की जनता के सामने उनके वादों की पोल खुल चुकी है।

 

मनोज तिवारी ने कहा कि केजरीवाल ने जनवरी, 2016 और अप्रैल, 2016 में प्रदूषण रोकने के नाम पर आॅड-ईवन की शुरूआत की थी जिस पर उन्होंने 20 करोड़ रूपये से अधिक खर्च किये, लेकिन जांच में पाया गया कि आॅड-ईवन के दौरान दिल्ली में प्रदूषण लेवल सामान्य दिनों से अधिक था। जब सामन्य दिनों मंे दिल्ली का प्रदूषण आॅड-ईवन से कम था तो केजरीवाल की यह व्यवस्था पूरी तरह से फेल साबित हुई है, बल्कि इसके नाम पर भारी भ्रष्टाचार किया गया।

 

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केजरीवाल सरकार एक बार फिर आॅड-ईवन की शुरूआत करके दिल्ली के लोगों को परेशान करने की मुहिम शुरू करने जा रही है। केजरीवाल ने पहले भी प्रदूषण और टैफिक के नाम पर आॅड-ईवन शुरू करके पूरी दिल्ली की परेशानी बढ़ा चुके हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल आने वाले पांच महीनों में सब कुछ शुरू कर देंगे जो उन्होंने पिछले 55 महीनों में नहीं किय था।

 

लेकिन दिल्ली की जनता केजरीवाल के झांसे में आने वाली नहीं है, क्योंकि अपने कार्यकाल में केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों को सिर्फ धोखा दिया है और भ्रष्टाचार करने में एक नया रिकार्ड बनाया है। दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को सुचारू करने के लिए 20 हजार बसों की जरूरत है जबकि दिल्ली में सिर्फ 3000 बसें बची हैं, उसमें से भी अधिकांश की हालत खस्ता है।

 

मनोज तिवारी ने कहा कि केजरीवाल वाहनों से निकलने वाले काले धुंओं से होने वाले प्रदूषण की जांच करने में जहां असफल रहे हैं वहीं पर दूसरी ओर उन्होंने स्वीकार कर लिया है कि प्रदूषण कम होने में उनका कोई योगदान नहीं है। केन्द्र सरकार द्वारा मोटर वाहन कानून-2019 सख्ती से लागू करने पर केजरीवाल के प्रदूषण जांच केन्द्रों की पोल खुल गई है।

 

अभी तक केजरीवाल दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिये सिर्फ करोड़ों रूपये के विज्ञापन देने के सिवाये कुछ भी नहीं किया है, जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार 2014 से दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिये काम कर रही है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण प्रदूषण में लगातार कमी आई है जिससे पीएम-2.5 दिल्ली में 150 से कम होकर 115 हो गया है और पीएम-10, 300 से घटकर 245 हो गया है।

 

तिवारी ने कहा कि दिल्ली सरकार खुद काम न करके केन्द्र सरकार के कामों का श्रेय लेने का खेल खेल रही है, लेकिन चोरी और झूठ के आधार पर अब दिल्ली में केजरीवाल की राजनीति सफल होने वाली नहीं है। लोग समझते हैं कि किसने क्या किया। बीएस-6 के पेट्रोल-डीजल वाहन की शुरूआत केन्द्र सरकार के अथक प्रयास से हुई। बीएस-6 वाहनों के लिए दिल्ली में पेट्रोल मिलना शुरू हो गया है। यह वाहन 1 अप्रैल, 2020 से मिलने शुरू हो जायेंगे। केन्द्र सरकार के इन प्रयासों से दिल्ली में वाहन प्रदूषण में 80 प्रतिशत कमी आयेगी।

 

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तिवारी ने कहा कि केन्द्र सरकार के सहयोग से बदरपुर थर्मल पावर प्लांट को बंद करवाया गया और अनेक प्रदूषणकारी उद्योगों को आदेश देकर उनके प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये उचित कदम उठाये गये। ईंट-भट्ठे से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए लेटेस्ट जिग-जेग प्रणाली का उपयोग किया गया, जिससे प्रदूषण की मात्रा में कमी आई है।

 

सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को दंडित भी किया गया जिससे दिल्ली में प्रदूषण में काफी कमी आई है और दिल्ली की आबोहवा भी स्वच्छ हुई है। इसका श्रेय मोदी सरकार को जाता है। मोदी सरकार ने 135 किलो मीटर का ईस्टर्न पेरीफेरल ईवे (गाजियाबाद, नोएडा फरीदाबाद, पलवल एवं कुंडली) एवं 135 किलो मीटर वेस्टर्न पेरीफेरल ईवे (कुंडली, बहादुरगढ़, गुरूग्राम, पलवल) का निर्माण किया और मेरठ एक्सप्रेस वे के एक चरण का निर्माण हो गया है और दूसरे चरण का भी अगले 4 महीनों में निर्माण पूरा हो जायेगा।

 

एक्सप्रेस-वे बनने से दिल्ली में लगभग 60 हजार वाहन आना बंद हो गये हैं। जिन वाहनों का दिल्ली में कोई काम नहीं था, ऐसे वाहन को बाईपास मिलने के कारण वो बाहर से ही जाने लगे हैं। जो वाहन दिल्ली होकर जाते हैं उन पर प्रदूषण सेस लगाया गया जिससे दिल्ली सरकार ने एक मोटी रकम वसूली लेकिन प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने उस राशि का कोई भी उपयोग नहीं किया है।

 

तिवारी ने कहा कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने प्रदूषण कम करने को लेकर 5000 इलैक्ट्रिक बसें खरीदने की बात कही थी, लेकिन जमीन पर केवल 25 बसें आई हैं जो कि कलस्टर बसें हैं। केन्द्र सरकार ने सीएनजी लाकर प्रदूषण कम करने में अहम भूमिका निभाई। केजरीवाल सरकार को चैथे मेट्रो फेज के कामों की मंजूरी देनी थी जिसे जानबूझ कर राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए रोक कर रखा। दिल्ली के लोगों ने केजरीवाल की राजनीतिक बिदाई का मन बना लिया है जिसका दिल्ली नगर निगम और लोकसभा में भजापा की भारी जीत से यह स्पष्ट हो चुका है कि दिल्ली की जनता क्या चाहती है।

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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