महाशिवरात्री : 'कैलाश पर्वत' जिसपर आजतक नहीं चढ़ पाया कोई इंसान


महाशिवरात्री :  'कैलाश पर्वत' जिसपर आजतक नहीं चढ़ पाया कोई इंसान

आज महाशिवरात्री का पर्व देश सहित पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया जा रहा है. शिव भक्त आज शिवालय जाकर देवों के देव भगवान शिव यानि महादेव को जल चढ़ाकर अपने और अपने परिवार की सुख शांति और समृद्दि की कामना कर रहे है. भगवान शिव देवों के देव है ये बात सभी जानते है. कहते है कि भगवान शिव की पूजा देवी देवतागण भी करते है फिर आम मनुष्य की क्या बात. भगवान शिव से जुड़ा है “कैलाश पर्वत”.

 

 

जी हां वहीं कैलाश पर्वत जिसे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है. कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित एक पर्वत श्रेणी है. इसके पश्चिम तथा दक्षिण में मानसरोवर तथा राक्षसताल झील हैं.कहते है कि भगवान शिव इसी पर्वत पर अपने पूरे परिवार के साथ निवास करते है. नासा के वैज्ञानिक भी इस बात से हैरान हैं कि  ऐसी कौन सी शक्ति हैं जो लोगों को वहां तक नहीं पहुंचने देती हैं. जबकि इसी उंचाई मात्र एवरेस्ट से लगभग 2000 मीटर कम यानी 6638 मीटर है.

 

 

मानव ने भले ही दुनिया की उंची से उंची चौटियों पर चढ़ाई कर ली हो पर केलाश पर्वत पर आज तक कोई मनुष्य चढ़ाई नहीं कर पाया है. कैलाश पर्वत पर चढ़ने की आखिरी कौशिश 2001 में की गई थी जब चीन ने स्पेन की एक टीम को पवित्र कैलाश पर्वत पर चढ़ाई करने की इजाजत दी थी पर ये टीम भी इस पर चढ़ पाने में सफल नहीं हो सकी. वेदों में कैलाश पर्वत को ब्रह्मांड का अक्ष और विश्‍व वृक्ष कहा गया है एवं इसी बात का जिक्र रामायण में भी किया गया है.

 

 

हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत का बहुत महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। लेकिन इसमें सोचने वाली बात ये है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को अभी तक 7000 से ज्यादा लोग फतह कर चुके हैं, जिसकी ऊंचाई 8848 मीटर है, लेकिन कैलाश पर्वत पर आज तक कोई नहीं चढ़ पाया.कैलाश पर्वत सदियों से रहस्य बना हुआ है. कुछ लोगों का मानना है कि कैलाश पर्वत पर शिव जी निवास करते हैं और इसीलिए कोई जीवित इंसान वहां ऊपर नहीं पहुंच सकता।

 

 

मरने के बाद या वह जिसने कभी कोई पाप न किया हो, केवल वही कैलाश फतह कर सकता है. कैलाश पर्वत पर चढ़ाई करने वालों ने पर्वतरोहियों ने पर्वत की चढ़ाई के दौरान किए अपने कई  अनुभवों को साझा किया है. ऐसा भी माना जाता है कि कैलाश पर्वत पर थोड़ा सा ऊपर चढ़ते ही व्यक्ति दिशाहीन हो जाता है.  एक पर्वतारोही ने अपनी किताब में लिखा था कि उसने कैलाश पर्वत पर चढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन इस पर्वत पर रहना असंभव था, क्योंकि वहां शरीर के बाल और नाखून तेजी से बढ़ने लगते हैं. इसके अलावा कैलाश पर्वत बहुत ही ज्यादा रेडियोएक्टिव भी है.

 

 

आज तक कोई मनुष्य इस पवित्र पर्वत पर नहीं चढ़ पाया. जिसने भी चढ़ने की कोशिश की, उसकी मृत्यु हो गई. इस बारे में बहुत-सी बातें प्रचलित हैं. कहा जाता है कि 19 वीं और 20 वीं सदी के शुरू में कुछ पर्वतारोहियों ने इस पर चढ़ने की कोशिश की थी और गायब हो गए थे. इसके अलावा रूसी डॉक्टर एर्नस्ट मुल्दाशिफ ने अपने संस्मरणों में लिखा है कि उन्हें एक बार साइबेरियाई पर्वतारोही ने बताया था कि कुछ पर्वतारोही कैसे कैलाश पर्वत पर एक निश्चित बिन्दु तक पहुँचे. उसके बाद वे अचानक बूढ़े दिखाई देने लगे. इसके एक साल बाद ही बुढ़ापे की वजह से उनकी मृत्यु हो गई.

 

 

 

प्रसिद्ध रूसी चित्रकार निकोलाय रेरिख़ को यह विश्वास था कि कैलास के आसपास के इलाके में शम्बाला नाम का एक रहस्यमयी राज्य है. हालांकि कहा जाता है कि 92 साल पहले यानी साल 1928 में एक बौद्ध भिक्षु मिलारेपा ही कैलाश पर्वत की तलहटी में जाने और उस पर चढ़ने में सफल रहे थे. कहा जाता है कि वह इस पवित्र और रहस्यमयी पर्वत पर जाकर जिंदा वापस लौटने वाले दुनिया के पहले इंसान थे. आपको बता दे कि इसका उल्लेख पौराणिक साहियों में भी मिलता है.

 

 

हिन्दु धर्म के अलावा कैलाश पर्वत को बौद्ध, और जैन धर्म में भी काफी पवित्र स्थान माना गया है. सूर्य के स्थिर होने पर कैलाश पर्वत पर एक परछाई बनती है जोकि धार्मिक चिह्न स्‍वास्तिक की तरह दिखाई देता है. हिंदू धर्म में इसे अत्‍यंत शुभ चिह्न माना जाता है। इसके अलावा पर्वत पर गिरती बर्फ से ऊं का आकार बनता है।.ये भी एक रहस्‍य ही है. चीन की सरकार ने कैलाश पर्वत की धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए पर्वतारोहियों पर पाबन्दी लगा रखी है.

 

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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