गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान दी जाने वाली सेवाओं को नियमित करने के निर्देश


गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान दी जाने वाली सेवाओं को नियमित करने के निर्देश

• कार्यपालक निदेशक ने पत्र लिखकर दिए निर्देश 

• अप्रैल से जून माह तक संभावित प्रसवों को चिन्हित कर दी जाएगी स्वास्थ्य सुविधा  

• आशा एवं आशा फैसिलिटेटर सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए गर्भवतियों के घरों का करेंगी दौरा 

• जटिल प्रसव वाली महिलाओं को अस्पताल में मिलेगी समुचित देखभाल 

 

भागलपुर/ 20 अप्रैल:

कोरोना संक्रमण के ख़िलाफ़ आज पूरा विश्व जंग कर रहा है. कोरोना के बढ़ते संक्रमण से राज्य भी अछूता नहीं है. संक्रमण के बढ़ते प्रसार ने जहाँ सरकार के लिए चुनौतियाँ खड़ी की है, वहीँ इसके कारण मातृत्व स्वास्थ्य सेवाएं भी बाधित हुयी है. गर्भवती माताओं को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की नियमितता काफ़ी जरुरी है ताकि जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रह सके.

 

इसे ध्यान में रखते हुए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने सभी सिविल सर्जन को पत्र लिखकर गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान दी जाने वाली जरुरी स्वास्थ्य सेवाओं को नियमित करने के उद्देश्य से जरुरी दिशानिर्देश दिया है. पत्र के माध्यम से प्रसव पूर्व जाँच, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाएं, गर्भावस्था के दौरान दी जाने वाली जरुरी दवाएं एवं गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्टिंग जैसे अन्य जरुरी मातृव स्वास्थ्य सेवाओं को कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पहले की तरह नियमित करने के निर्देश दिया गया है.

 

अप्रैल से जून माह तक संभावित प्रसवों को चिन्हित कर दी जाएगी स्वास्थ्य सुविधा:

पत्र के माध्यम से तीन माह (अप्रैल, मई एवं जून) में जिन गर्भवती महिलाओं की एस्टीमेटेड डेलिवरी डेट (संभावित प्रसव दिन) हैं, उनके लिए स्वास्य्म संस्थानों को अनिवार्य रूप से चिन्हित कर लाइन लिस्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं. एस्टीमेटेड डेलिवरी डेट के एक सप्ताह के पूर्व से लगातार प्रतिदिन सभी चिन्हित गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य समस्या की जानकारी एकत्रित करने एवं अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य संस्थानों पर लाकर प्रसव करना सुनिश्चित करने की बात कही गयी है.

 

पत्र में बताया गया कि गर्भवती महिलाओं को घर से अस्पताल लाने एवं उन्हें वापस घर पहुँचाने के लिए 102 नंबर की एम्बुलेंस का उपयोग किया जाए. साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं रेफ़रल अस्पताल एवं अनुमंडलीय अस्पताल में प्रसूति को सभी जरुरी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाए. 

 

उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जाँच के लिए एम्बुलेंस: 

पत्र में निर्देशित गया है कि उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव पूर्व जाँच की सुविधा प्राप्त हो. साथ ही उनके लिए एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराए जाने की भी बात कही गयी है. कोविड-19 प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए अस्पताल में आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसव पूर्व जाँच की सुविधा प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं. सभी गर्भवती माताओं को दूसरे तिमाही से 180 आयरन की गोली, 360 कैल्शियम की गोली एवं कृमि से बचाव के लिए 1 एल्बेन्डाजोल की गोली भी प्रदान करना सुनिश्चित करने की बात कही गयी है. 

 

आशा एवं आशा फैसिलिटेटर द्वारा गृह भ्रमण: 

आशा एवं आशा फैसिलिटेटर कोविड-19 में उत्पन्न विषम स्थितियों में भी गर्भवती महिलाओं के घरों का दौरा कर रही हैं. पत्र में कहा गया है कि जिन महिलाओं की संभावित प्रसव दिन नजदीक हैं, उनके घरों का दौरा करने के दौरान आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को सामाजिक दूरी एवं अन्य कोविड-19 बचाव प्रोटोकॉल का पालन करने की जरूरत है. साथ ही आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को गृह भ्रमण कर चिन्हित गर्भवती महिलाओं के संस्थागत प्रसव के लिए योजना तैयार कर संबंधित स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं.

 

जटिल प्रसव वाली महिलाओं को मिले बेहतर स्वास्थ्य सेवा: 

जटिल प्रसव वाली महिलाओं को (जैसे सीवियर एनीमिया, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह) को एस्टीमेटेड डेलिवरी डेट के पूर्व से अस्पताल लाकर उनकी उचित देखभाल करने की बात कही गयी है. जबकि सामान्य गर्भवती महिलाओं को आशा की सहायता से एएनएम द्वाराफ़ोन पर संपर्क स्थापित कर उन्हें ससमय स्वास्थ्य संस्थान पर लाकर संस्थागत प्रसव कराने के निर्देश दिए गए हैं. कोविड-19 की गंभीरता को देखते हुए संक्रमण रोकथाम प्रोटोकॉल का अनुसरण करते हुए स्वास्थ्य संस्थानों पर मातृत्व सेवाएं प्रदान करने के निर्दश दिए गए हैं.

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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