भारत ने मलेशिया के PM महातिर मोहम्मद को दिया जवाब, 'अपनी मर्यादा में रहें, नहीं तो'


भारत ने मलेशिया के PM महातिर मोहम्मद को दिया जवाब, 'अपनी मर्यादा में रहें, नहीं तो'

देश भर में नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर बबाल मचा हुआ है। ये बबाल मणिपुर, आसाम, बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हैदराबाद सहित दिल्ली में पूरी तरह से फ़ैल गयी है। हर जगह लोग मोदी सरकार के इस कानून का जमकर विरोध कर रहे हैं। इस विरोध में अब तक रेलवे को कुल 88 करोड़ रूपये की सम्पत्ति का नुकसान हुआ है। जबकि सरकारी रिपोर्ट आनी बाकी है कि इस विरोध में निजी और सरकारी सम्पत्ति का कितना नुकसान हुआ है। ऐसे में सरकार और विरोध करने वाले समुदाय के बीच खींचा तानी जारी है।

 

इस बीच विश्व समुदय भी नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर दो खेमे में बंट गया है। इस बंटवारे में मुस्लिम समर्थक देश भारत के विरोध में हैं। जबकि अपने धर्म और देश को सर्वोपरि मानने वाले देश भारत के समर्थन में है। जिसमें फ्रांस, अमेरिका और जर्मनी शामिल है। जबकि भारत के विरोध में पाकिस्तान, तुर्की और मलेशिया जैसे देश है। जिसने पूर्व में भी भारत के किसी भी कानून अथवा एजेंडे को स्वीकार नहीं किया है और इसका घोर विरोध विश्व पटल पर भी किया है।

 

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वैसे विश्व समुदाय ने पाकिस्तान सहित तुर्की और मलेशिया के विरोध का खंडन किया है। इस बारे में अमेरिका की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। जहां धर्म, जाति, समुदाय आदि का विशेष ख्याल रख कानून बनाये जाते हैं। ऐसे में भारत के लिए नागरिकता संशोधन क़ानून एक साहसिक और ऐतिहासिक कदम है।

 

वहीं दूसरी तरह मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने नागरिकता संशोधन क़ानून की घोर निंदा करते हुए कहा कि मैं देखकर दंग रह गया हूं कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में इस तरह के कानून बनाये जा रहे हैं। ये कैसा ढोंग है, और क्या ये मुस्लिम की नागरिकता छीनने के लिए बनाया गया है। हम इसका विरोध करते हैं।

 

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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर हम भी अपने देश में नागरिकता संशोधन क़ानून को लागू कर दें तो क्या होगा। ऐसे में तो सरहदें धर्म को भी बांट देगी। वहीं भारत ने मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद नागरिकता संशोधन क़ानून पर दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा कि मलेशिया भारत के आंतरिक मामले में दखल दे रहा है, जोकि गलत है। मलेशिया के लिए बेहतर होगा कि वह अपने देश की समस्या पर ध्यान दें।

 

आपको बता दें कि कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद से ही भारत और मलेशिया के संबंध में दूरियां बढ़ी है। जब मलेशिया ने न केवल पाकिस्तान का समर्थन किया, बल्कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के खिलाफ बयानबाजी भी की थी। जिसका भारत ने मुंहतोड़ जबाव दिया था। अब देखना यह है कि भारत कब तक मलेशिया के विरोध का जबाव केवल शब्दों में देता रहेगा और कब मलेशिया के खिलाफ कोई राजनयिक कार्रवाई की जाती है।

 

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बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार


बेबाक पत्रकार रवीश कुमार को मिला ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

हिंदी पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके NDTV के रवीश कुमार को बेस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. ये अवार्ड 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस अवार्ड को ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आपको बता दें कि, सम्मान के लिए पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया की, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ 

आपको बता दें कि, रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह सम्मान मिल चुका है.

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28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज


28,000 और जवानों को कश्मीर में किया गया तैनात, हाई अलर्ट पर फोर्सेज

हाल ही में जम्मू कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती के एक हफ्ते के भीतर बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने कश्मीर 28,000 और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती कर दिया है. इसके साथ ही सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर रहने को कहा है.

जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में पहचल शुरु हो गई है और लोगों ने तेजी से राशन पानी जुटाना शुरु कर दिया है. इस बीच राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सरकार के इस अप्रत्याशित कदम पर ट्वीट कर कहा कि “ऐसी कौन सी वर्तमान परिस्थिति है जिसके चलते केंद्र सरकार ने सेना और वायुसेना को ऑपरेशनल अलर्ट पर ऱखा हुआ है, निश्चित तौर पर यह मामला 35ए अथवा परिसीमन से जुड़ा नहीं हैं. अगर सच में इस तरह का कोई अलर्ट जारी किया गया है तो यह बिल्कुल अलग चीज है.”

खास बात यह है कि इन सभी सुरक्षाबलों की राज्य के अति संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भारी मात्रा में तैनाती की गई हैं. इसके अलावा राज्य के सभी जगहों पर अर्धसैनिक बलों ने कब्जा कर लिया है और प्रदेश पुलिस सिर्फ प्रतीकात्मक बन कर रह गई है.

घाटी में इतनी अधिक मात्रा में सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर हमारे सूत्रों का कहना है कि सरकार 370 और 35ए को लेकर कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि सीमापार से आतंकवादी कश्मीर में बड़ा हमला करने की फिराक में हैं जिसके मद्देनजर किया है.

लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि सरकार यह सब ध्यान भटकाने के लिए कह रही है जबकि असल में सरकार कुछ अलग और बड़ा करने की तैयारी कर रही है.

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