ऑनलाइन शिक्षा में अपार संभावनाएं- प्रो. केके अग्रवाल, चेयरमैन,नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडेशन


ऑनलाइन शिक्षा में अपार संभावनाएं- प्रो. केके अग्रवाल, चेयरमैन,नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडेशन

नईदिल्ली-

सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च और हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी एंड साइंस ने संयुक्त रूप से वेबिनार का आयोजन किया। इस खास वेबिनार में विषय था ऑनलाइन एजुकेशन और एसेसमेंट। इस वेबिनार में 21 राज्यों के 484 शिक्षाविद् और छात्रों ने भाग लिया। इस वेबिनार को संबोधित करते हुए नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडेशन के चेयरमैन प्रो. केके अग्रवाल ने कहा कि आज शिक्षा में बड़ा चैलेंज आ गया है। देश में हर शैक्षणिक बोर्ड, कॉलेज, विश्वविद्यालय के पाठयक्रम अलग अलग हैं जिसका अपना एक अलग अर्थशास्त्र है। पाठयक्रम की असमानता एक बहुत बडी चुनौती है, जो ऑनलाइन शिक्षा के समुचित क्रियान्वयन में आडे आ सकती है। प्रो. केके अग्रवाल ने कहा कि भारत में ऑनलाइन शिक्षा के सामने बहुत सारे चुनौतियां मुंह बाएं खड़ी है। खास तौर पर क्लासेंस मे जब छात्र चिंटिंग कर देते हैं तो ऑनलाइन में इसकी संभावनाएं काफी बढ़ जाती है इसे रोकना काफी मुश्किल है।

वेबिनार को संबोधित करते हुए एआईसीटीई के मेंबर सेक्रेटरी प्रो राजीव कुमार ने कहा कि तकनीकी समझ ऑनलाइन शिक्षा की एक बडी समस्या है। अगर तकनीकी शिक्षा से जुड़े अध्यापकों और विद्यार्थियों को छोड़ दें तो बाकी लगभग सभी विषयों से जुड़े शिक्षकों और शिक्षार्थियों को तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ता है। प्राइमरी और माध्यमिक स्तर पर यह समस्या बहुत बड़ी समस्या है। राजीव कुमार ने कहा कि आजकल छोटे छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक टेबलेट, लैपटॉप, स्मार्टफोन के सहारे पढाया जा रहा है। ऐसे में अगर तकनीकी समझ किसी भी स्तर पर हावी होती है तो सिखने की क्षमता की सीधे प्रभावित करती है।

एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलोजी के वीसी प्रो. संदीप संचेती ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षण को सामान्यतः कक्षाओं की तरह नहीं चलाया जा सकता है। ऑनलाइन शिक्षा की कई दुष्प्रभाव भी हैं, लेकिन इसमें कई अपार संभावनाएं हैं।

हिंदुस्तान यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो के पी आईसेक ने कहा कि सरकार और शिक्षा जगत के लोग ऑनलाइन शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं लेकिन भारत जैसे बड़े देश में ऑनलाइन शिक्षा में आने वाली बाधाओं से पार पाना है। जिसके लिए अभी कार्य करना होगा कमियों को दूर करने की जरूरत भी है।

 

सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च के प्रेसिंडेंट व स्प्रिंगर नेचर के एमडी संजीव गोस्वामी ने वेबिनार में शामिल सभी शिक्षाविदों और छात्रों को निष्कर्ष रूप से कहा कि आज ऑनलाइन शिक्षा में कई तरह की समस्याएं हैं लेकिन इसे दूर करने के लिए हमें सामंजस्य बनाने होंगे। लेकिन यह भी तय है कि क्लासरूम की क्षतिपूर्ति ऑनलाइन से कर पाना भारत के संदर्भ में काफी मुश्किलें हैं। सेंटर फोर एजुकेशन एंड ग्रोथ रिसर्च के डायरेक्टर रविश रोशन ने इस वेबिनार में शामिल शिक्षाविदों को धन्यवाद देते हुए कहा कि सीईजीआर शिक्षा में मूलभूत कमियों और आने वाले चैंलेंज से पार पाने के लिए सजेशन पर कार्य करता है और सरकार को भी अपने सुझाव समय समय पर देता रहा है। आज जिस प्रकार से शिक्षाविदों ने खुलकर ऑनलाइन शिक्षा पर बात यह अभूतपूर्व वेबनार रहा है।

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अब PHD करना हुआ असान, UGC करने जा रही ये बलदाव


अब PHD करना हुआ असान, UGC करने जा रही ये बलदाव

देश में शिक्षा को सुधारने के लिए सरकार एक नये प्लान पर विचार कर रही है. इससे खासकर PHD करने वाले स्टूडेंट्स को अधिक लाभ मिलेगा और समय की बचत होगी. दरअसल, देशभर की तमाम यूनिवर्सिटीज के यूजी प्रोग्राम्स की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन इस मामले पर विचार कर रहा है. अगर ऐसा होता है तो छात्र पाठ्यक्रम के बाद सीधे PHD कर सकेंगे. साथ ही छात्र का पोस्ट ग्रेजुएट होना भी जरूरी नहीं होगा. 

 

बता दें कि विश्वविद्यालयों में वर्तमान में स्नातक पाठ्यक्रम 3 वर्ष का और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम 2 वर्ष का होता है. इसके बाद ही किसी छात्र को PHD में प्रवेश मिल सकता है. दरअसल UGC देश की शिक्षा नीति में बड़े स्तर पर फेरबदल करने जा रहा है. इसके लिए UGC ने एक विशेषज्ञ समिति गठित की है. 

 

इसी कमेटी ने शिक्षा नीति में बदलाव के लिए UGC को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. इसमें ऐसी ही कई सिफारिशें की गई हैं. इसके अलावा इसमें बताया गया है कि विश्वविद्यालयों को 3 वर्षीय परंपरागत स्नातक पाठ्यक्रम चलाने की छूट भी मिलेगी.

 

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अगर कोई छात्र 4 वर्ष का स्नातक पाठ्यक्रम करने के बाद PHD के बजाए स्नातकोत्तर करना चाहता है तो उसे ऐसा करने की छूट मिलेगी. वर्तमान में तकनीकी शिक्षा के बैचलर ऑफ टेक्नॉलॉजी (बीटेक) या बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (बीई)  4 वर्ष के स्नातक पाठ्यक्रम हैं. उनके बाद छात्र सीधे PHD में प्रवेश ले सकते हैं. 

 

आपको बता दें कि प्रो. DP सिंह ने बताया कि शिक्षा नीति में बदलाव के पहले गठित कमेटी ने रिपोर्ट में स्नातक पाठ्यक्रम की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष किए जाने की सिफारिश की है. यह नीति देश को नई दिशा देने वाली होगी. इस वजह से इसके हर बिंदु को अच्छी तरह से परख कर ही लागू किया जाएगा. नई नीति अगले वर्ष से लागू की जा सकती है.

 

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आदिवासी बेटियों के लिए खोले गए कौशल नर्सिंग कॉलेज: रघुवर दास


आदिवासी बेटियों के लिए खोले गए कौशल नर्सिंग कॉलेज: रघुवर दास

आज की बेटियां कल की भविष्य है. इन्हे शिक्षा देने की जरुरत है मगर हमारे देश में आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अपने बेटियों को शिक्षा नहीं दे पाते है. इसका मुल कारण है गरिबी. मगर हमारी केंद्र सरकार और राज्य सरकार इसे सुधारने के लिए मुहीम चला रही है. इस कड़ी में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बेटियों को एक बड़ा तोहफा देते हुए गुमला में नर्सिंग कॉलेज का उद्घाटन किया. 

 

बताया जा रहा है कि कॉलेज में इसी सत्र से पढ़ाई भी शुरु हो जाएगी. एक बैच में 120 छात्राओं को दाखिला दिया जाएगा. दो वर्ष की नर्सिंग डिग्री हासिल करने के बाद छात्राओं को प्लेसमेंट भी दिया जाएगा. बता दें कि कौशल नर्सिंग कॉलेज के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सूबे के महिला शक्ति की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए कृत संकल्पित है और इसको लेकर कई तरह की योजनाएं चला रही है.

 

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उसी कड़ी में महिलाओं को स्वालम्बी बनाने की दिशा में यह नर्सिंग खोला गया है. यहां से हर वर्ष 120 छात्राएं पढ़ कर निकलेंगी और देश के नामी गिरामी अस्पतालों में उनका प्लेसमेंट कराया जायेगा. मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि सूबे में इस तरह के 9 और नर्सिंग कॉलेज खोले जाएंगे.

 

गौरतलब है कि पहले इस इलाके में कॉलेज नहीं होने और गरीबी के कारण यहां की लड़कियां इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ देती थीं लेकिन अब वे नर्सिंग की ट्रेनिंग ले कर जरुरतमंदों की सेवा कर सकेंगी. इसके अलाव उन्होने कहा कि जनजाति क्षेत्र के विकास पर सरकार का विशेष फोकस है. सालों से आदिवासी समाज को विकास के नाम पर सिर्फ धोखा मिला है, लेकिन हमारी सरकार आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित है.

 

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